Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 4:1 1 राजाओं 4:2 1 राजाओं 4:3 1 राजाओं 4:4 1 राजाओं 4:5 1 राजाओं 4:6 1 राजाओं 4:7 1 राजाओं 4:8 1 राजाओं 4:9 1 राजाओं 4:10 1 राजाओं 4:11 1 राजाओं 4:12 1 राजाओं 4:13 1 राजाओं 4:14 1 राजाओं 4:15 1 राजाओं 4:16 1 राजाओं 4:17 1 राजाओं 4:18 1 राजाओं 4:19 1 राजाओं 4:20 1 राजाओं 4:21 1 राजाओं 4:22 1 राजाओं 4:23 1 राजाओं 4:24 1 राजाओं 4:25 1 राजाओं 4:26 1 राजाओं 4:27 1 राजाओं 4:28 1 राजाओं 4:29 1 राजाओं 4:30 1 राजाओं 4:31 1 राजाओं 4:32 1 राजाओं 4:33 1 राजाओं 4:34



1 राजाओं 4:21 — क्यों यह वाक्य महत्वपूर्ण है?
यह छंद हमे राजा सुलैमान की विश्वव्यापी शासन-संप्रभुता का दृश्य दिखाता है: निर्वचन के अनुसार वह महानदी से लेकर पलिश्तियों के देश और मिस्र की सीमा तक के राज्यों पर प्रभुता रखता था। यह विवरण केवल सत्ता की बाह्य सन्निकटता नहीं देता, बल्कि उस युग के यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने एक व्यक्ति के भीतर सभा-युग के राष्ट्रों के बीच एक संरचना स्थापित की। पाठक के लिए यह बात महत्वपूर्ण है कि प्रभुता का आधार कौन था—न कि केवल राजनीतिक शक्ति, बल्कि परमेश्वर की इच्छा और योजना के अनुसार एक ऐसी व्यवस्था जिसमें लोग सुलैमान के शासन के अंतर्गत शांति और रोटी-रोटी के भेंट से आते थे।
स्थापित संदर्भ और मूल संदर्भ-वस्तु
यह अनुभाग सुलैमन की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का समुच्चय प्रस्तुत करता है। उतार-चढ़ाव के बीच जब शासक के रूप में उसका शासन दूरी-दूर तक फैला था, तब उसकी सत्ता सिर्फ राजसी सिंहासन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक अवयवों के साथ एक एकीकृत व्यवस्था का संकेत देता है। यह भी संकेत है कि परमेश्वर ने ड्रीम-ड्रामा को साकार किया कि राष्ट्र एकजुटता से परस्पर निर्भर रहें और राजा के अंतर्गत कानून और शांति बनी रहे।
मुख्य संदेश
1) सत्ता का विस्तार एक राज्य-सम्पदा के रूप में नहीं, बल्कि परमेश्वर की व्यवस्था के साधन के रूप में। 2) अलग-अलग लोग, भिन्न-भिन्न भूभागों के लोग, सुलैमन के शासन के नीचे आकर उसकी भेंट और सम्मान देते थे; इससे यह स्पष्ट है कि एकता और समृद्धि परमेश्वर की अनुमति से आती है। 3) यह भी संकेत देता है कि विश्व-राज्य के भीतर सत्ता-नीति और धार्मिक कर्तव्य एक साथ चलते थे—शासन और भेंट दोनों परमेश्वर के लिए समर्पित थे।
कथन के भीतर पाए जाने वाले थीम्स
कुछ स्पष्ट cross-references (संक्षेप में) और उनका तात्पर्य
• दानियों और लोक-सम्पदा के संदर्भ जहां राजा की हैसियत आर्थिक समृद्धि से जुड़ी है; यह २ इतिहास-गीत और स_dummy की शुभ आशाओं के साथ जुड़ा।
• परमेश्वर की प्रतिज्ञा का संदर्भ: जब राजा राज्य-व्यवस्था बनाता है, तब उसका पालन परमेश्वर की वचनों के अनुरूप होना चाहिए।
• अन्य कustic कल्पनाएँ जहां एकता और शांति से राज्य-व्यवस्था और धर्म-समर्भ एक साथ मजबूत होते हैं।
आध्यात्मिक-जीवन के लिए खोज
इस वाक्य से हमें सीख मिलती है कि प्रभुता का उद्देश्य केवल दूरी-में-राज नहीं है, बल्कि लोग परमेश्वर के उद्देश्य से जुड़ें, उनके सामने भेंट दें, और एक सेवा-रचना बनें। यदि हम अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में इसे लागू करें, तो क्षेत्रीय विभाजन और सांस्कृतिक विविधता भी एकत्रित होकर प्रभु के राज्य की एक नगरी बन सकती है।
थोड़े देरी के लिए विचार-विमर्श
1) क्या हमारी समुदाय-जीवन में विविधता को मैं एकता बना सकता/सकती हूँ? 2) क्या मैं अपने जीवन के क्षेत्र में परमेश्वर की योजना को मानते हुए अपने स्रोतों को राष्ट्र-कल्याण के लिए दे रहा/रही हूँ? 3) सत्ता-व्यवस्था और धार्मिक कर्तव्य के बीच संतुलन कैसे बनता है?
संछिप्त उद्धरण (public-domain commentaries)
मैथ्यू हेन्री से निष्कर्षण: सत्ता का विस्तार तब तक नहीं माना जा सकता जब तक कि वह परमेश्वर के डर और व्यवस्था के साथ जुड़ा है।
अल्बर्ट बर्न्स से निष्कर्षण: सांसारिक शासन की महिमा तब सत्य होती है जब जनता अपनी भेंट और कर से परमेश्वर के लक्ष्य में सहभागी बने।
एडम क्लार्क से निष्कर्षण: यह दृश्य एक ऐसे राज्य का चित्र है जिसमें हर भाग एक-दूसरे के साथ कर्तव्य-भाव में बंधा है, और राजा एक पीढ़ी के लिए परमेश्वर की कृपा का प्रतीक बनता है।
टू-डू विचार
Related cross-references और छोटा स्पष्टीकरण
1) अन्य जगह वाद-विवाद-शास्त्र में राजा के दायित्व और जनता की भेंट का संयोजन मिलता है; यह राज्य-योजना और धार्मिक-निर्णय के समन्वय का संकेत देता है।
2) भविष्य के भविष्यवाणी-शास्त्रों में राष्ट्र-राज्य एक साथ परमेश्वर के समीप रहने का संकेत देते हैं—धर्म-राज्य की एकता का संकेत।
3) समान भूमिका वाले क्षेत्र के अंतर्गत एकता और शांति का मार्ग बताता है कि परमेश्वर की इच्छा से सारी विविधताएँ एकत्र हों।