1 राजाओं 4:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस्साकार में पारुह का पुत्र यहोशापात,

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1 राजाओं 4:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 राजाओं 4:17 पर टिप्पणी — संदर्भ और आध्यात्मिक अर्थ

इस verse में उल्लेखित है: इस्साकार में पारुह का पुत्र यहोशापात। यह किताब 1 राजाों में राजा सलोमोन के शासन के समय के प्रशासनिक विवरण से जुड़ा है, जहाँIsrael के विभाजन के बाद प्रत्येक क्षेत्र के विद्वान, दरबारी और अधिकारी एक क्रम से सूचीबद्ध होते हैं ताकि राजा का शासन सुचारू रूप से चले। यह छोटा विवरण बताता है कि यहोशापात इस्साकार के बेटों में से एक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन इस्राएली समाज में परिवार-परिवार और जातीय समूहों के क्रम और योगदान का महत्व था।

मुख्य अर्थ

यहोशापात का नाम सुनिश्चय करता है कि सत्ता-संरचना और प्रशासनिक कार्यों में विविधता के बावजूद हर परिवार की भूमिका निर्धारित थी। इस verse में किसी एक छोटे-से नाम का उल्लेख होने से भी यह संकेत मिलता है कि राजा के राज्य-योजनाओं के लिए सामूहिक सहयोग और परिवारों का सुसंगत योगदान आवश्यक था।

दो–तीन प्रमुख थीम

  • परिवारिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधिमंडन: हर परिवार के सदस्य का नाम लेकर उसकी भूमिका दर्शाई जाती है, ताकि सामूहिक व्यवस्था स्पष्ट रहे।
  • नियोजन और प्रशासन: राजकुल की योजना में यह स्पष्ट है कि कार्यों का वितरण orderly manner में होना चाहिए था।
  • धार्मिक-सामाजिक इतिहास: यह दृश्य दिखाता है कि पुराने ईश्वर-भक्ति और राज्य-व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी थीं; रामायण-सी तुलना में भी परिवार-जनों की भूमिका सम्मानित होती थी।

संबद्ध पद लेखन (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या

  • उत्पत्ति 47:12 – परिवारों के लिए भूमि-आवंटन में प्रातिष्ठान और व्यवस्था की आवश्यकता।
  • 1 राजा 4:1-19 – King’s officers और विभागों के वितरण का विस्तृत खाका; यह verse भी प्रशासनिक क्रम को पुष्ट करता है।
  • नीतिमत्ता 27:23 – नेतृत्व और प्रबंधन में सतर्क रहने की सलाह, ताकि प्रत्येक परिवार के योगदान की सही दिशा बनी रहे।

व्यावहारिक reflection

हमारे जीवन में भी छोटे-छोटे योगदान समूह-स्तर पर मिलकर बड़े उद्देश्य बनाते हैं। परिवार, समुदाय और ईglise—हर इकाई का एक-एक सदस्य जिम्मेदारी निभाए, ताकि सामूहिक लक्ष्य प्राप्त हों। यह verse reminding करता है कि क्रम और व्यवस्था होने पर शासन और समुदाय दोनों सशक्त रहते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस्साकार में पारुह का पुत्र यहोशापात का उल्लेख एक छोटे न reprezentative नाम के जरिये बताता है कि राज-काज और धार्मिक-समुदाय के बीच स्पष्ट, सौहार्दपूर्ण व्यवस्था आवश्यक थी। यह हमें यह सिखाता है कि हर परिवार-जन एक- दूसरे के सहयोग से समुदाय की बुनियादों को मजबूत बनाते हैं।

उद्धरण नोट: नीचे दी गई धारणाएँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरणों के संक्षेप रूप से प्रेरित हैं। आवश्यक शab्द-सावधानी के साथ मूल विचारों को एकीकृत किया गया है; पूर्ण उद्धरण के लिए पाठ-नोट देखें।

अतिरिक्त पठन के लिए विचार योग्य मार्ग: 1 राजा 4:1-19; नीतिवचन 24:3-4; रोम 12:4-5 — सभी बताते हैं कि एकजुटता और क्रम से व्यवस्था प्रबल होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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