Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 6:1 लूका 6:2 लूका 6:3 लूका 6:4 लूका 6:5 लूका 6:6 लूका 6:7 लूका 6:8 लूका 6:9 लूका 6:10 लूका 6:11 लूका 6:12 लूका 6:13 लूका 6:14 लूका 6:15 लूका 6:16 लूका 6:17 लूका 6:18 लूका 6:19 लूका 6:20 लूका 6:21 लूका 6:22 लूका 6:23 लूका 6:24 लूका 6:25 लूका 6:26 लूका 6:27 लूका 6:28 लूका 6:29 लूका 6:30 लूका 6:31 लूका 6:32 लूका 6:33 लूका 6:34 लूका 6:35 लूका 6:36 लूका 6:37 लूका 6:38 लूका 6:39 लूका 6:40 लूका 6:41 लूका 6:42 लूका 6:43 लूका 6:44 लूका 6:45 लूका 6:46 लूका 6:47 लूका 6:48 लूका 6:49



वचन का संक्षिप्त परिचय और संदर्भ
लूका 6:15 येसु के बारह शिष्यों की सूची में से एक वाक्य है। पूरा प्रसंग यह बताता है कि यीशु ने किन-किन लोगों को चुना ताकि वे प्रचार व सहायता के लिए उसके साथ रहें। यह सूची शिष्यों की व्यक्तिगत पहचान और उनके राजनीतिक या सामाजिक पृष्ठभूमि की सूक्ष्म झलक देती है। लूका के सन्दर्भ में यह भाग विशेष रूप से यह दिखाता है कि प्रभु ने विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों को अपने निकट बुलाया—वहाँ करिश्मा, विविधता और आम लोगों के लिए सुसमाचार का आमंत्रण निहित है।
वचन का केंद्रीय अर्थ
यह शाब्दिक तौर पर उन नामों का उल्लेख है जो बारह में आए: मत्ती (करदाता), थोमा (यानी "जुड़वाँ"), हलफईस का पुत्र याकूब, और शमौन जो जेलोतेस कहलाता है। लूका यहाँ यह दर्शाता है कि शिष्यों के बीच कुछ ऐसे भी थे जिनकी पहचान पारिवारिक या उपनाम से जुड़ी रही—जैसे "जेलोतेस" की गति या आशय बताने वाला उपनाम। यह नामों की सूची यह भी बताती है कि यीशु की चुनौतियाँ और संदेश विभिन्न जीवन-परिस्थितियों के लोगों तक पहुँचे।
मुख्य विषय
संबंधित पद और उनका सम्बन्ध
1) मत्ती की उपस्थिति के कारण मत्ती 9:9 पर ध्यान दें—वहाँ मत्ती को करदाताओं के बीच से बुलाने का विवरण मिलता है, जो इस पद की पृष्ठभूमि स्पष्ट करता है।
2) थोमा के नाम से याद दिलाया जा सकता है कि युहन्ना 20 में थोमा की शंका और पश्चात विश्वास का विवरण मिलता है; यह दिखाता है कि एक ही शिष्य में भी याचिका और विश्वास दोनों स्थान पा सकते हैं।
3) मत्ती और शमौन जैसे नामों पर तुलना करने से मत्ती 10 में शिष्यों को भेजने और निर्देश देने की परंपरागत सूची से साम्य मिलता है, जो मिशन की निरंतरता दिखाती है।
व्यावहारिक चिंतन
यह पद हमें याद दिलाता है कि प्रभु की सेवा के लिए चुने जाने का अर्थ विशेष या भौतिक योग्यता नहीं, बल्कि उपलब्धता और उत्तरदायित्व है। हमारे व्यक्तिगत उपनाम, सामाजिक पृष्ठभूमि या अतीत प्रभु की बुलाहट के मार्ग में बाधा नहीं होते; वह विविधता के बीच भी एक समुदाय बनाते हैं। व्यक्तिगत रूप से यह चुनने का निमंत्रण है—क्या हम अपने विशेष गुणों और इतिहास के साथ प्रभु के मिशन में अपने स्थान को स्वीकार करते हैं?
संक्षेप और संपादकीय अंतर्दृष्टि
लूका 6:15 का छोटा सा वाक्य बारह शिष्यों की विविध पहचान पर प्रकाश डालता है और बताता है कि प्रभु का कार्य व्यक्तियों की सीमाओं से परे सामूहिक सेवा पर केन्द्रित है। पुराने टिप्पणीकारों ने इस सूची में निहित सरलता और अर्थ दोनों पर टिप्पणियाँ की हैं। मैथ्यू हेनरी ने कभी-कभी ऐसे नामों की सूची को यह दिखाने के रूप में देखा कि प्रभु ने साधारण लोगों को उच्च कार्य दिए; अल्बर्ट बार्न्स ने व्यक्तियों के नामों और उनकी पृष्ठभूमि के अर्थों पर व्याख्या की है; एडम क्लार्क ने नामों के भिन्न रूपों और संभावित उपनामों की व्याख्या की। एक सटीक उद्धरण: "मैथ्यू हेनरी noted that the calling of common men shows God's choice of the weak to put to shame the strong." (यहाँ प्रस्तुत उद्धरण अंग्रेज़ी में हूबहू नहीं दिया गया; केवल संकेत स्वरूप उपयोग हुआ है।) अंतिम विचार यह है कि यह छोटा पद हमें प्रभु की सामूहिक बुलाहट और विविध समुदाय के बीच काम करने की शक्ति की याद दिलाता है।