Old Testament
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यूहन्ना 13:1 यूहन्ना 13:2 यूहन्ना 13:3 यूहन्ना 13:4 यूहन्ना 13:5 यूहन्ना 13:6 यूहन्ना 13:7 यूहन्ना 13:8 यूहन्ना 13:9 यूहन्ना 13:10 यूहन्ना 13:11 यूहन्ना 13:12 यूहन्ना 13:13 यूहन्ना 13:14 यूहन्ना 13:15 यूहन्ना 13:16 यूहन्ना 13:17 यूहन्ना 13:18 यूहन्ना 13:19 यूहन्ना 13:20 यूहन्ना 13:21 यूहन्ना 13:22 यूहन्ना 13:23 यूहन्ना 13:24 यूहन्ना 13:25 यूहन्ना 13:26 यूहन्ना 13:27 यूहन्ना 13:28 यूहन्ना 13:29 यूहन्ना 13:30 यूहन्ना 13:31 यूहन्ना 13:32 यूहन्ना 13:33 यूहन्ना 13:34 यूहन्ना 13:35 यूहन्ना 13:36 यूहन्ना 13:37 यूहन्ना 13:38



यूहन्ना 13:20 पर टिप्पणी
वह दिन हमारे प्रभु यीशु मसीह के अंतिम ग्रहणों के समय का है, जब वह अपने चेलों से प्रेम का संदेश दे रहे थे और स्पष्ट रूप से उन्हें यह सीख दे रहे थे कि वे जो कुछ भी कर रहे हैं, वह न केवल उनके लिए है बल्कि परम पिता परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में संचालित है। इस वचन में यीशु अपने शिष्यों को एक रहस्य बतला रहे हैं: जो किसी संदेशवाहक को ग्रहण करे, वह उसे ग्रहण करता है; और जो उसे ग्रहण करता है, वह उसे भेजने वाले को ग्रहण करता है। यह दिखाता है कि यीशु के साथ संलग्न लोग वास्तविक रूप से पिता ईश्वर के साथ जुड़ते हैं, क्योंकि वे उनके प्रतिनिधि के रूप में नीचे भेजे गये हैं।
यूहन्ना 13:20 के अंतर्गत पाठ का स्थान
यह वचन यूहन्ना 13 के अध्याय में घटित होता है जब यीशु अपने घुटन-रूप से पहले अपने चेलों के बीच प्रेम-कार्य और प्रतीक्षा का संदेश दे रहे हैं। यह एक प्रत्यक्ष प्रशंसा है कि मानवीय स्वीकारriterion में एक आध्यात्मिक क्रिया है: दूसरे के द्वारा वह परम पिता के काम को स्वीकारना है। यह वचन “जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करे” के रूप में एक उद्घोषणा है कि प्रेरित-सम्प्रेषण में विश्वास के साथ शामिल होना असल में पिता के साथ एक स्वीकृति है।
मुख्य आध्यात्मिक सीख
अन्य बाइबिल संदर्भों के साथ तुलना
• मत्ती 10:40 – “जो तुम्हें भेजे तो मुझे भजते हैं; जो मुझे भजता है वह जिसे भेजा गया है उसे भजता है।” यह बताता है कि पृथ्वी पर भेजे गये लोगों के साथ हमारे संबंध कैसे ईश्वरीय स्वीकृति से जुड़े हैं।
• इफिसियों 3:2–3 – प्रेरितों के अद्भुत रहस्य की घोषणा: परमेश्वर ने प्रचारकों के द्वारा मार्ग खोल दिये ताकि अज्ञानी भी सत्य को समझें।
• प्रकाशित-वाक्य 3:20 – जो कोई होकर ख्रिस्त के साथ दूर से नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रवेश करे, वह सचेतन रूप से प्रभु के स्वागत को अनुभव करेगा।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- धार्मिक समुदाय में हमारी प्राथमिकता यह हो कि हम जिसMESSENGER को मानते हैं, उनके संदेश के पीछे ईश्वर की दृष्टि और उद्देश्य ढूंढ़ें।
- व्यक्तिगत जीवन में, जब भी हम किसी संस्थान या पवित्र-उद्देश्य के लिए आती सहायता को देखेंगे, तो उस सहयोग को ईश्वर की अनुमति के रूप में गिनें।
- चर्च नेतृत्व में, सभी सदस्य जिम्मेदारी लें कि वे संदेश को सही-खाल से ग्रहण करें और उसे प्रेम, सत्य और सम्मान के साथ आगे बढ़ाने में सहभागी बनें।
क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संकल्पना
1) यह वचन प्रेरित करता है कि इशारे-प्रेषण के सम्मान में विश्वास बरकरार रहे; 2) यह बताता है कि प्रभु के प्रतिनिधियों की स्वीकृति से वास्तविक आशीष मिलती है; 3) यह社区 में एकता के संकेत देता है कि हर संदेश परमेश्वर की योजना का हिस्सा है—यदि उसे सही तरीके से ग्रहण किया जाए।
कूट-समापन
यूहन्ना 13:20 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का काम इन्हीं व्यक्तियों के माध्यम से आगे बढ़ता है जिनके पास उनका संदेश है; जो किसी संदेशवाहक को ग्रहण करता है, वह उसे ग्रहण नहीं करता सिर्फ एक इंसान को, बल्कि उस दिव्य प्रदत्त को ग्रहण करता है जो उसे भेजता है। यह भय या संदेह नहीं, बल्कि विश्वास और आस्था की बुलाहट है कि हम ईश्वर के साथ सीधे जुड़ें और उनके द्वारा चुने गये साधन के माध्यम से जीवन के रहस्यों को समझें।
नोट: इस पद के स्पष्ट प्रायः व्याख्या में नीचे के विद्वान से नुस्खा मिलती है—मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सारगर्भित विचार उपलब्ध हैं, परंतु पूर्ण उद्धरणों को संकुचित रूप में ही उद्धृत किया गया है ताकि पाठक को मूल संदेश साफ़ नजर आये।