Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 6:1 लूका 6:2 लूका 6:3 लूका 6:4 लूका 6:5 लूका 6:6 लूका 6:7 लूका 6:8 लूका 6:9 लूका 6:10 लूका 6:11 लूका 6:12 लूका 6:13 लूका 6:14 लूका 6:15 लूका 6:16 लूका 6:17 लूका 6:18 लूका 6:19 लूका 6:20 लूका 6:21 लूका 6:22 लूका 6:23 लूका 6:24 लूका 6:25 लूका 6:26 लूका 6:27 लूका 6:28 लूका 6:29 लूका 6:30 लूका 6:31 लूका 6:32 लूका 6:33 लूका 6:34 लूका 6:35 लूका 6:36 लूका 6:37 लूका 6:38 लूका 6:39 लूका 6:40 लूका 6:41 लूका 6:42 लूका 6:43 लूका 6:44 लूका 6:45 लूका 6:46 लूका 6:47 लूका 6:48 लूका 6:49



मुख्य निष्कर्ष: मांगो और दे दिया जाएगा—दिल से उदारता और प्रेरणा
Luke 6:30 में ईश्वर-राज्य की प्रवृत्ति स्पष्ट हो उठती है: जो कोई तुम से माँगे, उसे दे; जो तुम्हारी वस्तु छीन ले, उससे न माँग। यह कथन व्यवहार में न केवल परोपकार की प्रेरणा देता है, बल्कि हमारे दिल की स्वामित्व-भावना को टटोलता है। यह नहीं कि हम अनिवार्य रूप से हर चीज़ के नुकसान को स्वीकार कर लें, बल्कि यह कि प्रेम हमारे संसाधनों को स्वार्थ के बजाय दूसरों की जरूरत के अनुरूप बाँटने के लिए कहता है।
साहित्यिक प्रसंग (लूका के सन्दर्भ-परिप्रेक्ष्य)
यह वाक्य लूका के व्यावहारिक नैतिक शिक्षा रीति-नैतिकता का भाग है, जो क्रमशः परस्पर प्रेम और करुणा की चर्चा करता है। लूका एकतरफा पाठ नहीं देता; यीशु के आशीर्वचन समाज में आर्थिक असमानताओं के बीच समानता और दया का संदेश बनते हैं। यह पाठ ऊँचे दानवीर और आत्म-संरक्षण के बीच संतुलन प्रस्तुत करता है—हम किस प्रकार दूसरों की ज़रूरत के अनुरूप अपने संसाधनों का उपयोग करें।
पवित्रात्मा की कार्यशीलता: थोपे गए दायित्व बनाम प्रेम-स्वरूप आचरण
यह पाठ दिखाता है कि अनुदान और दया केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का आंतरिक ढांचा है। सन्तुलन यह है कि जब किसी की माँग आए, तो दिल से सहायता की जाए; और जब किसी वस्तु पर अधिकार बना रहे, तब भी दया की तीव्रता बनी रहे—यह स्वार्थ-रहित जीवन के प्रति प्रेरणा है।
थियोलॉजिक संकेत और क्रॉस-रेफरेंसेस
आउट-ऑफ-लाइन संदर्भों के अनुसार यह मूल विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के बीच संगत प्रवचनों में भी दिखाई देता है। कहा गया है कि क्रिस्चियन जीवन का परीक्षण यह है कि क्या हम उन चीज़ों को बाँटने के लिए तैयार हैं जो हमारे पास हैं, और क्या हमारे दिल से अदम्य उदारता उभरती है।
प्रश्न-परिक्षण
संक्षिप्त निष्कर्ष
गवाही देती है कि यीशु का आह्वान एक उदार जीवन की ओर है: मांगने वाले की जरूरत के अनुसार देना, और अपनी वस्तुओं पर दूसरे के अधिकार को स्वीकार करते हुए न माँगना। यह समुदाय-आस्थापन और विश्वास के साथ जुड़ा एक व्यवहार है—जो आत्म-रक्षा के बजाय दया की गहराई को दर्शाता है।
पवित्र-ग्रंथ से समेकित संकेत
यह वाक्य जीवन के दैनिक व्यवहार में दयालुता और उदारता की एक साधारण लेकिन गहन गाइड है। नीचे दिए गए चुने हुए क्रॉस-रेफरेंसेस से जुड़ी आध्यात्मिक सच्चाइयाँ स्पष्ट होती हैं—परन्तु इन्हें संपूर्ण वाक्यों के बजाय संक्षेप में लिया गया है:
नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संबंधित पंक्तियाँ नीचे संक्षेप में उल्लेखित हैं अगर उपलब्ध हों—लेकिन पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिए गए हैं।