यहूदा 1:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस एकमात्र परमेश्‍वर के लिए, हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

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यहूदा 1:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहूदा 1:25 का अर्थ और संदर्भ

सीधे शब्दों में कहें तो यह पद परमेश्वर के एकमात्र उद्धारकर्ता के महिमामय चरित्र की स्थिरता और अनंतता की पुष्टि करता है—यानी वही परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता, यीशु मसीह के द्वारा प्रकट महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार सदियों से स्थिर हैं, और युग-युग तक बने रहेंगे।

संदर्भ-संभावना

यहूदा पत्र एक बड़ी बारम्बारता से सतर्कता, सजगता और विश्वास के ठहराव की मांग करता है क्योंकि ऐसे समय में गलत शिक्षाएं और दावेदार उद्धारकर्ता आ रहे थे। इस संदर्भ में अंतिम प्रशस्ति वह है जो परमेश्वर के एकत्व, यीशु मसीह की यथार्थ महिमा और प्रभुत्व को स्थापित करती है। यह उद्घोषणा पाठक को भरोसा देती है कि परमेश्वर के काम और महिमा में परिवर्तन नहीं आते; वह अनंत है और उसकी सत्तापूर्ति स्थिर है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • एकमात्र परमेश्वर की महिमा: यह शास्त्र चिन्हित करता है कि उद्धारकर्ता की महिमा परमेश्वर की महिमा से मेल खाती है; यह ईमानदार आस्था की पुष्टि है कि यीशु मसीह ही परमेश्वर की चरित्री कार्यवाहक सत्ता हैं।
  • सनातन काल से युगानुयुग तक: समय की सीमा नहीं; ईश्वर की सत्ता और भूमिका अनंत है। चाहे काळ आ जाए या दौर बदले, प्रभु यीशु के द्वारा प्रदान किया गया उद्धार और उसकी शासन-शक्ति अचल रहती है।
  • गौरव, पराक्रम और अधिकार: इन तीनों शब्दों से दिखता है कि उद्धारकर्ता का कार्य संपूर्ण नियंत्रण और स्थिति का स्रोत है; वह सभी चीजों का मालिक और निर्णयकर्ता है।

संरचित क्रॉस-रेफरेंसेज़

  • यूहन्ना 1:14— परमेश्वर के भवन में रहने की योजना: यीशु मसीह में परमेश्वर की महिमा निहित है; इस उद्धार में उसकी सत्ता और प्रतिष्ठा स्पष्ट होती है।
  • कुलंद: 1:15— यीशु के बारे में पूर्ण प्रभुत्व और सर्व-उद्धारकत्व का उद्घोष: “उसने सब कुछ बनवाया है” जैसी धारणाओं से प्रेरणा मिलती है कि यीशु सर्वोच्च अधिकारी हैं।
  • फिलिप्पियों 2:9–11— प्रभुता की शीर्षगति: हर घुटना उसके सामने झुकना चाहिए; यह उसी महिमा और अधिकार की पुष्टि करता है जो इस पद में भी अभिव्यक्त है।

महत्वपूर्ण टिप्पणी (सार)

यहूदा 1:25 हमारे विश्वास की धुरी को पकड़ता है—यही वह परमेश्वर-उद्धारक है जिसकी महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार अनंत है। यह अनुभूति हमें यह सीख देती है कि स्वतंत्र मन से उद्धार की खोज नहीं, बल्कि परमेश्वर के कार्य-स्वरूप पर भरोसा ही पर्याप्त है।

संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष

  • हम अपने जीवन के निर्णयों में यीशु मसीह के सर्वोच्च अधिकार को मानें और उसकी महिमा को केन्द्र में रखें।
  • भरोसा रखें कि परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, उद्धारकर्ता की नीति स्थिर है और उसका शासन अनंत है।

उद्धरण के लिए यहूदा 1:25 के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संयोग-उद्धरण नीचे नहीं दिए गए हैं, क्योंकि यह अनुरोध संरक्षित है कि केवल आवश्यक संदर्भ और सार ही सामिल हों। यदि आप चाहें तो मैं उनके स्पष्ट वाक्यों के छोटे अंश (कड़ी-नक़ल) उद्धृत कर दूँ, परन्तु बिना पूर्ण पद पाठ के।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहूदा 1:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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