Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22



प्रकाशितवाक्य 20:15 का मूल्य और संदर्भ
यह वचन स्पष्ट रूप से बताता है कि जीवन की पुस्तक में जिनका नाम नहीं लिखा हुआ मिलता, उन्हें आग की झील में डाला जाएगा। यह भयावह परंतु आवश्यक चेतावनी है कि ईश्वर के न्याय का दिन निश्चित है और प्रत्युत्तर केवल आस्था-आयाम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कर्मों और उद्धार के प्रमाणों के साथ आता है। यह वचन यूहन्ना के प्रेरित के अंतःकरण का परिणाम है कि वह अंतिम निर्णायक दिन की वास्तविकता को स्पष्ट करता है: परम_LOG के प्रतिफल के बिना जीवन का पासा पलट जाता है।
पार्शनिक और ऐतिहासिक संदर्भ
यह उद्घोष रचित अभिव्यक्ति का भाग है जो खुल्लमखुला अंत-युग के न्याय-निर्णय को व्यक्त करता है। यीशु मसीह की महिमा और पुनर्लाभ के बाद, स्वर्गीय राज्य के अंतिम प्रतिफल की तस्वीर प्रस्तुत की जाती है: सत्य-आत्मिक जीवन के साथ नाम जीवन की पुस्तक में दर्ज होना, और असत्य-आत्माओं के लिए अटल दंड। ट्रायड के तौर पर यह संदेश प्रेरित-उपदेश और भविष्यवाणी के मिश्रण के रूप में आता है।
मुख्य संदेश
बाइबल के साथ संबद्ध धारणाएँ
इस verse के साथ तीन प्रमुख धारणाएँ मिलती हैं: एकांत कौमार्य नहीं, बल्कि दया के साथ न्याय-निर्णय की संतुलित दृष्टि; दूसरे, जीवन की पुस्तक का लेखा-जोखा आत्मा की बातों, विश्वास और कर्मों का सम्मिलन है; तीसरे, उद्धार खाली-आनन्द नहीं, बल्कि परमेश्वर के व्यक्त न्याय का परिणाम है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
कई अन्य ग्रंथ इस चेतावनी को पुष्ट करते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि उद्धार और जीवन का व्यवहार बिना संयुक्त नहीं रहते।
गंभीर देहाती व्याख्या
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रवचनों में यह भाव स्पष्ट मिलता है कि जीवित विश्वास वह आधार है जो नाम जीवन की पुस्तक में नाम दर्ज कराता है, अन्यथा न्याय-घड़ी में प्रकटन होता है। के अनुसार, यह दायित्वपूर्ण चेतावनी है कि आखिर तक विश्वास के साथ आचरण भी अनिवार्य होना चाहिए। (यहाँ HG-पुष्टि के लिए नीचे के उद्धरण संक्षेप में शामिल हैं।)
देवotional विचार
यह verse हमें स्मरण कराता है कि जीवन के क्षण भर नहीं, बल्कि हर दिन की επιλογाओं की गिनती होती है। यदि हमारा नाम जीवन की पुस्तक में है, तो हमारे जीवन में क्षमा, प्रेम और धैर्य का फल होगा। यदि नहीं, तोริษ्यात्मकता और डर के बजाय ईश्वर के धर्म-न्याय के सामने आत्म-निरीक्षण और परिवर्तन का अवसर है।
सारांश
प्रकाशितवाक्य 20:15 जीवन-आत्मा के न्याय का एक स्पष्ट दृश्य है: जीवन की पुस्तक में नाम होना उद्धार का प्रमाण है; अन्यथा आग की झील—यह दंड का स्थाई परिणाम—नियति है। कारण यह है कि ईश्वर का राज्य सत्य और पवित्रता से भरा है, और हर व्यक्ति अपने निश्चय के अनुसार परिणाम का अनुभव करेगा।
संक्षिप्त उद्धरण (यानी Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से) उपलब्ध हो तो उसे अवश्य उद्धृत किया गया है: “...वह जो विश्वास के साथ नहीं रहता, उसका नाम दर्ज नहीं होता” (संकेतित पारिवारिक टिप्पणी के स्वर में)।