Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहूदा 1



यूहदा के उपदेश में धार्मिक सचाई और नैतिक दायित्व
इस कविता-उद्धरण का सबसे मुख्य बिंदु है: ईमान के साथ रहने वालों को पाद्रियों और असत्य के प्रभाव से बचाते हुए, गलत मार्ग पर चल रहे लोगों को सत्य की ओर लाने के लिए सहायता और दया करना; परन्तु प्रलोभन से बचाने के लिए अस्थिर या कलंकित वस्त्र—शरीर के द्वारा फैल गए अशुद्धि—को ठुकराते हुए, पवित्रता की गवाही देना। इस संदेश का आशय ध्यान में रखकर यह स्पष्ट होता है कि सच्ची प्रियदर्शिता वही है जो मार्ग.Errors से लोगों को निकालकर उनसे प्रेमपूर्वक और धैर्य के साथ संयत रूप से पुनः जुड़े।
पाठ के literaryContext
यहूदा पत्र में ऐसे अनेक समुदायों के बारे में चेतावनियाँ दी जाती हैं जो विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं या भ्रमित कर रहे हैं। यह वाक्य दो भागों को जोड़ता है: पहली तबाही से बचाने की कटु-सत्यावृत्ति और दूसरी प्रकारांतर से आत्मिक शुद्धता बनाए रखना। पूछना चाहिए कि "आग में से निकालना" से तात्पर्य क्या है—यह निर्गम है जो falsehood से बचाने के लिए है, न कि हिंसक दमन। साथ ही "उस वस्त्र से घृणा" का अर्थ है संसार के कलंकित प्रभावों को छोड़ना और नैतिक पवित्रता बनाए रखना।
तीसरा भाग: theological significance
यह उद्धरण इस बात पर बल देता है कि क्रिश्तन संघर्ष एक साथ है: एक ओर जीवित विश्वास में बने रहना और दूसरी ओर संदिग्ध आचरण से प्रभावित न होना। मसीही समुदाय में दया, साहस और सावधानी—ये तीनों चाहिए: कठिन परिस्थितियों में मित्रों को आग से बचाने के प्रयास, डरे हुए दर्शनों के लिए दया की सहायता, और अशुद्ध या कलंकित अभ्यास से दूरी बनाए रखना।
Cross-References (संक्षिप्त स्पष्टीकरण)
प्रश्नों के लिए विचार
संक्षेप निष्कर्ष
यूहदा 1:23 में उद्धारक प्रेम के साथ एक सशक्त सन्देश दिया गया है: उन लोगों को आग से बचाने के लिए सचेत व करुणा-युक्त सहयोग दें, परन्तु कलंकित आचरण से घृणा करें। यह विश्वास और पवित्रता का संतुलन है—सच्ची दया वह है जो उद्धार की ओर मोड़ती है और पवित्रता की राह पर टिके रहने की प्रेरणा देती है।
उद्धरण स्रोत और संकलन नोट: इस प्रकार के दार्शनिक-आचार-नीति संबंधी विवेचन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के public-domain टिप्पणियाँ ऐतिहासिक संदर्भ के साथ सहायक रही हैं। ध्यान रहे कि हम शब्द-संदर्भ में संक्षेप उद्धरणों का उपयोग करते हैं; परन्तु पूर्ण पद्य-ग्रंथ नहीं दिए जाते।