Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 25:15 का अर्थ
कम समय में भी धैर्य रखने से अन्याय पर राज किया जा सकता है और हल्के शब्द भी बड़े प्रतिरोध को तोड़ डालते हैं। सरल वचन और संयम से विवाद सुलझ जाते हैं, पर अधिकार या क्रोध से स्थितियाँ उलझती हैं।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
नीतिवचन के इस भाग में ज्ञान, नैतिकता और व्यवहारिक जीवन में विनम्र आलोचना के मूल्य पर प्रकाश डाला गया है। राजा-प्रजा के बीच संवाद और न्याय की प्रक्रिया में धैर्य का स्थान महत्त्वपूर्ण है। “कोमल वचन” ऐसे अनुभवजन्य उपाय हैं जो दुर्गम परिस्थितियों को भी शांत कर देते हैं, जबकि कठोर शब्द opbreng्ड को तोड़ डालते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमैटिक सार
नीतिवचन में दो धारणाओं पर बल है: चारित्रिक धैर्य और भाषिक नम्रता—दोनों मिलकर समाज में न्याय को अधिक टिकाऊ बनाते हैं। धैरज से परिस्थितियाँ सुलझती हैं, और मधुर वचन उन संघर्षों को भी सहनशील बनाते हैं जिनमें अन्यथा टूर्नामेंट हो सकता है।
संबद्ध अंश और संक्षिप्त व्याख्या
प्रचलित संदर्भों के साथ विचार-सम्बन्ध:
क्रॉस-वेसपर्स (Cross-References) के साथ संक्षेप
1) नीतिवचन 15:1 — हल्का-फुल्का शब्द भी शांति उत्पन्न कर सकता है; कठोर उत्तर मोड़ बना सकता है, पर नम्रता से स्थिति सुधरती है।
2) यशायाह 50:4 — उचित शब्दों की शिक्षा और एक दूसरे को सुनने की कला की महत्ता बताता है, ताकि निर्णय और संवाद उचित मार्ग पर चलें।
3) केलेव 4:29 — लहजे, शब्दावली और नियंत्रणित भाव-भंगिमा से समाज में संतुलन बनाए रखें।
व्यावहारिक takeaway
वक़्त और शब्द दोनों को संयमित रखें: कठिन परिस्थितियों में धीरज से काम लें और संवाद में नम्रता अपनाएं। इससे न्यायपूर्ण निष्कर्ष सामने आते हैं और रिश्ते स्थिर रहते हैं।
सार और समेकन
यह संदेश दोहरे लाभ देता है: धैर्य से विवाद शांत होते हैं और कोमल शब्दों से मन आसानी से मिलता है। हिंदी पाठकों के लिए यह सीधे-सरल व्यवहारिक निर्देश है: कठिनाई में भी संतुलन बनाए रखें और बातचीत को नरमी से संचालित करें।
नोट: इस टिप्पणी में एंट्री पेरेंट्स कुछ पुराने सार्वजनिक-प्रधान टिप्पणीकारों (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के समान विचारों के संकेत मात्र हैं, उनके उद्धरण स्थान-निर्दिष्ट उद्धरण कायम रखे जाते हैं।