Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 21:17 — एक सौ चौवालीस हाथ की नाप
यह वचन प्रकाशितवाक्य के नए जन्म होते हुए नए नगर की महिमा के दृश्य का हिस्सा है, जहां परमेश्वर के पुनःस्थापित राज्य की श्रेणियाँ और उसकी पवित्रता स्पष्ट होती हैं। नगर के पथ-प्रसार की यह एक विशेष रेखा है जो उसकी महानता और विवेकपूर्ण व्यवस्था को दर्शाती है: एक नाप जो स्वर्गीय मानकों को दर्शाती है, मनुष्य की सीमा नहीं, बल्कि दिव्यता की पूरी परिपूर्णता का मापक है।
निहित अर्थ और विश्वास के बारे में प्रकाश
यह नाप बताती है कि परमेश्वर का राज्य पूर्ण और असीम है; कोई त्रुटिपूर्ण कोना नहीं, कोई दूरी नहीं, जहां लोग भटक जाएँ। इसके साथ एक hundred and forty-four (चार सौ चौवन) हाथ की संख्या से गुणात्मक पूर्णता और संतत्त्व का संकेत मिलता है। यह ऊँचाई, चौड़ाई और गहराई—तीनों की पूर्णता का प्रतीक है, जो परमेश्वर के नगर की अविनाशी संरचना का प्रतिनिधित्व करती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
संगत संदर्भ और उनका संक्षेप
1) प्रकाशितवाक्य 21:15-16: नगर की योजना और स्थापत्य का वर्णन, जहाँ स्वर्गदूत मार्गदर्शक बनकर नगर की परिमाण का माप प्रस्तुत करते हैं—यह दर्शाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था सुसंगत और पवित्र है।
2) योहन्ना 14:2-3: पिता के घर में विश्राम का स्थान है; यहाँ नाप और उसकी पूर्णता से यह अनुमान मिलता है कि परमेश्वर का निवास स्थाई और सुरक्षित है।
3) यूहन्ना 1:14: परमेश्वर का पुत्र मानवजाति में आकर उसमें बस गया; यह नगर और उसकी पूर्णता के संकेत में विश्वासियों के लिए एक आश्वासन बनता है कि परमेश्वर अपने लोगों को सुरक्षित रखेगा।
पुनः वर्तमान अनुप्रयोग
हमारे जीवन में यह पाठ स्मरण कराता है कि ईश्वर का राज्य पूर्णता से भरा है और उसकी पवित्रता हमारे मानक नहीं, बल्कि पवित्र जीवन के लिए प्रेरणा है। विश्वासियों को चाहिए कि वे अपने आचरण को इस पूर्णता के अनुरूप बनाएं—विश्वास, धैर्य और न्याय में सतर्क रहें। यह नाप हमें यह याद दिलाती है कि पृथ्वी का समय-सारिणी परिवर्तनशील है, पर परमेश्वर का राज्य अचल और संपूर्ण है, इसलिए हमें आशा के साथ दृढ़ रहते हुए अपने दैनिक जीवन में पवित्रता की दिशा में बढ़ना चाहिए।
2-3 उपयुक्त cross-references
• प्रकाशितवाक्य 21:15-16 — नगर की योजनाओं का मापक संदर्भ, वह दिव्य व्यवस्था कैसे संचालित है।
• यूहन्ना 14:2-3 — पिता के घर में स्थान और स्थायित्व का आश्वासन, नगर-उन्नति के साथ स्थिरता का संबंध।
• 1 कुरिन्थियों 2:9 — जो परम प्रत्यक्ष नहीं देखा-जो विचारणीय नहीं सुना, उसे परमेश्वर ने विश्व के लिए तैयार किया है; बुत-मुक्त आशा और पूर्णता का संकेत।
नीचे दिया गया उद्धरण संदर्भ केवल स्कंध-आकृति के लिए है; पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है।
मैथ्यू हेन्री, अलेक्ज़र बार्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त शब्द-उद्धरण जो हमने पंक्ति-दर-पंक्ति संकथन में प्रयुक्त नहीं किए हैं, यदि उपलब्ध हों तो उनकी प्रचलित समझ का समेकन इस पाठ में समाहित किया गया है।