Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 कुरिन्थियों 9:6 बाइबल पद की व्याख्या
2 कुरिन्थियों 9:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (नीति. 11:24, नीति. 22:9)
2 कुरिन्थियों 9:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 कुरिन्थियों 9:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

नीतिवचन 11:24 (HINIRV) »
ऐसे हैं, जो छितरा देते हैं, फिर भी उनकी बढ़ती ही होती है; और ऐसे भी हैं जो यथार्थ से कम देते हैं, और इससे उनकी घटती ही होती है। (2 कुरिन्थियों. 9:6)

लूका 6:38 (HINIRV) »
दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा-दबाकर और हिला-हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।”

नीतिवचन 22:9 (HINIRV) »
दया करनेवाले पर आशीष फलती है, क्योंकि वह कंगाल को अपनी रोटी में से देता है। (2 कुरिन्थियों. 9:10)
2 कुरिन्थियों 9:6 — संदर्भ और अर्थ
पद में पौलुस कह रहा है, “जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा और जो बहुत बोता है वह बहुत काटेगा।” यह किसी प्रकार की वित्तीय मोहताजियों की बात नहीं, बल्कि दान और उदारता के नियम पर आधारित एक आध्यात्मिक तथ्य है: मनुष्यों की प्रेरणा जितनी उदार होगी, परिणाम भी उतना अधिक भरपूर होगा। प्रेरणा की स्थिति भीतर से आती है, न कि केवल बाहरी दायित्व से। यह विचार 1) अच्छाइयों की प्रकृति, 2) प्रोत्साहन और इमानदारी, 3) समुदाय के कल्याण के लिए समर्पण, तीन आयामों में समझ सकता है।
मुख्य आशय
यह वाक्य एक धारणा देता है कि उदारता की मात्रा हमारे जीवन में उसी अनुपात में बहते वरदानों को आकर्षित करती है। जैसे बीज जितना बोया जाएगा, खेत उतना ही बोझ बनेगा; उसी प्रकार जो दिल खोलकर देता है, उसे वैसी ही आशीष मिलती है। यह न तो धन-लिप्सा का बचाव है और न ही दान को केवल “अपनी योग्यता” के रूप में दिखाने का आग्रह; बल्कि यह आत्म-स्वामित्व और अल्पता के बजाय ईश्वर के दयालु नियत पर भरोसा करने का आग्रह है।
तीन प्रमुख थीम
अनुशंसा किए गए क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त解释
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दान की नीति केवल बराबरी का खेल नहीं है, बल्कि ईश्वर की कृपा के स्वागत की एक प्रक्रिया है।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस verse में पौलुस हमें बतला रहा है कि उदारता एक निहित कानून है—जो जितना अधिक देता है, उसकी आशीष भी उतनी बढ़ती है—यदि यह दिल से और आवश्यकता-के अनुसार किया गया हो। यह केवल धन का प्रश्न नहीं, बल्कि आत्म-समर्पण, समुदाय-उन्नति और ईश्वर-विश्वास का मामला है।
टिप्पणीकारों से संक्षेप— मैथ्यू हेन्री (Matthew Henry) ने दान की प्रेरणा को “दिल की पवित्रता” से जोड़ा है; ऐल्बर्ट बARNेस (Albert Barnes) ने जातीय-आर्थिक दबावों के बीच भी उदारता की सुगमता पर बल दिया है; एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने इस नियम को चातुर्य नहीं, बल्कि ईश्वर के वरदान के उत्तर के रूप में समझाया है।