Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 4:1 1 राजाओं 4:2 1 राजाओं 4:3 1 राजाओं 4:4 1 राजाओं 4:5 1 राजाओं 4:6 1 राजाओं 4:7 1 राजाओं 4:8 1 राजाओं 4:9 1 राजाओं 4:10 1 राजाओं 4:11 1 राजाओं 4:12 1 राजाओं 4:13 1 राजाओं 4:14 1 राजाओं 4:15 1 राजाओं 4:16 1 राजाओं 4:17 1 राजाओं 4:18 1 राजाओं 4:19 1 राजाओं 4:20 1 राजाओं 4:21 1 राजाओं 4:22 1 राजाओं 4:23 1 राजाओं 4:24 1 राजाओं 4:25 1 राजाओं 4:26 1 राजाओं 4:27 1 राजाओं 4:28 1 राजाओं 4:29 1 राजाओं 4:30 1 राजाओं 4:31 1 राजाओं 4:32 1 राजाओं 4:33 1 राजाओं 4:34



Reader-friendly overview
यह पद राजा श्लोक-राजाओं के समय के एक महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व की विभूति को वर्णित करता है। 1 राजाओं 4:31 में बात यह है कि सामी राजा शोलोमन से पहले या उसके समय के कुछ विशिष्ट विद्वान थे जिनकी बुद्धि और कीर्ति चारों ओर फैल गई। स्पष्टार्थ यह है कि परमेश्वर ने कुछ चुनिंदा लोगों को अत्यधिक ज्ञान और विवेक से आशीषित किया था, जिससे उनकी प्रसिद्धि व्यापक समूहों तक पहुँची।
verse-by-verse discussion within its chapter
यह पद 4 अध्याय के अंतर्गत आता है जहाँ शासक के अधीन नगरों के प्रमुखों, लेखकों, और विद्वानों की सूची दी जाती है। यहाँ कहा गया है कि “वह तो और सब मनुष्यों से वरन् एतान, एज्रेही और हेमान, और माहोल के पुत्र कलकोल, और दर्दा से भी अधिक बुद्धिमान था”। यह संतुलित योग है जो एक तरफ उनकी अखण्ड बुद्धि की प्रशंसा करता है और दूसरी ओर इस बात को उजागर करता है कि प्रतिभा और सम्मान परमेश्वर की अनुमति से आता है।
क्योंकि यह पाठ राजा के महत्त्वपूर्ण सभाओं और विद्वतापूर्ण सामथ्र्यों को दर्शाता है, पाठक यह समझते हैं कि ज्ञान का स्रोत परमेश्वर है, और मानव-कीर्ति एक नश्वर प्रभाव है जो समय के साथ घट-बढ़ सकता है।
Main spiritual lesson
शिक्षा का केंद्रीय संदेश है: परमेश्वर के साथ निकटता और श्रद्धा से मिलने वाला विवेक अधिक मूल्यवान है तथा यह संसार की विविध जातियों में प्रसिद्धि और सम्मान ला सकता है। बुद्धि एक वरदान है, परंतु सत्य-जीवन में उसका प्रयोग प्रेम, धर्म और नम्रता के साथ होना चाहिए।
Cross-references and connections
इन संदर्भों में स्पष्ट होता है कि ज्ञान और प्रतिष्ठा एक साथ चलते हैं जब वे परमेश्वर की योजना के अनुरूप उपयोग में लाए जाते हैं।
Practical application
- अपने आप में बुद्धि को स्रोत-केवल बनायें: पढ़ना, विचार करना और नम्रता के साथ विचारों पर गहराई से प्रतिबिंब करें।
- दूसरों के प्रति भलमनसाहत बनाए रखें: विद्वता का प्रयोजन समाज और परमेश्वर की मंज़ूरी के लिए हो।
- जीवन के पदचिह्न पर विनम्रता रखें: महानता और कीर्ति के पीछे भी नैतिक दायित्व जुड़ा रहता है।
Summary
1 राजाओं 4:31 में दी गई विद्वता की समीक्षा यह बताती है कि परमेश्वर कुछ लोगों को असाधारण विवेक और ज्ञान से आशीषित करता है, और उनकी कीर्ति चारों ओर फैलती है। परंतु यह सभी महान गुण तब वास्तविक मूल्य पाते हैं जब वे परमेश्वर के मार्ग में, प्रेम और नम्रता के साथ काम करते हैं।
Short quotes from classic commentators ( Hindi summaries )
मार्था हेनरी से संक्षेप: यह पाठ दिखाता है कि ज्ञान एक वरदान है जो परमेश्वर से आता है और लोक-सेवा और नैतिक जीवन के लिए समर्पित होना चाहिए।
Albert Barnes से संक्षेप: बुद्धिमत्ता का यह स्तर संसार में प्रसिद्धि ला सकता है, पर इसका असली महत्व उस विवेक में है जो ईश्वर केFear और कर्तव्य के साथ संगत हो।
Adam Clarke से संक्षेप: यह केर्तव्य है कि विद्वान के साथ परमेश्वर का भय भी बराबर बना रहे, ताकि ज्ञान का प्रभाव दृढ़ और सच्चे लाभदायक रहे।
Note on exact quotations
यदि आप चाहते हों, तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक उद्धरणों में से पूर्ण वाक्यों के सटीक पहचान के साथ उद्धरण दे सकता/सकती हूँ। फिलहाल उच्चारणसंरक्षण के लिए नीचे उद्धृत सामर्थ्य का संक्षेप दिया गया है।