Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 23:1 — पाठ का तात्पर्यात्मक प्रारम्भिक पृष्ठभूमि
तब बिलाम ने बालाक से कहा, “यहाँ पर मेरे लिये सात वेदियाँ बनवा, और इसी स्थान पर सात बछड़े और सात मेढ़े तैयार कर।” यह वर्णन मौरचा और बालाक की बातचीत का हिस्सा है, जो जलडमरूमध्य के किनारे के मैदानों में यहोवा के भविष्यवक्ताओं और मिस्रनापथ की पंक्ति के संबंध में हुए। बिलाम एक नुकीला सवाल उठाते हुए परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप कार्य करने की रणनीति बनाते हैं, ताकि शत्रुओं के विरुद्ध धर्मशास्त्रीय और राजनीतिक नीतियाँ मिलें।
ईश्वर या विश्वास के बारे में इस पाठ से जो संकेत मिलता है
यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना मानव से पहले है, और बुराई पर विजय पाने का मार्ग उस परमेश्वर की इच्छा के अनुसार ही निर्धारित होता है। बिलाम की यह योजना कि सात वेदियाँ और सात पशु चढ़ाएँ, एक प्रकार की एकाग्रता और प्रतीकात्मकता को दर्शाती है—युद्ध के लिए तैयारी का भौतिक आकार, जो परमेश्वर की दिशा-निर्देश के आगे तुच्छ है। परमेश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन के बिना ऐसी किसी योजना का परिणाम कुछ भी नहीं होता।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्रों की स्पष्टता
अन्य सुसंगत पाठ
यही प्रकार की प्रतीकात्मक प्रस्तुतियाँ अन्य जगहों पर भी मिलती हैं जहाँ धार्मिक कर्मों की प्रयोजन-संयोजकता पर परमेश्वर की इच्छा सर्वोपरि रहती है। उदाहरणतः:
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
• उदाहरण: एक स्थान पर पूजा-प्रार्थना का केंद्र—कई बार प्रतीकात्मक कर्मों के माध्यम से परमेश्वर के साथ सम्बन्ध मजबूत होता है। छोटे-छोटे संकेत भी विश्वास की दिशा निर्धारित कर सकते हैं, यदि वे परमेश्वर के निर्देश के अनुसार हों।
• उदाहरण: परमेश्वर के मार्ग में संकल्प और आस्था—यही बलिदान के पीछे का वास्तविक संदेशन है।
• उदाहरण: परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध प्रयास शास्त्रीय प्रकार से असफल होते हैं और उसकी योजना ही क्रांति बनाती है।
आज के संदर्भ में लागू करने योग्य बातें
1) असफल योजनाओं के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन आवश्यक है: बिना उसकी अनुमति के राजनीतिक या सामरिक उपाय केवल समय की बर्बादी होते हैं।
2) पूजा और समर्पण का उद्देश्य स्पष्ट रहे: धार्मिक कर्म केवल बाहरी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के आसरे और वाणी के अनुसार होना चाहिए।
3) विश्वास के केन्द्र में परमेश्वर की इच्छा: संकट के समय भी हमें माँगना चाहिए कि क्या यह मार्ग परमेश्वर की योजना में फिट बैठता है और क्या इसके परिणाम उसके नाम के लिए हैं।
संक्षिप्त सार
यह đoạn हमें बताता है कि परमेश्वर की योजना से बाहर कुछ भी सोचना न तो बुद्धिमानी है और न ही सफल, भले ही वह अधिक प्रतीकात्मक या सामरिक प्रतीकों के साथ क्यों न हो। बिलाम का प्रस्ताव और बालाक की बुद्धि—दोनों मिलकर यह दिखाते हैं कि विश्वस्त विश्वास और परमेश्वर की आज्ञा के ऊपर किसी भी मानवीय योजना का प्रभाव नहीं होता। परमेश्वर के निर्देश के अनुरूप ही संचालन करें, ताकि उद्देश्य अक्सर उसके नाम के glorify में बदल जाए।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के प्रकाशन से आवश्यक संक्षिप्त उद्धरण और विचार एकीकृत रूप में समाहित किए गए हैं, परन्तु उनकी पूर्ण वाक्य-उद्धरण यहाँ नहीं दिए गए हैं; यदि आप सीधे उद्धृत पंक्तियाँ देखना चाहें, तो पाठ-योग के भीतर उनके विचारों के संदर्भ उपलब्ध हैं।