Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 6:1 लूका 6:2 लूका 6:3 लूका 6:4 लूका 6:5 लूका 6:6 लूका 6:7 लूका 6:8 लूका 6:9 लूका 6:10 लूका 6:11 लूका 6:12 लूका 6:13 लूका 6:14 लूका 6:15 लूका 6:16 लूका 6:17 लूका 6:18 लूका 6:19 लूका 6:20 लूका 6:21 लूका 6:22 लूका 6:23 लूका 6:24 लूका 6:25 लूका 6:26 लूका 6:27 लूका 6:28 लूका 6:29 लूका 6:30 लूका 6:31 लूका 6:32 लूका 6:33 लूका 6:34 लूका 6:35 लूका 6:36 लूका 6:37 लूका 6:38 लूका 6:39 लूका 6:40 लूका 6:41 लूका 6:42 लूका 6:43 लूका 6:44 लूका 6:45 लूका 6:46 लूका 6:47 लूका 6:48 लूका 6:49



लूका 6:37 संदर्भ में पाठ का तात्पर्य
इस पद्य में यीशु स्पष्ट कर देते हैं कि हमें दूसरों के आचरण के आधार पर निर्णय नहीं करना चाहिए, बल्कि दया-पूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। “दोष मत लगाओ” का संकेत है कि हमें आलोचनात्मक न्याय से बचना चाहिए; “तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा” से प्रमाण मिलता है कि ईश्वर वह दयालु नियम देता है जो हमारे ही व्यवहार पर उलटकर लौटता है। “क्षम करो, तो तुम्हें भी क्षमा किया जाएगा” इस वचन का केंद्र है—परमेश्वर के साथ रिश्ते में क्षमा को फैलाकर हम अपने उत्तरदायित्व का प्रकटीकरण करते हैं।
ईश्वर की प्रकृति और विश्वास के बारे में पाठक के लिए स्पष्टियाँ
यह शिक्षा परमेश्वर के दयालु नियमों के अनुरूप है: हम दूसरों के दोषों को देख कर नाप-तौल नहीं करते; बल्कि जैसे हमने उन्हें पाया—उसी तरह हमारे लिए भी मापा जाएगा। Jesús यहाँ रिश्ते-निर्माण और समुदाय के जीवन में सत्य और दया की संतुलन की आवश्यकता बताते हैं।
कुंजी शब्दों और चित्रों की स्पष्टिकरण
संबद्ध बायबल अंश
यद्यपि इस पाठ का केंद्र आलोचना-निवारण है, निम्न तिनका विचार स्पष्ट करते हैं कि कैसे परमेश्वर हमारे व्यवहार को समझता है और कैसे हम भी उसका उपकार मानते हैं:
- मत्ती 7:1-2: "तत्क्षण में न्याय न करोगे, तो तुम पर भी न्याय नहीं किया जाएगा..." यह भी एक ही परामर्श को दोहराता है—जज्मेंट की दृष्टि में सावधानी।
- मरकुस 11:25: “जब तुम अपनी प्रस्तुति को प्रार्थना के लिए ले आते हो, और तुम्हें किसी से प्रतिशोध मिलता है, माफ़ कर दो...” क्षमा का व्यवहार रिश्ते के कारणी-नियमानुसार है।
ऐतिहासिक-टिप्पणियाँ (संक्षेप में)
फुमदार व्याख्याताओं ने इस पद को समुदाय-जीवन में पक्षपात से दूर, दूसरों के साथ शांति-पूर्ण व्यवहार के तौर पर देखा है। हेनरी, बार्न्स और क्लार्क जैसे सार्वजनिक-डायसों के टिप्पणी-रेखाओं में उन्होंने आग्रह किया है कि आपसी दोष-निवारण में दयालुता और सजगता बरकरार रखें, ताकि हमारा प्रभाव ईश्वर के प्रेम के समान हो।
मुख्य संदेश की एकीकृत सार
– दोषों के लिए कठोर बहस से बचें; आपसी आलोचना के बजाय दया को प्रोत्साहित करें।
– क्षमा करने की नीति अपनाने से न केवल सम्बन्ध सुधरते हैं, बल्कि स्वयं के हृदय में भी शांति और स्वतंत्रता आती है।
– यह शिक्षात्मक नियम व्यक्तिगत जीवन और समुदाय के व्यवहार को बाध्य करता है: जो जैसा करते हैं, वही वैसे ही लौटकर आता है।
आज का अनुप्रयोग
cross-references के साथ छोटा संकलन
1) मत्ती 7:1-2 — न्याय का मानक हमारे ऊपर उलटकर लग सकता है; व्यावहारिक परीक्षण: दूसरों पर अपनी अपेक्षाएँ सहज रखें।
2) मर्कुस 11:25 — क्षमा की प्रार्थना के साथ संबंध बनाए रखना आवश्यक।
3) लूका 6:38 (सहयोगी पाठ) — गतिशीलता का नियम: जैसा आप मरोड़ेंगे, वैसा लौटकर मिलेगा; दया का फल प्राप्त होगा।