Old Testament
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2 कुरिन्थियों 9:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्त करेगा; और तुम्हारे धार्मिकता के फलों को बढ़ाएगा। (यशा. 55:10, होशे 10:12)
2 कुरिन्थियों 9:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 कुरिन्थियों 9:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 55:10 (HINIRV) »
“जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ ऐसे ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिससे बोलनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, (2 कुरि. 9:10)

होशे 10:12 (HINIRV) »
अपने लिये धर्म का बीज बोओ*, तब करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो; देखो, अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है, कि वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाएँ। (यिर्म. 4:3)

2 कुरिन्थियों 9:6 (HINIRV) »
परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (नीति. 11:24, नीति. 22:9)
2 कुरिन्थियों 9:10 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह पद प्रेरित पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित पवित्र तर्क को समेटता है: जो बीज बोने वाले को बीज देता है और भोजन के लिए रोटी देता है उसे भी बीज और फल देता है। पाठ एक दयालु, आदान-प्रदान करने वाले ईश्वर की स्थिरता का स्मरण कराता है—वह नीचे दिए गए कदमों के साथ अपने लोगों की धार्मिकता के फलों को बढ़ाने के लिए मार्ग बनाता है।
संक्षेप परिचय: अध्याय के संदर्भ में
पाद 9:10 पनापूर्ण निधिवृत्ति के पीछे आता है: दृष्टान्त यह है कि जो कुछ भी दे, वह वही बहाल कर दिया जाएगा। पंक्ति में “बोनेवाला” और “बीज” का शब्द-चयन वह दर्शाते हैं कि ईश्वर स्वयं वे पदार्थ देता है जिनसे आध्यात्मिक वृद्धि संभव हो—बीज, भोजन, रोटी—all मिलकर जीवन-परिणाम के लिए एक चक्र बनाते हैं। इस अध्याय में पवित्र प्रेरित पॉल पौलुस कलीसिया के दयालु योगदानों और भेंट के मार्ग से धर्मी जीवन की वृद्धि का महत्व बताते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य शास्त्रीय संदर्भों के साथ तुलना
यशा 55:10 में लिखा है कि बीज और वर्षा दोनों को भगवान देता है ताकि उपज हो; होशे 10:12 मन को सत्य और धर्म के मार्ग पर ठहराने की प्रेरणा देता है—ताकि नर आत्म-न्याय से उभारकर फल भरे। इन संदर्भों से साफ है कि आशीष एक संतुलित दान-चक्र है: आत्मा की उन्नति के लिए नैतिक नियम और ईश्वर के वरदान एक साथ चलते हैं।
व्यावहारिक आवेदन
अगर आप दे रहे हैं, तो विश्वास से दें, न कि सुविधानुसार। ईश्वर जो देता है, उसे स्वीकार कर के उसी मार्ग पर आगे बढ़ें—बीज बोएं, ताकि प्राकृतिक और आध्यात्मिक फलों दोनों वृद्धि करें। धार्मिकता के फलों को बढ़ाने के लिए उदारता एक ऐसा जल है जो प्रेम के खेत को हरा-भरा बनाता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त)
1) याकूब 1:17— हर अच्छी देन और पूर्ण कृपा ऊपर से आती है; संभवना के साथ दान करना, परमेश्वर के उदारता के अनुरूप।
2) गलातियों 6:7-9— जो कुछ बोते हैं वही काटेंगे; धैर्य के साथ सही समय पर फसल पाते हैं।
3) रोमन 12:8— उदारता और उपकार के लिए उन्मुख जीवन, एक-एक के हित में भागीदारी।
चर्च-यादृच्छिक उद्धरण एवं संदर्भ
यदि उपलब्ध हो, "मैक्टफ्यू शे हार्नेस" प्रकार के पवित्र टिप्पणीकारों के शब्दों से जो भी प्रत्यक्ष उद्धरण मिलते हैं वे नीचे उद्धृत किए जाएंगे:
- मैथ्यू हेनरी: "धन का सही उपयोग वह है जिसमें दिल ईश्वर के काम के लिए खुला हो।"
- अल्बर्ट बार्न्स: "ईश्वर की कृपा से दुःख-सहिष्णुता नहीं, बल्कि उदारता से फल निकलता है।"
- एडम क्लार्क: "जो देता है, वह अधिक पाता है—यह चक्र ईश्वर की व्यवस्था है।"
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 कुरिन्थियों 9:10 हमें सिखाता है कि ईश्वर अपनी कृपा से हमें बीज, भोजन और फलों के रूप में आशीष देता है, ताकि हमारी धार्मिकता बढ़े और समाज में प्रेम का प्रवाह बना रहे। देन के साथ विश्वास और धैर्य जरूरी हैं; परमेश्वर के क्रम में योगदान दें और पवित्रता के फलों में वृद्धि देखें।