Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 21:19 पर टिप्पणी
यह वाक्य नए नगर की नींव-पत्थरों के बखान के साथ भविष्यवाणी करता है जो परमेश्वर के राज्य की भव्यता और पवित्रता को दर्शाते हैं। संदर्भ में, अध्याय 21 दुष्टसमूह के अंत के बाद नई सृष्टि के स्थायी निवास की कल्पना प्रस्तुत करता है, जहाँ परमेश्वर अपने लोगों के बीच निवास करेगा और शहर की निर्माण-टेकनीक में बहुमूल्य पत्थरों का समृद्ध संयोजन दिखाया गया है।
केंद्रीय अर्थ
यहाँ नगर की नींव के पत्थर बहुमूल्य प्रतीक हैं—यशब, नीलमणि, लालड़ी और मरकत—जो दिव्यता, शुद्धता, कलात्मकता और स्थायित्व को दर्शाते हैं। लालित्य के साथ-साथ धार्मिक उपस्थिति और त्रुटिहीन कल्याण का संकेत है। यह स्मरण दिलाते हैं कि जो कोर नगर है, वह परमेश्वर के कल्कि-कार्य का फल है और धर्मी लोगों के लिए घर-रचना है।
मुख्य विषय
Related Passages
आरोहण से जुड़े प्रमुख संदर्भ जो इस विचार को समृद्ध करते हैं:
इन उल्लेखों का उद्देश्य इस तथ्य को दृढ़ करना है कि परमेश्वर का राज्य एक सुव्यवस्थित, पवित्र और दयालु लक्ष्य के साथ है, जो हर प्रकार की विविधता को एकीकृत करता है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने जीवन में विविधताओं को एक साथ कैसे निभाते हैं? यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के राज्य में हर भाग अनिवार्य है—चाहे आप छोटे हों या बड़े, अलग-स्वर हों या समान। विश्वास, धैर्य और समुदाय के साथ, हम अपने-अपने पत्थर बनकर नगर के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। दीन-हीन लोगों के लिए दयालुता, सत्य-व्यवहार और पवित्रता को अपनाना इस दिव्य निर्माण की आधारशिला है।
संक्षेप
प्रकाशितवाक्य 21:19 में नगर की नींव की बहुमूल्य पत्थर-वर्णन सत्य की पंक्तियाँ है: यशब, नीलमणि, लालड़ी और मरकत—ये दिखाते हैं कि परमेश्वर के भविष्य की राजधानी में श्रेष्ठता, पवित्रता और स्थायित्व एक साथ हैं। यह स्मरण दिलाता है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ एक शांत, दिव्यमादी और स्थायी साझा जीवन का निर्माण कर रहा है।
नोट: इस पर टिप्पणी मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पाठ-उद्धरण सिर्फ आवश्यक उद्धरण-स्वरूप और संक्षेप में प्रयुक्त किए गए हैं। यदि चाहें तो मैं एक-एक उद्धरण का छोटा अंश दे सकता हूँ।