Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36



गिनती 6:26 पर टिप्पणी
सीधा अर्थ: यह वचन यहोवा द्वारा आशीर्वाद स्वरूप निर्देशित है—कि प्रभु अपने Gesicht को तेरे ऊपर फेरे और तेरे लिए शान्ति दे। यहाँ शान्ति से तात्पर्य एक स्थिर, पूर्ण और भरोसेमंद स्थिति है जिसमें मन, आत्मा और जीवन के सभी आयामों में सफल सुरक्षा मिलती है।
संदर्भ-संस्करण
गिनती 6 में נזירत्व (नसिरातीय) का नियम दिया गया है। हालाँकि यह नियम एक विशिष्ट व्यक्ति-नारायण को समर्पित जीवन का संकेत है, पर यह वचन मिलन का एक आशीर्वादी संकेत भी देता है—यहोवा अपने बनाए गए लोगों को आशीषित करके उनके जीवन में शान्ति का मार्ग खोलना चाहता है। यह संदेश विशेषकर दायित्व और प्रतिबद्धता के बीच संतुलन की ओर इशारा करता है: परमेश्वर की उपस्थिति अनुदान और सुरक्षा दोनों है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमैटिक बिंदु
1) आशीष बनाम दायित्व: परमेश्वर की कृपा से पहले व्यक्ति-व्यक्ति के लिए नियम और प्रतिबद्धताओं का एक मार्ग स्पष्ट होता है।
2) सुरक्षा की मानसिकता: शान्ति का अनुभव तब संभव है जब परमेश्वर के साथ एकनिष्ठ संबंध बना रहे।
3) दिव्य दृष्टि: ईश्वर का “मुख तेरी ओर” होना यह दर्शाता है कि उसकी प्रेरणा और संरक्षण वास्तविक जीवन के हर हिस्से को छूते हैं।
संलग्न क्रॉस-रिफरेंस और संक्षिप्त व्याख्या
पठन-प्रयोजन से निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि प्रभु अपने लोगों के लिए एक अभिषिक्त आशीष और शांति के अभय देता है। न केवल यह बताता है कि ईश्वर चाहे तो कैसे आशीर्वाद दें, बल्कि यह भी कि लोग किस प्रकार उसके समर्पण में शान्ति अनुभव कर सकते हैं—विश्वास, संकल्प और दयालुताओं के साथ जीवन जीना।
संक्षिप्त व्यावहारिक Takeaway
जब भी आत्म-चिंता बढ़े या चिंता सताने लगे, याद करें कि प्रभु का चेहरा आपके ऊपर है और वह आपकी शान्ति के स्रोत हैं। दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में उसकी उपस्थिति को मान्यता दें, और तब जीवन के छोटे-बड़े क्षणों में भी शान्ति अनुभव करेंगे।