Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 2:1 रोमियों 2:2 रोमियों 2:3 रोमियों 2:4 रोमियों 2:5 रोमियों 2:6 रोमियों 2:7 रोमियों 2:8 रोमियों 2:9 रोमियों 2:10 रोमियों 2:11 रोमियों 2:12 रोमियों 2:13 रोमियों 2:14 रोमियों 2:15 रोमियों 2:16 रोमियों 2:17 रोमियों 2:18 रोमियों 2:19 रोमियों 2:20 रोमियों 2:21 रोमियों 2:22 रोमियों 2:23 रोमियों 2:24 रोमियों 2:25 रोमियों 2:26 रोमियों 2:27 रोमियों 2:28 रोमियों 2:29



रोमियों 2:10 पर interpretive केंद्र बिंदु
यह पद ईश्वर के प्रतिफल (reward) के सार्वभौमिक दोनों सूचकों—यहूदियों और यूनानीयों—के लिए समान रूप से महिमा, सम्मान और कल्याण की योजना को उद्घाटित करता है। परमेश्वर जो भला देता है, वह हर भला कर्म के अनुसार उसे देता है जो भला करता है, चाहे वह यहूदी हो या यूनानी। इसका आशय यह है कि आस्था और व्यवहार के कारण मिलने वाला इनाम पक्षपात या सामाजिक स्थिति पर निर्भर नहीं है; ईश्वर का दायरा सार्वभौमिक है और उसके पुरस्कार उसके प्रयत्नशील लोगों की श्रद्धा और कार्य में असर दिखाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ के आलोक में
रोमियों 2 अध्याय यहूदियों की स्व-गुणवत्ता और कानून के साथ उनके विशेषाधिकारों पर चर्चा करके कहता है कि भले ही कानून के अनुसार ज्ञान अधिक हो, उनमें ईश्वर की वास्तविक न्यायप्रियता तब ही दिखाई देती है जब वे भले काम करते हैं। इस पद में महिमा (glory), आदर (honor), और कल्याण (well-being) तीन मात्रा-परिमाण हैं जो सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं—जो भला करता है उसे पहले यहूदी, फिर यूनानी कहा गया है। यह यहूदियों के सामाजिक-धार्मिक विशेषाधिकार के साथ साथ नयी व्यवस्था के तुलनात्मक न्याय की पुष्टि करता है।
धार्मिक-तात्त्विक महत्व
यहूदी बनाम यूनानी का भेद एक-समय पर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, परन्तु उद्धार का लक्ष्य और परमेश्वर की कृपा इतनी सीमाओं में नहीं बंधती। पवित्र पद यह संकेत देता है कि ईश्वर का न्याय दिव्यता के साथ व्यक्तिगत अनुपालन पर निर्भर है—जो भला करता है, उसे निष्काम महिमा और कल्याण मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि निश्चय-आस्था और कर्म एक दूसरे से मुक्त नहीं हैं; आस्था के साथ कर्मों की प्रगाढ़ता इसे दिखाती है कि परमेश्वर किस प्रकार सत्य और दया की न्यायपूर्ण व्यवस्था को चलाते हैं।
अन्य पवित्र शास्त्रों के साथ संबंध
ये-cross references यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के पुरस्कार केवल आस्था के बारे में नहीं, बल्कि उसके फल-फूलाने वाले जीवन के परिणाम हैं—यही समरूपता यहूदियों और यूनानीयों दोनों के लिए है।
Reflection questions
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 2:10 यह बताता है कि ईश्वर का इनाम सभी के लिए समान है—जो भला करता है, उसे महिमा, आदर और कल्याण प्राप्त होगा, पहले यहूदियों के लिए, फिर यूनानियों के लिए। यह न्याय की व्यापकता और प्रेम की व्यापक पहुँच की पुष्टि है: परमेश्वर अपने लोक-निर्देश पर चलते रहने वालों को सम्मानित करता है, और यह मूल्यांकन आस्था के साथ जीवन के अच्छे कर्मों से प्रतिफलित होता है।
प्रसंग-वद्ध उद्धरण (सूचना)
संदर्भित प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के सार्वजनिक डोमेन विचारों से संक्षेप मिलाया गया है। यदि आप विशिष्ट उद्धरण खोज रहे हों, तो नीचे उल्लेखित स्रोत-आलोचनाओं के सारांश पढ़िए:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—इनमें से आवश्यक जगहों पर केवल छोटा-सा सटीक उद्धरण उद्धृत किया गया है। (यदि उद्धरण उपलब्ध हों तो पाठ शामिल होगा।)
कथन-पुष्टि क्रॉस-रेफरेंसेस
गलातियों 6:7–9; याकूब 2:14–26; यूहन् 14:21 के साथ यह पाठ एक साथ मिलकर यह दिखाते हैं कि ईश्वर का पुरस्कार जोखिम नहीं, बल्कि कठिनाई में भी भला करने वाले के लिए है।