Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
गिनती 23:1 गिनती 23:2 गिनती 23:3 गिनती 23:4 गिनती 23:5 गिनती 23:6 गिनती 23:7 गिनती 23:8 गिनती 23:9 गिनती 23:10 गिनती 23:11 गिनती 23:12 गिनती 23:13 गिनती 23:14 गिनती 23:15 गिनती 23:16 गिनती 23:17 गिनती 23:18 गिनती 23:19 गिनती 23:20 गिनती 23:21 गिनती 23:22 गिनती 23:23 गिनती 23:24 गिनती 23:25 गिनती 23:26 गिनती 23:27 गिनती 23:28 गिनती 23:29 गिनती 23:30



गिनती 23:27 पर दृष्टिकोण: बालाक और बिलाम की फिर से जाँच
यह पद बाला्क़ की धूर्त योजना और बिलाम के भागे-भागाई निर्णयों के बीच की संघर्षपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। बालाक का उद्देश्य यह है कि बिलाम से परमेश्वर की अनुमति से इस्राइलियों को श्राप दें, ताकि वे युद्ध में हार मान लें या कमज़ोर पड़ जाएं। परन्तु परमेश्वर का मार्ग बिलाम के कारण भी नियंत्रित होता है, और यह दृश्य दिखाता है कि परमेश्वर का कार्य मानव के चाल-चलन से परे होता है।
पृष्ठभूमि के साथ पाठ का स्थायित्व
कहानी गिनती के आरम्भ से पाठक को दिखाती है कि बार-बार परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध चलने के बावजूद, वह अपने उद्देश्य को पूरा करने का मार्ग बनाता है। बालाक ने बिलाम को बुलाकर एक और स्थान पर भेजा ताकि वह वहाँ से उन्हें श्राप दे, यह दर्शाता है कि शत्रु कहाँ-जहाँ तक पहुँच कर भी परमेश्वर की अनुमति की सीमा में ही हरकत करते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पद का केंद्रीय संदेश यह है कि परमेश्वर की योजनाएं स्वतंत्र रूप से चलती हैं, और इंसानी चाल-चालाकी से वे नहीं बदली जातीं। बिलाम के साथ घालमेल के बावजूद, परमेश्वर उसे इस्राइलियों का आशीर्वाद सुनाने के लिए प्रेरित करता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर का चयन और उद्देश्य मानवीय योजनाओं के ऊपर है। साथ ही, यह स्पष्ट करता है कि भय या लालच से प्रेरित राजनीति भी परमेश्वर के नियंत्रण के सामने टिक नहीं सकती।
अनुशीलन—अनुसंधान से मिलते पाठ
यहाँ अन्य संदर्भों से समान धुन उभरती है:
इन संदर्भों से एक स्थिर विचार उभरता है कि परमेश्वर के पास चयन और आशीष की सत्ता सर्वोपरि है।
जीवन-पाठ का अनुप्रयोग
1) विश्वास की परीक्षा: व्यक्तियों या समूहों की योजनाएँ अक्सर भय और लालच से प्रेरित हो सकती हैं; फिर भी हमें परमेश्वर के मार्ग को देखने और उसी के अनुसार पथ चुनने की आवश्यकता है।
2) परमेश्वर की योजना पर निर्भरता: कठिन परिस्थितियों में भी हमारी सुरक्षा और मार्गदर्शन परमेश्वर के आदेशों में है; मानवीय होड़-वहस में उसे न बदलना चाहिए।
3) आशीष की धारणा: दुख-संघर्ष के बीच भी परमेश्वर अपने लोगों के लिए भविष्यवाणी और आशीष की राह बनाये रखता है; हमारा उत्तर यही होना चाहिए कि हम प्रभु के वचन के अनुसार चलते रहें।
क्रॉस-रेफरन्स (संक्षिप्त और सापेक्ष)
जिन्हें देखें—परमेश्वर की योजना के ऊपर मानव योजना का क्षेत्र:
संक्षिप्त सार
बालाक की योजना कितनी भी तेज़ हो, बिलाम के साथ परमेश्वर एक नया मार्ग बनाता है और आशीष के साथ इस्राइल को संभालता है। इसका संदेश स्पष्ट है: परमेश्वर की योजनाएँ मानव योजनाओं पर सदा श्रेष्ठ रहती हैं, और हमारा कर्तव्य है कि हम उस दिव्य मार्ग के अनुसार चलें, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संदर्भित टिप्पणीकारों से)
यदि आवश्यक हो तो नीचे के आकलनित विचारों में मानक पाठ्यांशों के छोटे-छोटे उद्धरण मिलेंगे, जो पूर्व-प्रकाशित सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों से सम्बद्ध हैं।
मैथ्यू हेनरी, ऑल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की संविदानिक टिप्पणी के भीतर जो छोटे वाक्य सीधे उद्धृत होते हैं, उन्हें यहाँ सतर्कता के साथ उद्धृत किया गया है।