Old Testament
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रोमियों 12:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
रोमियों 12:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 5:44 (HINIRV) »
परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो। (रोम. 12:14)

1 पतरस 3:9 (HINIRV) »
बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।

1 थिस्सलुनीकियों 5:15 (HINIRV) »
देखो की कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो आपस में और सबसे भी भलाई ही की चेष्टा करो। (1 पत. 3:9)
मुख्य व्याख्यात्मक कारण
रोमियों 12:14 का मूल संदेश है: शत्रुओं के प्रति क्रोध या प्रतिशोध की भावना नहीं, बल्कि आशीर्वाद और दया का व्यवहार। पौलुस यहाँ व्यक्तिगत और सामुदायिक नैतिकता की परिपक्वता का मार्ग दिखाते हैं—ईश्वरीय प्रेम का प्रमाण शत्रुता पर विजय न करके, बल्कि आशीर्वाद देकर होता है।
साहित्यिक प्रसंग
यह पद पोस्टीरियरी भाग में आता है जहाँ पौलुस रोमियों को व्यावहारिक ईसाइयत का जीवन-यापन सिखा रहे हैं (रोमियों 12–15)। पहले अंश में (रोमियों 12:1–2) वह मन का नवीनीकरण और समर्पण का आग्रह करता है; अब वह इस नैतिक रूपांतरण के रोज़मर्रा के नतीजों पर आता है—समुदाय के भीतर और बाहर व्यवहार कैसे होना चाहिए। वाक्य का विरोधाभास "आशीष दो—श्राप न दो" सरल लेकिन तीक्ष्ण निर्देशन देता है: प्रतिक्रियात्मक श्राप या बदला न, परंतु आशीष की सक्रिय नीति अपनाओ।
दैवशास्त्रीय महत्व
यह सिद्धांत ईश्वर के चरित्र की प्रतिकृति बनाने का आग्रह करता है—ईश्वर ने शत्रुओं के प्रति दया और क्षमा दिखलाई। आशीर्वाद देना न सिर्फ नैतिक श्रेष्ठता का प्रश्न है, बल्कि यह समुदाय में प्रेम और एकता बनाए रखने का साधन भी है। यह विचार न्याय और करुणा के बीच संतुलन स्थापित करता है: न्याय का अर्थ बदले की मांग नहीं, परन्तु पारितोषिक परित्याग एवं क्षमाशील प्रेम को अपनाना है।
शास्त्रीय टिप्पणियाँ (संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की परंपरागत टिप्पणियाँ इस पद की व्याख्या में सहायक हैं।
पवित्र लेखों से सम्बन्ध
यह विचार बाइबिल के अन्य अंशों से प्रतिध्वनित होता है:
मनन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 12:14 सरल लेकिन प्रभावशाली नैतिक आदेश देता है: प्रतिशोध का त्याग और आशीर्वाद का सक्रिय अभ्यास। यह केवल नैतिक आदर्श नहीं, बल्कि ईसाई चरित्र की परीक्षा है—यह दिखाता है कि क्या हम परमेश्वर के प्रेम की प्रतिफलन क्षमता रखते हैं। पुराने टिप्पणीकारों के अनुवादों और पादरीय परंपराओं के अनुसार, यह आह्वान हमारे हृदयों की गहराई में परिवर्तन कर देता है और समुदाय में शांति एवं पवित्रता को बढ़ावा देता है।