गिनती 23:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब बालाक ने बिलाम से कहा, “तूने मुझसे क्या किया है? मैंने तुझे अपने शत्रुओं को श्राप देने को बुलवाया था, परन्तु तूने उन्हें आशीष ही आशीष दी है।”

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गिनती 23:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

गिनती 23:11 — immediate setting

बालाक राजा ने बिलाम से यह पूछा कि उसने क्या किया है, क्योंकि उसने बालाक के इरादे के विपरीत काम किया। बालाक ने बिलाम से मन्नत मांगी थी कि वह इस्लाह के लिए श्राप दिलवाए, परन्तु बिलाम आशीष ही आशीष देता रहा। यह घटना संदर्भित करती है कि परमेश्वर की योजना मानवीय योजनाओं से ऊपर है और उसकी कृपा कभी विपक्षी के अनुरोध के अनुरूप नहीं बदलती।

ईश्वर पर विश्वास और निष्ठा का पाठ

यह पाठ हमें सिखाता है कि परमेश्वर की नियति मनुष्य की धारणाओं से परे है। बिलाम को पैसे और राजनीतिक लाभ के लिए बुलाया गया था, परन्तु परमेश्वर ने सच बोलकर आशीष ही दिया। यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर के आशीष के स्रोत चयनित व्यक्ति नहीं, बल्कि उसकी इच्छा और सत्यता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

  • :
  • परमेश्वर की कृपा और शुभभावना का प्रकाश, जो शत्रुओं के विरुद्ध भी स्वतंत्र रूप से फैलता है।
  • :
  • वह जो प्रभु के प्रतिपक्ष है; यहाँ बालाक एक नज़र से देखता है, पर परमेश्वर की योजना उसके नियंत्रण से बाहर नहीं जाती।

संबद्ध कटूत जड़

यहाँ से मिलते हैं mauve cross-references जो इस अध्याय के भीतर कहाँ कैसे परमेश्वर की प्रतिज्ञा और आशीष का ठहराव दिखाते हैं:

  • गिनती 22–24 — पहेलीपूर्ण मोड़: परमेश्वर की कृपा को मानना और शत्रुओं की योजनाओं को पलटना।
  • व्यवस्थाविवर 12 — ईश्वर की प्रतिज्ञाओं के सत्य पर बिना लाभ-लाभ के বিশ্বাস रखना।
  • भजन 2 — देवताओं के विरोध के बीच परमेश्वर की आशीष और प्रभुत्व की पुष्टि।

संक्षेप में, आशीष बनाम श्राप के इस विरोध में परमेश्वर की सच्ची इच्छा प्रमुख है, और यह विश्वासयोग्य मनुष्य के लिए अत्यंत प्रेरक है कि ईश्वर के मार्ग श्रेष्ठ और अटूट रहते हैं।

आज के संदर्भ में अनुप्रयोग

हममें से कई बार ऐसे समय आते हैं जब कार्य योजनाएं हमारे हिसाब से नहीं चलते; तब भी ईश्वर की आशीष और सुरक्षा स्थिर रहती है। किसी के दबाव या स्वार्थ से नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हमारा आशीष मिल सकता है। विश्वास के साथ:

  • भय में भी परमेश्वर की रक्षा और आशीष पर भरोसा रखें।
  • शत्रु या आलोचना के सामने भी सत्य बोलना और परमेश्वर की योजना को प्राथमिक मानना सीखें।
  • याद रखें कि कठिन परिस्थितियाँ भी ईश्वर के चयन और प्रेरणाओं को प्रकट करती हैं, ताकि उसकी महिमा बढ़े।

टीका-आमतौर पर उद्धरण (चयनित)

नोट: नीचे केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सुरक्षित सार्वजनिक-डोमेन उद्धरणों के छोटे भाग उल्लेखित हैं, यदि उपलब्ध हों।

“God is not bound to do what men expect; He will do what is right.” (कथा-संदर्भ के अनुरूप सामान्य विचार)

संक्षिप्त संदर्भ

Cross-references: गिनती 22–24; भजन 2; व्यवस्थाविवर 12. यह पंक्तियाँ परमेश्वर के नियोजन के ऊपर मानवीय योजनाओं की सीमाओं को दर्शाती हैं और यह बताती हैं कि आशीष वही देता है जो उसकी दिव्य इच्छा में है।

निष्कर्ष: इस verse में दिखी प्रेरणा यही है कि विश्वासयोग्य जीवन में परमेश्वर की आशीष सर्वोपरि है, और मानव प्रयास या शत्रुओं की चाल उसे पलट नहीं सकतीं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

गिनती 23:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

गिनती 24:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 24:10 (HINIRV) »
तब बालाक का कोप बिलाम पर भड़क उठा; और उसने हाथ पर हाथ पटककर बिलाम से कहा, “मैंने तुझे अपने शत्रुओं को श्राप देने के लिये बुलवाया, परन्तु तूने तीन बार उन्हें आशीर्वाद ही आशीर्वाद दिया है।

गिनती 22:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 22:11 (HINIRV) »
'सुन, जो दल मिस्र से निकल आया है उससे भूमि ढँप गई है; इसलिए आकर मेरे लिये उन्हें श्राप दे; सम्भव है कि मैं उनसे लड़कर उनको बरबस निकाल सकूँगा।'”

नहेम्याह 13:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नहेम्याह 13:2 (HINIRV) »
क्योंकि उन्होंने अन्न जल लेकर इस्राएलियों से भेंट नहीं की, वरन् बिलाम को उन्हें श्राप देने के लिये भेंट देकर बुलवाया था—तो भी हमारे परमेश्‍वर ने उस श्राप को आशीष में बदल दिया।

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