Old Testament
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इफिसियों 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सब पवित्र लोगों के साथ भली-भाँति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी है।
इफिसियों 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इफिसियों 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 103:11 (HINIRV) »
जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊँचा है, वैसे ही उसकी करुणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।

अय्यूब 11:7 (HINIRV) »
“क्या तू परमेश्वर का गूढ़ भेद पा सकता है? और क्या तू सर्वशक्तिमान का मर्म पूरी रीति से जाँच सकता है?

भजन संहिता 103:17 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग-युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है, (लूका 1:50)
मुख्य व्याख्या के बिंदु
एफिसियों 3:18 में प्रेरित पौलुस हमें यीशु मसीह के प्रेम की विशालता को गहराई से अनुभव करने के लिए बुलाते हैं—ताकि हम पवित्रों के साथ मिलकर उसकी चौड़ाई, लम्बाई, ऊँचाई और गहराई को समझें। इसका अर्थ है कि मसीह का प्रेम केवल व्यक्तिगत तौर पर एक अनुभव नहीं है, बल्कि एक समुदायिक संकेत है जो विश्व-व्यापी और सुसमृतिक आयामों को समाहित करता है। वह प्रेम जो प्रारब्ध से परे व्यापक है, हमें यह समझ देता है कि ईश्वर का उद्धार केवल आत्म-अनुभव नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र को ढकता है: मंजिल से आकाश तक, पृथ्वी से स्वर्ग तक।
कुटुम्बीय संदर्भ और साहित्यिक संदर्भ
पौलुस यहाँ एक व्यापक धुरी में चर्च के समुदाय को संभालते हैं: मसीह का प्रेम गहराई से समझना, ताकि हम संयुक्त रूप से—उचित ड्यूरेशन के साथ—उसकी चौड़ाई (विश्व-व्यापी अधिकार), लम्बाई (प्रारम्भ से समाप्ति तक की योजना), ऊँचाई (आत्मिक उन्नति) और गहराई (दिल की परिवर्तनशील गहराई) को अनुभव कर सकें। यह अनुभूति न केवल जानकारी है, बल्कि परिवर्तनकारी अनुभव है जो विश्वास समुदाय को एक साथ बांधता है।
चतुष्कोणीय आयाम की théological महत्ता
1) चौड़ाई: मसीह का प्रेम सभी जातियों, हर मनुष्य के लिए खुला है और किसी भेदभाव से परे है। 2) लम्बाई: उद्धार की योजना प्रारम्भ से समाप्ति तक एक सतत कार्य है, जो ईश्वर के वचन और वादा से दृढ़ है। 3) ऊँचाई: आत्मा के उन्मुख जीवन और प्रेरित जीवन के उच्चतम स्तर की ओर सदा अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है। 4) गहराई: हृदय के भीतर परिवर्तन की गहराई—जहाँ हमारी कठोरताएँ ढहती हैं और मसीही माफ़ी हाम्रो जीवन का केंद्र बनती है।
Cross-scriptural संकेत
-_prev Cross-reference: रोमियों 8:38-39_ यह दिखाता है कि मसीह के प्रेम का दायरा मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होता।
- prev Cross-reference: यूहन्ना 3:16-17_ परम प्रेम का सिद्धांत—ईश्वर ने प्रेम से_world को दिया।
- prev Cross-reference: 2 कुरिन्थियों 5:14-15_ मसीह का प्रेम हमारा जीवन संचालक बनता है।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
क्या कहना है—नक़्शे के अनुसार एक संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद में ईश्वर के प्रेम का एक व्यापक, बहुआयामी आकार है जिसे समझना हमारे विश्वास के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। मसीह का प्रेम हमें एकजुट करते हुए उपदेशित करता है कि हम उनमें समर्पण और करुणा के साथ अपने समुदायों में फैलें—और यही वह लोग हैं जो पवित्रता और प्रेम के साथ एक नया जीवन जीते हैं।
यूजिंग उद्धरण (नोट)
यदि नीचे दिए गए तीन प्रमुख सार्वजनिक-डायरे में से किसी एक के शब्द सीधे उद्धृत हों, तो वे नीचे साफ-साफ बताए गए हैं:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke: इन पुस्तकों के टिकाऊ विवेचन में उनके सामान्य टिप्पणी-उद्धरण मिलते हैं; स्थान-संदर्भ में उनके शब्दों की संक्षिप्त प्रस्तुति दी जा सकती है, परन्तु पूरा पाठ नहीं।
संक्षिप्त संदर्भ सूची
1) रोमियों 8:38-39 — प्रेम की असीमता
2) यूहन्ना 3:16-17 — प्रेम की उपस्थिति और उद्धार
3) 2 कुरिन्थियों 5:14-15 — प्रेम से प्रेरित जीवन