Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 1:5 का पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद प्रकाशन के उद्घाटन भाग में आता है जहाँ यीशु मसीह के महिमा-परा और उनके विश्वासयोग्य साक्षी बनने की पहचान सामने आती है। पूर्वकथन में बताया गया है कि यीशु मसीह कौन हैं—वह जो मरे हुओं में से जी उठे और पृथ्वी के राजाओं का अधिपति है—और इन कारणों से अनुग्रह और शान्ति हमारी तरफ से आने का अवसर बनता है। यह श्रोत को यह स्मरण कराता है कि विश्वसनीय साक्षी वही है जो जीवित है, जिसने अपने बलिदान से हमें पापों से छुड़ाया है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से उद्घाटन
पद यह बताता है कि ईश्वर की कृपा और शान्ति केवल उसी से मिलती है जो जी उठा, जो पाप पर विजय प्राप्त कर चुका है, और सारी सत्ता पर राज करता है। मसीह पर विश्वास करने वाले को उसकी “विश्वासयोग्य साक्षी” की प्रतिष्ठा दी जाती है। यह बताता है कि सुरक्षा, शान्ति और अनुग्रह का स्रोत सीधा वहाँ है—यीशु मसीह में समाहित है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
सार्वजनिक क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संदर्भ)
इन क्रॉस-रेफरेंसों के माध्यम से पाठ दिखाता है कि मसीह जीवन का स्रोत, उद्धार का केंद्र, और सृष्टि के हर हिस्से पर राज करने वाला है।
आज के समय के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप निष्कर्ष
यह पद बताता है कि ईश्वर की कृपा, शान्ति और उद्धार यीशु मसीह के जीवन-कार्य से ही मिलती है। मसीह जो विश्वासयोग्य साक्षी और जीवित राजाओं के निर्णायक अधिपति हैं, हमारे जीवन का केंद्र हैं। इस ज्ञान के साथ हमारा व्यवहार, दुआ, और प्रति-जीवन पवित्र और उत्साही रहता है।
नोटी/नोट्स
उन पाठों में जहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उद्धरण अपेक्षित हो सकते हैं, वे सामान्यत: इस प्रकार के संकेतों में मिलते हैं: “जो प्रेम करता है”—यह उद्धरण भक्तों के लिए अनुग्रह की बुनियादी पुष्टि है; “अपने लहू के द्वारा छुड़ाया”—उद्धार की विधि का सार इस विषय में है। यदि आप चाहें तो इनमें से किसी एक का छोटा उद्धरण नीचे सीधे संदर्भित किया जा सकता है, पर पूर्ण पाठ नहीं.