Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 4:1 1 राजाओं 4:2 1 राजाओं 4:3 1 राजाओं 4:4 1 राजाओं 4:5 1 राजाओं 4:6 1 राजाओं 4:7 1 राजाओं 4:8 1 राजाओं 4:9 1 राजाओं 4:10 1 राजाओं 4:11 1 राजाओं 4:12 1 राजाओं 4:13 1 राजाओं 4:14 1 राजाओं 4:15 1 राजाओं 4:16 1 राजाओं 4:17 1 राजाओं 4:18 1 राजाओं 4:19 1 राजाओं 4:20 1 राजाओं 4:21 1 राजाओं 4:22 1 राजाओं 4:23 1 राजाओं 4:24 1 राजाओं 4:25 1 राजाओं 4:26 1 राजाओं 4:27 1 राजाओं 4:28 1 राजाओं 4:29 1 राजाओं 4:30 1 राजाओं 4:31 1 राजाओं 4:32 1 राजाओं 4:33 1 राजाओं 4:34



1 राजा 4:15 का संदर्भ और उनके संकेत
इस पद में नप्ताली जिले के एक हिस्से से आहात एक व्यक्ति—अहीमास—का नाम आता है, जिसने सुलैमान की बासमत नाम की बेटी से विवाह किया। यह तथ्य सत्ता-निर्मित परिवारों के बीच विवाह के पारंपरिक प्रसंगों को उजागर करता है, जिससे यह दिखता है कि शाही कुटुम्बों में विदेशी या अन्य प्रदेशों की बेटियों के साथ संबंध स्थापित करने का रुझान रहा। यहाँ हम सामान्यत: दाम्पत्य और आंतरिक राजनीतिक गठबंधन के पहलुओं को देखते हैं, न कि केवल व्यक्तिगत प्रेम या संवेदना को।
मुख्य अर्थ और संदर्भ
यह वाक्य श्लोक-संयोजन के भीतर है, जहाँ राजा सुलैमान के काल के राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने की झलक मिलती है। अहीमास की पुत्री से विवाह करना दो सामर्थ्य-प्रधान संकल्पों को जोड़ता है—राजसी औपचारिक गठबंधन और संसाधन-अनुकूल विवाह। यह दिखाता है कि साम्राज्य की सुरक्षा और प्रभाव को बढ़ाने के लिए परिवार-रचना में विदेशी सम्बन्धों का स्थान रहा है।
दो-तीन प्रमुख थीम
पारस्परिक क्रॉस-रेफरेंसेस
यह विचार मैथा-हेन्री, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विवेचनों के साथ जोड़कर समझना चाहिए। कुल मिलाकर वे यह दर्शाते हैं कि राजसी विवाह अक्सर बाहरी सम्बन्धों के जरिये सुरक्षा और सत्ता के संतुलन को सुनिश्चित करते हैं, परन्तु व्यक्तिगत जीवन-नैतिकता और धर्म-निष्ठा की कसौटियाँ भी जरूरी होती हैं।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
हम किस प्रकार अपने परिवार या समुदाय के भीतर गठबंधन बनाते हैं, यह दर्शाता है कि निर्णय लेने में आंतरिक सिद्धांतों के साथ सामाजिक-राजनीतिक आयामों का संतुलन कैसे आवश्यक है। इतिहास-परिप्रेक्ष्य में यह भी सीख देता है कि सत्ता के गठजोड़ कभी-कभी व्यक्तिगत ऊच-नीच को गहराते हुए नीतिगत निर्णयों को चुनौती दे सकते हैं।
संक्षिप्त समापन
इस श्लोक से स्पष्ट होता है कि राजा के समय के परिवारगत-राजनीतिक ढांचे में विवाह एक साधन था, जिसमें लड़ाई-युद्ध, सत्ता-प्रबलता, और सामाजिक संस्कार एक साथ घुले रहते थे। यह हमें यह विचार देता है कि सत्ता-निर्माण और नैतिकता के बीच संतुलन बनाये रखना किस प्रकार आवश्यक है।
संक्षिप्त उद्धरण-हित
मैथ्यू हेनरी, आर्थर क्लार्क और एल्बर्ट बार्न्स के सार्वजनिक-डायरी के अनुरूप संक्षिप्त विवेचन में, यह माना गया है कि राजसी विवाह नीति अक्सर राज्य-हित के अनुसार तय होते थे, और व्यक्तिगत भावनाओं की भूमिका समय-समय पर सीमाओं के भीतर रहती थी।
आवश्यक क्रॉस-रेफरेंसेस
– अन्य स्थान जहाँ राजसी विवाह या राजनीतिक गठबंधन का उल्लेख मिलता है: प्रमुख उद्धरण-आधार के अनुसार यह दर्शाता है कि सत्ता संरचना में परिवार-बंधनों का महत्व रहा है।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण शResources आपके पाठ में उपलब्ध होंगे।