Old Testament
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रोमियों 12:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
आनन्द करनेवालों के साथ आनन्द करो, और रोनेवालों के साथ रोओ। (भज. 35:13)
रोमियों 12:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 12:26 (HINIRV) »
इसलिए यदि एक अंग दुःख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दुःख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

इब्रानियों 13:3 (HINIRV) »
कैदियों की ऐसी सुधि लो*, कि मानो उनके साथ तुम भी कैद हो; और जिनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उनकी भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है।

भजन संहिता 35:13 (HINIRV) »
जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहने रहा*, और उपवास कर-करके दुःख उठाता रहा; मुझे मेरी प्रार्थना का उत्तर नहीं मिला। (अय्यू. 30:25, रोम. 12:15)
यहRomans 12:15 का अर्थ: आनन्दित रहने वालों के साथ आनन्द और दुखी होने वालों के साथ दुख
इस पद में प्रेरित पवित्र आत्मा यह कहता है कि ईश्वरानी समुदाय में समाजिक भावनाओं की साझा धारा बनाए रखना चाहिए। माने, खुशी हो या कठिनाई—एक दूसरे के साथ समान रूप से सहभागिता करना चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि हम उन परिस्थितियों में भी प्रेम से प्रस्तुत हों जो हमारे पत्थर के मानवीय अनुभवों को जख्मी करते हैं, चाहे वे उत्सव हों या शोक।
संदर्भ-प्रस्तावना
रोमींस को पत्र रोम में भरोसे की समुदाय की गाँठें मजबूत करने के उद्देश्य से लिखा गया। 12वां अध्याय व्यक्तिगत आचरण से शुरू होकर सामुदायिक प्रेम की नींव बनाता है। verse 15 एक ऐसा व्यवहार स्थापित करता है जो हमें एक दूसरे से वास्तविक सम्बन्ध बनाए रखने को कहता है—खुशी में सहभागिता और दुःख में साथ खड़ा होना।
व्याख्यात्मक विचार
छोटी थीम-वाले बिंदु
अन्य आयतें से जुड़ाव
-cross-reference 1: कहता है कि प्रेम एक दूसरे की आशाओं और आंसुओं के प्रति संवेदनशील रहता है (उदाहरण प्रस्ताविक संकेत). यह विचार Romans 12:15 के साथ मेल खाता है कि एका-समय में दोनों भावनाओं को मान्यता दें।
-cross-reference 2: भजन 35:13 की तरह, दया और विनम्रता के साथ हम दूसरों के लिए सहानुभूति दिखाते हैं; यह भावनात्मक सहभागिता को ईमानदार बनाता है।
-cross-reference 3: 1 कुरिन्थियों 12:26 बताता है कि जब एक सदस्य दुखी होता है तो बाकी सबों को भी दुख होता है, और जबकि एक सदस्य सुखी होता है, सभी सदस्य आनंद मनाते हैं।
एतिहासिक टिप्पणी (सार)
पवित्र ग्रंथ के प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के अनुसार यह वाक्य समुदाय में आत्मीयता और देहगठन के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है। Matthew Henry और Albert Barnes ने इसे दिखाया है कि प्रेम का सही चिह्न वही है जो दूसरे के सुख-दुख में बराबर सहभागिता दिखाता है। Adam Clarke ने इसे सामाजिक-आचरण का एक प्रमुख नियम माना है—खुशी में भी साथ और दुख में भी साथ।
उद्धरण-संक्षेप (संरक्षित):
Matthew Henry: “The church is to bear one another’s burdens and rejoice with one another in prosperity.”
Albert Barnes: “To rejoice with them that do rejoice and to weep with them that weep is a living proof of the true Christian spirit.”
Adam Clarke: “The Christian is to be a fellow-sufferer and fellow-rejoicer with all” (संकेतवार व्याख्या).
प्राथमिक संदेश का संक्षेप
रोमियों 12:15 में प्रेरित ने स्पष्ट किया कि ईमानदार विश्वास का फल है सामाजिक संवेदना—हम दूसरों के सुखों में भाग लेते हैं और उनके दुखों में साथ रहते हैं। यह प्रेम का केंद्रित और व्यवहार-योग्य संकेत है जो चर्च की एकता को मजबूत बनाता है।
कथन-व्यवहार (संक्षिप्त अनुप्रयोग)
हर दिन के रिश्तों में इसे अपनायें: शुभ अवसर पर मिलकर celebrate करें, और कठिन समय में सचेत रहते हुए सहानुभूति व्यक्त करें। छोटे-छोटे संकेत—सच्चे मुस्कान, एक शब्द का सहानुभूति-आह्वान, हाथ बढ़ाकर मदद—यह सब मिलकर समुदाय को दृढ़ बनाते हैं।