Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 25:2 पर हिंदी विश्लेषण
सीधे शब्दों में अर्थ: परमेश्वर की महिमा गुप्त रहने में है, परन्तु राजाओं की महिमा तब प्रकट होती है जब वे गुप्त बातों की असलियत खोज लेते हैं। यह वाक्य बताता है कि ईश्वर के कार्य और परामर्श उसकी गुप्त रीति-नीतियों में सुरक्षित रहते हैं, और मानवों के लिए सत्य की खोज में शासन-प्रभारियों के लिए सावधानी और विवेक आवश्यक है।
pContextual background
नाथिक विश्लेषण के अनुसार, नीतिवचन के इसeka शास्त्र में लेखकीय मार्गदर्शन दिखता है कि बुद्धिमानी भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों से आती है—परमेश्वर की महिमा खुलकर न सही, पर उसका ज्ञान और योजनाएं दिखती हैं। राजाओं के लिए यह संदेश है कि सत्ता के बीच भी सत्य की खोज और निर्णय-प्रक्रिया में सत्यनिष्ठा आवश्यक है।
interpretive observations
themes at a glance
related passages and explanations
१) यशायाह 46:9-10 के संदर्भ में कहता गया है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य को स्पष्ट करता है। यह इस पंक्ति के साथ संगति बनाती है कि दिव्य योजनाओं का पूर्ण प्रकाश ईश्वर के उद्धारण से ही मिलता है—परन्तु राजाओं के लिए विवेक और सत्यापन आवश्यक है।
२) प्रकरण 16:21-23 में बुद्धिमान ज्ञान के महत्त्व पर बल दिया गया है कि ज्ञान भले ही सूक्ष्म हो परन्तु उसका प्रभाव बड़े निर्णयों पर पड़ता है।
३) इब्रानियों 4:12 में वाणी का प्रभाव स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर की वाणी सच और विचारशील विवेक उत्पन्न करती है, जो गुप्त बनाम सार्वजनिक निर्णयों में मार्गदर्शक बनती है।
short cross-references with notes
practical takeaway
राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय लेते समय सत्य की खोज, सच्चे अनुभवों का मूल्यांकन, और सलाह-श्रोताओं की राय को महत्व दें। परमेश्वर की योजनाएं गुप्त रखने में प्यारी हो सकती हैं, परमानंद के साथ सत्य को बाहर लाने का दायित्व सभी के लिए है—नागरिक और शासक दोनों पर।
सूचनात्मक संदर्भ: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक डोमेन विचारधाराओं के सामान्य सार को समेटते हुए नवीन हिंदी अभिव्यक्ति में प्रस्तुत है। आवश्यक सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हो पाए तो भी उनकी दृष्टि के अनुरूप विवेकपूर्ण सार प्रस्तुत किया गया है।