Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 4:1 1 राजाओं 4:2 1 राजाओं 4:3 1 राजाओं 4:4 1 राजाओं 4:5 1 राजाओं 4:6 1 राजाओं 4:7 1 राजाओं 4:8 1 राजाओं 4:9 1 राजाओं 4:10 1 राजाओं 4:11 1 राजाओं 4:12 1 राजाओं 4:13 1 राजाओं 4:14 1 राजाओं 4:15 1 राजाओं 4:16 1 राजाओं 4:17 1 राजाओं 4:18 1 राजाओं 4:19 1 राजाओं 4:20 1 राजाओं 4:21 1 राजाओं 4:22 1 राजाओं 4:23 1 राजाओं 4:24 1 राजाओं 4:25 1 राजाओं 4:26 1 राजाओं 4:27 1 राजाओं 4:28 1 राजाओं 4:29 1 राजाओं 4:30 1 राजाओं 4:31 1 राजाओं 4:32 1 राजाओं 4:33 1 राजाओं 4:34



1 राजाओं 4:29 पर टिप्पणी
पद के संदर्भ में देखें तो सुलैमान राजा होने के साथ-साथ परमेश्वर की कृपा से अत्यंत बुद्धि और समझ के धनी बने। परमेश्वर ने उन्हें ज्ञान, विवेक और बड़े स्तर के विचार-विन्यास से संपन्न किया, ताकि वे 나라 के प्रशासन, न्याय और नीति-निर्माण में असाधारण योग्यता दिखा सकें। यह वर्णन उनके प्रारम्भिक शासनकाल के एक स्पष्ट संकेत का है, जब परमेश्वर की दिव्य कृपा उनके सामर्थ्य के स्रोत के रूप में प्रकट होती है।
मुख्य अर्थ
यह verse दो बातें स्पष्ट करता है: परमेश्वर ने सुलैमान को बुद्धि दी और उसकी समझ बढ़ी। साथ ही उसका हृदय असंख्य गुणों से संपन्न हुआ, जो समुद्र के रेतकणों के तुल्य कहे जाते हैं। यहाँ “बुद्धि” से तात्पर्य निर्णयशक्ति और वास्तविक ज्ञान है, और “समझ” से गहरी समझ और विवेक का संकेत मिलता है। यह वह विशेष आशीर्वाद है जो शासन-कार्य, न्याय और नीति-निर्माण को सक्षम बनाता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बद्ध संदर्भ
– नीतिवचन 3:5-6: ईश्वर पर भरोसा करते हुए विचारों में विवेक और मार्गदर्शन प्राप्त होता है; यह सुलैमान के प्रकार के नेतृत्व के लिए प्रेरणा बनता है।
– दानियेल 1:17: दानियेल और उनके साथियों को भी ईश्वर ने बुद्धि और समझ दी, जो संसार के सत्य और रणनीति को समझने में सहायक हुई; सुलैमान के उदाहरण में यह एक समान चिह्न है।
– निर्गमन 31:3-5: ज्ञान और कला-कौशलों की प्राप्ति के पीछे ईश्वर की प्रेरणा और दिव्य प्रेरणा का हाथ होता है; राजा-वर्ग के कामों में भी यह प्रत्यक्ष है।
व्यावहारिक विचार
1) नेतृत्व में ईश्वर-संस्कृत बुद्धि का महत्व: सफल प्रशासन वही संभव है जिसमें निर्णय निष्पक्ष और विवेकपूर्ण हों।
2) जिम्मेदारी के साथ गुणों का विकास: “हृदय में अनगिनत गुण” से तात्पर्य पारस्परिक संबंधों, न्याय, दया और धार्मिकता को संतुलित रखना है।
3) जीवित आशीष की खेती: यदि हम भी दैनंदिन निर्णयों में ईश्वर के मार्गदर्शन और ज्ञान की माँग करें, हमारे कार्यों में स्थिरता और सफलता आ सकती है।
संक्षेप
इस verse का मूल संदेश यह है कि सुलैमन को दी गई बुद्धि और विवेक परमेश्वर की कृपा से आई; यह आशीर्वाद शासन की सफलता और समाज के समृद्धि के आधार बने। यह याद दिलाता है कि गूढ़ ज्ञान, न्यायप्रियता और बहुपक्षीय समझही किसी भी समाज के स्थायित्व के केंद्र होते हैं।
संश्लिष्ट उद्धरण (पहचानित स्रोत)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रसिद्ध टिप्पणियों से संक्षेप में इशारे मिलते हैं: बुद्धि और विवेक परमेश्वर की देन हैं; एक शासक के लिए यह परम आवश्यक है ताकि विश्वसनीय निर्णय और न्याय संभव हो सके।
छोटे cross-reference नोट
– नीतिवचन में विश्वास के साथ मार्गदर्शन की आवश्यकता; – दानियेल में वास्तविक बुद्धि और रणनीति—ईश्वरीय सहायता—का मिश्रण; – निर्गमन में तकनीकी-कारीगरी और कला के लिए दिव्य प्रेरणा का योगदान।