Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 12:1 यूहन्ना 12:2 यूहन्ना 12:3 यूहन्ना 12:4 यूहन्ना 12:5 यूहन्ना 12:6 यूहन्ना 12:7 यूहन्ना 12:8 यूहन्ना 12:9 यूहन्ना 12:10 यूहन्ना 12:11 यूहन्ना 12:12 यूहन्ना 12:13 यूहन्ना 12:14 यूहन्ना 12:15 यूहन्ना 12:16 यूहन्ना 12:17 यूहन्ना 12:18 यूहन्ना 12:19 यूहन्ना 12:20 यूहन्ना 12:21 यूहन्ना 12:22 यूहन्ना 12:23 यूहन्ना 12:24 यूहन्ना 12:25 यूहन्ना 12:26 यूहन्ना 12:27 यूहन्ना 12:28 यूहन्ना 12:29 यूहन्ना 12:30 यूहन्ना 12:31 यूहन्ना 12:32 यूहन्ना 12:33 यूहन्ना 12:34 यूहन्ना 12:35 यूहन्ना 12:36 यूहन्ना 12:37 यूहन्ना 12:38 यूहन्ना 12:39 यूहन्ना 12:40 यूहन्ना 12:41 यूहन्ना 12:42 यूहन्ना 12:43 यूहन्ना 12:44 यूहन्ना 12:45 यूहन्ना 12:46 यूहन्ना 12:47 यूहन्ना 12:48 यूहन्ना 12:49 यूहन्ना 12:50



यूहन्ना 12:23 का स्पष्टार्थ
इस वाक्य में यीशु कहते हैं कि “वह समय आ गया है, कि मनुष्य के पुत्र की महिमा हो।” इसका सीधा तात्पर्य यह है कि परमेश्वर का उद्देश्य—पादरियों के द्वारा पूरा होता वह मोड़, जिसमें यीशु की महिमा स्पष्ट रूप से प्रकट होगी—तभी होगा जब वह अपने दुखद कार्य, क्रूस पर मृत्यु और फिरजीवन के साथ उद्धार की राह को पूरा करेंगे। यह समय यहीं से शुरू होता है और ईश्वर की महिमा का उद्घाटन क्रूस के माध्यम से दिखाई देता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहुअन 12 के संदर्भ में, यीशु की मृत्यु से कुछ दिन पहले का क्षण है, जब लोग אליו इसलिए आते हैं ताकि वे उसकी महिमा के सामने अपनी आस्था ठहराएं। गिलगत्ताह यरूशलेम की यात्रा के समय यीशु अपने शिष्यों के साथ यह भौतिक जगत की महिमा नहीं, बल्कि दिव्य महिमा की घोषणा कर रहे हैं—जो क्रूस तक जाएगी और मसीह के पुनर्जीवन से पूरक होगी।
ऐतिहासिक और दार्शनिक विचार
संदेश में एक सूक्ष्म परिवर्तन आता है: महिमा का अर्थ अब केवल जबर्दस्त राजनीतिक या सांसारिक प्रभाव नहीं है, बल्कि सर्वाधिक उच्च प्रेम और आत्म-त्याग से जुड़ा है। मसीह की महिमा तब स्पष्ट होगी जब वह स्वयं को अर्पण कर के मानवता के उद्धार के लिए क्रूस पर चढ़ेंगे, और उसी में ईश्वर की महिमा प्रकट होगी। यहूदियों के पुराने विचारों के विपरीत भी नहीं है, क्योंकि प्रभु की महिमा परमेश्वर के प्रेम और सत्य की उद्घोषणा में है।
मुख्य निरीक्षण
समान विचारधार के तात्पर्य
इस वाक्य के साथ निकट-दूरी वाले क्रियात्मक संकेत हिम्य और प्रेरित ग्रंथों के साथ समेकित होते हैं—ये भी बताते हैं कि मसीह का सम्मान और महिमा, उनके दुख और पुनर्जीवन के बिना अधूरा है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) यूहन्ना 13:31-32: महिमा के साथ प्रेम और सेवा का मोड़—यही दर्शन इस अध्याय से आगे खुलता है।
2) मत्ती 20:28: मानव पुत्र की महिमा पुरुषों के उद्धार के लिए सेवा-निर्वाण में है, न कि प्रभुत्व के लिए।
3) रोम 8:18: हमारी वर्तमान यातनाओं की महिमा से अधिक विशाल महिमा भविष्य में है, जो मसीह के साथ होगी।
छोटा व्यावहारिक takeaway
जब हम दिखावटी महिमा के बजाय सेवा, आत्म-त्याग और प्रेम के मार्ग पर चलेंगे, तब हम वही “महिमा” अनुभव कर पाएंगे जिसकी शुरुआत यीशु ने यूहन्ना 12:23 में की है — ईश्वर की महिमा का वास्तविक दर्शन।
नोट और उद्धृत विचार
सूत्रधारियों के रूप में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के भीतर से उपलब्ध संक्षिप्त उद्धरण आवश्यकतानुसार यहां पाए जा सकते हैं।