2 कुरिन्थियों 9:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।

2 कुरिन्थियों 9:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 कुरिन्थियों 9:15 — संपूर्ण दान के लिए परमेश्वर का धन्यवाद

पद 9:15 प्रेरित पौलुस का एक अत्यंत मौन और प्रबोधनकारी धन्यवाद है। यह तहेदिल से दिया गया प्रणाम है जो समर्पण और उदारता के परिणामस्वरूप निकलता है। लेखन में यह प्रमाणित करता है कि परमेश्वर ने जो दान हमें दिया है—विशेषकर वह अनुग्रह, दया और आध्यात्मिक वरदान—उसके लिए हमारे पास अपार प्रशंसा और आभार है। यह दान केवल भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं, बल्कि ईश्वरीय सहायता, विश्वास की गिरफ्त और दयालुता की प्रेरणा भी है जो हमें दूसरों की भलाई के लिए प्रेरित करती है।

मुख्य विचार: इस वाक्य का मूल संदेश है कि परमेश्वर ने हमें जो भी दान भेजे हैं, उनका कारण और स्रोत एक ही है—उसकी अपरिमित कृपा। हमारे आभार का अर्थ है कि हम उन दानों को ईश्वर के सम्मान के लिए और अपने भाइयों के मसीही कल्याण के लिए उपयोग करें।

तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वरीय उदारता का स्रोत: हर श्रेष्ठ उपहार परमेश्वर से आता है; वह दान स्वीकार कर लेने और उसे सही तरह से व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित करता है।
  • आभार की गहराई: वास्तविक प्रशंसा वह है जो जीवन में क्रिया बनकर सामने आए—चाहे वह धन से हो, समय से हो, या दूसरों के लिए सेवाभाव से हो।
  • साक्ष्य-कमलता और आचार: दान का उद्देश्य एक दूसरों की सहायता और ईश्वरीय राज्य के बढ़ोतरी के लिए है; आभार से प्रेरित होकर हम दयालुता को बढ़ाते हैं।

पवित्र संदर्भ से जुड़ाव

यह verse पवित्र प्रेरित पौलुस के तीतर-तरेह संबोधन के समापन में आता है, जहाँ वह कुरिन्थ चर्च की उदारता और दान-पात्रता पर गर्व नहीं करता, बल्कि प्रभु की कृपा के प्रभाव के रूप में सब कुछ प्रस्तुत करता है।

व्यावहारिक विचार

हमें आभार व्यक्त करते समय यह पूछना चाहिए: क्या मैं प्रभु के दान के उत्तर में उसकी महिमा के लिए अपने संसाधनों का सदुपयोग कर रहा हूँ? क्या मेरी आशीर्वचन और सहायता दूसरों को यथार्थ में मदद दे रहे हैं? आभार केवल शब्द नहीं, बल्कि कर्म बनना चाहिए—समय, ऊर्जा और धन के सही उपयोग से प्रकट।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त)

यही विचार 1 कुरिन्थियों 4:7 और יफ 5:18-19 से जुड़ता है, जहां प्रेरित-पौलुस ईश्वर की कृपा के अनुदान को समझकर विनम्रता और शुभ-चिन्तन के साथ जीवन जीने की बात कहते हैं—कि हर उत्तम उपहार परमेश्वर से है और हमें उसे उपयोग में लाना चाहिए।

संक्षिप्त समापन

2 कुरिन्थियों 9:15 प्रभु की असीम कृपा के स्मरण के साथ आभार व्यक्त करने का परम स्रोत है। यह बताता है कि दान देना और उसका सही तिरस्कार नहीं, बल्कि उसका सही उद्देश्य है—ईश्वर की महिमा और भाइयों की भलाई। हमारा आभार तब साक्ष्य बनता है जब दान से स्पष्ट रूप से प्रेम और सेवा का फल निकलता है।

नोट: इस पद पर प्रचलित हिनिर्व अनुवाद के अनुसार, “परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।” यह देह-समर्थन, आध्यात्मिक वरदान और उद्धार की कृपा के अनुग्रह की स्मृति कराता है—कि हर दान परमेश्वर की उदार कृपा से आता है और उसके लिए हमारे होंठों पर प्रशंसा बनी रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 कुरिन्थियों 9:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु परमेश्‍वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हमको जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान की सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।

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और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्‍वर पिता का धन्यवाद करते रहो।

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“क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

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