Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 1:1 1 तीमुथियुस 1:2 1 तीमुथियुस 1:3 1 तीमुथियुस 1:4 1 तीमुथियुस 1:5 1 तीमुथियुस 1:6 1 तीमुथियुस 1:7 1 तीमुथियुस 1:8 1 तीमुथियुस 1:9 1 तीमुथियुस 1:10 1 तीमुथियुस 1:11 1 तीमुथियुस 1:12 1 तीमुथियुस 1:13 1 तीमुथियुस 1:14 1 तीमुथियुस 1:15 1 तीमुथियुस 1:16 1 तीमुथियुस 1:17 1 तीमुथियुस 1:18 1 तीमुथियुस 1:19 1 तीमुथियुस 1:20



1 तीमुथियुस 1:17 — संदर्भ सहित सार
पद का संदर्भ शुरुआती ईश्वरीय सेवा और प्रेरित पौलुस के निर्देशों के बाद आता है। इस पत्र में पौलुस चर्च के वर्तमान संकटों के बीच परमेश्वर की पृथ्वी-सीमाहीन महिमा और उत्तरदायित्व की याद दिलाते हैं। 1 तीमुथियुस 1:17 में वे परमेश्वर को “सनातन राजा अर्थात् अविनाशी” कहकर उसकी महिमा को अनंतकाल तक चलने वाले 특별 worship के अनुरूप प्रस्तुत करते हैं। यह वाक्य धार्मिक कर्मों से ऊपर उठकर परमेश्वर की सार्वभौमिक महिमा और सत्ता का उद्घोष है।
मुख्य अर्थ
इस पद का केंद्रीय संदेश यह है कि परमेश्वर, जो अनादि-अवनाशीय और सभी समस्त सृष्टि के राजा हैं, उनकी महिमा शाश्वत है। यह उच्चतम सम्मान और आस्था का विषय है—कि प्रभु की महिमा युग-युग तक गुणगान होती रहे। यह घोषणा pisaria है कि ईश्वर की महिमा मानव-युगों की परिस्थितियों से परे है; वे हर समय वास्तविकता और शक्ति के स्रोत हैं।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य प्रचलित संदर्भ
इस आयत से जुड़े कुछ संदर्भ जो समान चिंता को दर्शाते हैं:
व्यावहारिक विचार
इस verses से हमें सिख मिलती है कि 우리의 प्रमुख जीवन निर्णय परमेश्वर की महिमा के उपयुक्त होने चाहिए। हर दिन छोटे-छोटे कार्यों में भी हम उसकी महिमा को बढ़ाने का लक्ष्य रखें—कर्म, सोच और प्रेरणा में ईमानदारी बनाये रखें। सांसारिक सफलता के बीच भी हम उसकी महिमा को सर्वोपरि मानें और समस्त गतिविधियों में उसकी सत्ता को स्मरण करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 तीमुथियुस 1:17 यह उद्घोष करता है कि परमेश्वर—सनातन राजा, अविनाशी—की महिमा अनंत है। हमारी आराधना और जीवन-उद्देश्य उसी महिमा को बढ़ाने के लिए होने चाहिए, ताकि हर युग में उसका नाम ऊँचा किया जाए।
फुटनोट्स: पूरक टिप्पणी-उद्धरण
एसोसिएट टिप्पणीकारों के सार से मिलती-जुलती धारा इस प्रकार है: मारकण्डेय संदर्श में महिमा के विरुद्द प्रयासों को निष्कारण करते हुए परमेश्वर के सार्वभौमिक शासन और पवित्रता को प्रमुख माना गया है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
रोम 11:36 — सभी चीजें उसी से, उसी के द्वारा और उसी के लिए।
याकूब 1:17 — हर उत्तमता परमेश्वर की देन है, जो अविनाशी है।
यूहन्ना 4:24 — परमेश्वर आत्मा है; उसकी आराधना आत्मा और सत्य से करनी चाहिए।