Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 25:17 — अर्थ का संक्षिप्त सार
अपने पड़ोसी के घर में बार-बार जाना चाहिए, लेकिन अत्यधिक बार जाना His neighbor's patience and boundaries. इस verse का सीधा संकेत है: चिरपरिचित आवभगत शिष्ट और मधुर हो सकती है, पर बार-बार बिना बुलाए जाना पड़ोसी को असहज कर सकता है और उनमें नफरत बढ़ा सकता है। संतुलन और विनम्रता जरूरी है ताकि सम्बन्ध विनम्रता से बने रहें।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
नीतिवचन के संचायक में लोग-परायों के बीच व्यवहार के नियम दिए जाते हैं ताकि सामाजिक रिश्ते शालीन और टिके रहें। यहाँ पड़ोसी के साथ व्यवहार पर एक सहज निशाना है: मित्रतापूर्ण उपस्थिति अच्छी है, पर अत्यधिक उपस्थिति से दूरी आ जाती है। यह प्रचलित एथिकल धारणाओं के अनुरूप है कि सीमाओं की स्थापना और शिष्टता से लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
कथ्य-आधारित टिप्पणियाँ (संक्षेप)
यहाँ कुछ पुराने टिप्पणीकारों के सार को संजोया गया है ताकि पाठ समझने में सहायता मिले:
संहिता-यूनानी संदर्भ (प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंस)
नीतिवचन के यह संकेत अन्य स्थानों में भी दूरी और संयम की महत्ता को उठाते हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट है कि संबंधों को बनाए रखने के लिए निजता, समय, और सम्मान की सीमा का संतुलन आवश्यक है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
इस प्रकार नीतिवचन 25:17 हमें यह सिखाता है कि अच्छे रिश्ते विनम्रता, सीमा-निर्धारण और संतुलन से बनते हैं—घुसपैठ नहीं, बल्कि सहारा और सम्मान से।