Old Testament
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2 कुरिन्थियों 9:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं तुम्हारे मन की तैयारी को जानता हूँ, जिसके कारण मैं तुम्हारे विषय में मकिदुनियों के सामने घमण्ड दिखाता हूँ, कि अखाया के लोग एक वर्ष से तैयार हुए हैं, और तुम्हारे उत्साह ने और बहुतों को भी उभारा है।
2 कुरिन्थियों 9:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 कुरिन्थियों 9:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 8:10 (HINIRV) »
और इस बात में मेरा विचार यही है: यह तुम्हारे लिये अच्छा है; जो एक वर्ष से न तो केवल इस काम को करने ही में, परन्तु इस बात के चाहने में भी प्रथम हुए थे।

2 कुरिन्थियों 8:8 (HINIRV) »
मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं*, परन्तु औरों के उत्साह से तुम्हारे प्रेम की सच्चाई को परखने के लिये कहता हूँ।

2 कुरिन्थियों 8:24 (HINIRV) »
अतः अपना प्रेम और हमारा वह घमण्ड जो तुम्हारे विषय में है कलीसियाओं के सामने उन्हें सिद्ध करके दिखाओ।
मुख्य बोध: घोषणा और उत्साह का पार बराबर अनुभव
2 कुरिन्थियों 9:2 में पवित्र लेखक ने मकदूनियों के सामने अपनी योजना और प्रोत्साहन को स्पष्ट किया कि अखाया के लोगों के तैयार होने से प्रेरित होकर अन्य विश्वासियों का भी उत्साह बढ़ेगा। यह वाक्य दरअसल ईश्वरीय कृपा के साथ मनुष्यों के सहयोग और धर्मार्थ अवसरों को दिखाता है: यदि हमारा दिल, हमारी योजना और हमारी उदारता एक साथ काम करें, तो प्रेरणा और उद्गार बहकर सभी को उन्नति देती है।
1) साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह पाठ पतरस-यानी कुरिन्थियों के बीच चल रहे दान-वीचारण को समर्थन देता है। आलोचकों का कहना है कि पवित्र लेखक अपने सहयोगियों की प्रतीक्षा और उनकी तैयारी की चर्चा कर उन सामर्थ्यों का उल्लेख कर रहे हैं जिनसे मित्रों के मनों में आशा और विश्वास बढ़े। मकिदुनियों के पूर्व-उल्लेख से यह संकेत मिलता है कि समुदाय के भीतर उदारता और तैयारियों का एक साझा लक्ष्य है। अखाया के लोगों की एक वर्ष तक সক्त तैयारी दिखाती है कि सरकार-योजना बनाकर काम करना सतह से नहीं, भीतर की प्रेरणा से फलता-फूलता है।
2) थीओलॉजिकल significane ( theological significance )
यह संदेश दो तत्वों पर बल देता है: पहला, विश्वासियों की एकता और उत्साह का सामूहिक प्रभाव—जब प्रेरणा साझा होती है, तो अधिक से अधिक लोग सहभागी बनते हैं। दूसरा, उद्धार-कार्य के लिए तैयारियाँ परमेश्वर की कृपा के प्रतिफल के रूप में देखी जाती हैं: लोगों का मनुष्य-प्रयास जब ईश्वर-कृत प्रयत्न के साथ जुड़ता है, तब उदारता और उत्साह द्विगुणित होते हैं। इस प्रकार पवित्र प्रेरणा और मानवीय पहल एक साथ चलकर सक्षम समुदाय बनाते हैं।
3) पवित्र ग्रंथों के साथ संबंध (Cross-references)
इन संदर्भों में समस्त संदेश यही है कि प्रेरणा और तैयारी मिलकर दान-कार्य में गहराई लाते हैं और समुदाय को लाभ देता है।
4) पाठ से प्रेरित प्रश्न (Questions for reflection)
5) संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें स्मरण कराता है कि प्रेरणा और तैयारी एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। मकिदुनियों की एक वर्ष की तैयारी और अखाया के लोगों का उत्साह दर्शाते हैं कि जब समुदाय एक साथ प्रभु की कृपा और रिश्तों के सहारे आगे बढ़ता है, तब उदारता और प्रेम का चक्र प्रभावी होकर बड़े काम कर देता है।
काव्यात्मक सार: “तैयारी पर आधारित उत्साह” ek साझा उद्देश्य बनकर बहुतेरे लोगों को प्रेरित करता है—यह ईश्वर के काम के लिए एक प्रेरक मार्ग है।