Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 28:15 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 28:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः उन्होंने रुपये लेकर जैसा सिखाए गए थे, वैसा ही किया; और यह बात आज तक यहूदियों में प्रचलित है।
मत्ती 28:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 28:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 6:10 (HINIRV) »
क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है*, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटककर अपने आपको विभिन्न प्रकार के दुःखों से छलनी बना लिया है।

मत्ती 26:15 (HINIRV) »
“यदि मैं उसे तुम्हारे हाथ पकड़वा दूँ, तो मुझे क्या दोगे?” उन्होंने उसे तीस चाँदी के सिक्के तौलकर दे दिए।

मत्ती 28:15 — Immediate Setting
यह पद यीशु की मृत्यु के बाद के घटनाक्रम से जुड़ा है जब चेलों ने उन अंकों के बारे में चर्चा की जो नियमों के अनुसार दान और दंड से जुड़ते थे। पाठशाला-स्वरूप कहानियों के बजाय यह भाग उन लोगों के अनुभव को सामने लाता है जो सत्य को दबाने या धोखा देने का प्रयास करते हैं, जबकि प्रभु का काम रह-रह कर आकाश से संचालित होता है।
क्या बताता है यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में
यह बताता है कि प्रभु के अग्रिम निर्देशों के अनुरूप विश्वास और नीति-नियम किस प्रकार व्यवहार में उतरते हैं। चूंकि कुण्ठित शत्रुओं के लिए भी सत्तात्मक उपाय संभव हैं, लेकिन परमेश्वर की योजना और अटल वृत्ति से आगे कोई योजना नहीं चलती। यहाँ दाँत-कटोरी चाल पर भी परमेश्वर की निर्णायक सत्ता छाया डाले रहती है—जो भी होता है, वह प्रभु के प्रचार में सहायता बनता है, भले ही मनुष्यों की चालें भ्रष्ट-चालों जैसी क्यों न हों।
महत्वपूर्ण शब्द/चित्रों की स्पष्टता
संयुक्त पंक्तियाँ और सम्बन्धित अंश
परोक्ष तौर पर यह विचार देता है कि सत्य प्रचारित होने की राह में मनुष्य ही नहीं, बल्कि उसकी रणनीतियाँ भी प्रयोजन में बाधक बनती हैं; परन्तु God's sovereignty लगातार आगे बढ़ती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और उनका संक्षिप्त अर्थ
- यशायाह के समय की योजनाएँ और निष्फलता: मानवीय चालें अक्सर धोखे पर निर्भर होती हैं, पर परमेश्वर के वचन की कसौटी सत्य को स्थापित करती है।
- प्रेरितों के काम: प्रचार के तरीके और राजनीतिक-धार्मिक प्रतिरोध के बीच भी ईश्वर का प्रयोजन आगे बढ़ता है।
- मत्ती 27:57-66 और 28:11-15 के बीच के क्रमिक घटनाक्रम—यीशु के शव के साथ क्रोधित लोग और उद्धार का सार्वजनिक प्रमाण।
आज के लिए अनुप्रयोग
हम अपने जीवन में निश्चय करें कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, सत्य ईश्वर के मार्ग पर ही चलता है। धोखे या छल से किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि ईमानदारी और विश्वास के साथ कदम उठाने चाहिए। चुनौती के समय भी प्रभु की प्रेरणा पर भरोसा रखें, और अपनी आस्थाओं को परमेश्वर के सत्य के अनुरूप ढालें।
एक समेकित विवेचना
इस पंक्ति में ऊपर से संचालित योजनाओं की चर्चा से पहले, हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर की योजना मानवीय चतुराई से ऊपर है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डायरी-शैली टिप्पणी में यह साझा ध्येय है कि धोखाधड़ी के बावजूद परमेश्वर अपने उद्देश्य को पूरा करता है और चेलों की भूमिका को पुख्ता बनाता है। यहाँ संक्षेप में: धर्म-सत्य का प्रकाश तब ही पूर्ण होता है जब मानव-यानी चालाकी भी उसे पूर्व-नियत दिशा में धकेलने के बजाय ईमानदारी और विश्वास के मार्ग पर चलने को प्रेरित करे।