Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 थिस्सलुनीकियों 5:1 1 थिस्सलुनीकियों 5:2 1 थिस्सलुनीकियों 5:3 1 थिस्सलुनीकियों 5:4 1 थिस्सलुनीकियों 5:5 1 थिस्सलुनीकियों 5:6 1 थिस्सलुनीकियों 5:7 1 थिस्सलुनीकियों 5:8 1 थिस्सलुनीकियों 5:9 1 थिस्सलुनीकियों 5:10 1 थिस्सलुनीकियों 5:11 1 थिस्सलुनीकियों 5:12 1 थिस्सलुनीकियों 5:13 1 थिस्सलुनीकियों 5:14 1 थिस्सलुनीकियों 5:15 1 थिस्सलुनीकियों 5:16 1 थिस्सलुनीकियों 5:17 1 थिस्सलुनीकियों 5:18 1 थिस्सलुनीकियों 5:19 1 थिस्सलुनीकियों 5:20 1 थिस्सलुनीकियों 5:21 1 थिस्सलुनीकियों 5:22 1 थिस्सलुनीकियों 5:23 1 थिस्सलुनीकियों 5:24 1 थिस्सलुनीकियों 5:25 1 थिस्सलुनीकियों 5:26 1 थिस्सलुनीकियों 5:27 1 थिस्सलुनीकियों 5:28



पद का परिप्रेक्ष्य और immediate setting
1 थिस्सलुनीकियों 5:15 इस पत्र के अंतिम भाग में प्रबलता से प्रेम और नैतिक आचरण पर जोर देता है। इस प्रतिपादन में प्रेरित लेखक सतर्क करते हैं कि कोई भी एक-दूसरे पर बुरा न करे, बल्कि सदैव भलाई करने के लिए तत्पर रहे। यह.statement समुदाय के भीतर एक सुरक्षित और प्रेमपूर्ण रवैया बनाए रखने के लिए एक वास्तविक मार्गदर्शक है।
ईश्वरीय चरित्र और विश्वास पर स्पष्ट संकेत
यह वचन बताता है कि परमेश्वर का उद्देश्य और followers का आयाम एक दूसरे के प्रति प्रेम और सहृदयता है। भलाई का प्रयत्न करने की प्रेरणा मानव-समुदाय के भीतर प्रेम के गतिशील को बनाए रखने के लिए है, ताकि ईश्वर के सामने एक एकजुट और सहायक जीवन दिखे। जड़ में यह विचार है कि ईश्वर दयालु और न्यायी है, और उसकी कृपा से हम एक दूसरे के प्रति सुधरने और उन्नति करने के लिए सक्षम होते हैं।
मुख्य शब्दों का सरल अर्थ
देखो की कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे — न लौटे बदला के लिए बदला; यह प्रतिरक्षा के बजाय पुनर्संयोजन का मार्ग है।
पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो — सक्रिय और निरंतर भलाई के लिए दृढ़ इच्छा; न सिर्फ अवसर पर बल्कि हर अवसर पर अच्छा करने की तैयारी।
आपस में और सबसे भी भलाई ही की चेष्टा करो — समुदाय के भीतर घुलकर सहायक होना, साथ ही सबके लिए भलाई-प्रयत्न बढ़ाना।
अन्य प्रेमुक्तियाँ तथा सेतु पाठ
इस शिक्षात्मक क्रम की पुष्टि के लिए देखें: रोम 12:17‑21 (बुराई का बदला नहीं, बल्कि मलिकत से भलाई); याकूब 3:18 (धन्यता और शांति के फल); 1 पतरस 3:9 (दूसरों के प्रति की हुई भलाई और शुभकामनाएं)। इन संदर्भों में भलाई के प्रतिफल और शांति-निर्माण का जाल स्पष्ट होता है।
हिंदी संदर्भों से निकट संबंध
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि भलाई और सामाजिक प्रेम का जीवन ईश्वरीय परिशुद्धता का प्राकृतिक परिणाम है, न कि केवल नैतिक उपदेश।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
प्रत्येक समूह के भीतर, चाहे परिवार हो या समुदाय, इस शिक्षण को जीवनचर्या में उतारना आवश्यक है:
संक्षित निष्कर्ष
धर्मग्रंथ का यह वचन हमें यह सिखाता है कि जीवन में दुश्मनी या बदला नहीं, बल्कि प्रेम-भरी भलाई ही ईश्वर के सामर्थ्य और विश्वास का लक्ष्य है। समुदाय में शांति और भरोसा इसी मार्ग पर बनते हैं।
धार्मिक उद्धरणों की निशानियाँ (महत्वपूर्ण उद्धरण स्पष्ट)
इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समानार्थी विचारों के छोटे-छोटे उल्लेख नीचे समाहित हैं: