Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 1:1 1 तीमुथियुस 1:2 1 तीमुथियुस 1:3 1 तीमुथियुस 1:4 1 तीमुथियुस 1:5 1 तीमुथियुस 1:6 1 तीमुथियुस 1:7 1 तीमुथियुस 1:8 1 तीमुथियुस 1:9 1 तीमुथियुस 1:10 1 तीमुथियुस 1:11 1 तीमुथियुस 1:12 1 तीमुथियुस 1:13 1 तीमुथियुस 1:14 1 तीमुथियुस 1:15 1 तीमुथियुस 1:16 1 तीमुथियुस 1:17 1 तीमुथियुस 1:18 1 तीमुथियुस 1:19 1 तीमुथियुस 1:20



1 तीमुथियुस 1:12 परन्तु-व्याख्या: प्रभु की दी हुई सामर्थ्य में धन्यवाद
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पद यह सन्देश देता है कि पौलुस ने अपने परिवर्तन और कार्य-यात्रा को केवल अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि प्रभु यीशु के द्वारा दी गई क्षमता के कारण संभव माना। वह यीशु के द्वारा विश्वासयोग्य ठहराने के लिये, उसकी सेवा के लिये चुने जाने के लिये, और उसकी स्मरणीय कृपा के कारण आभारी है। यह पद हमें भी याद दिलाता है कि सेवकाई ईश्वर की कृपा से पूर्व निर्धारित और समर्थित होती है, न कि मानव की योग्यता से अधिक।
पारिवारिक Literary Context (साहित्यिक संदर्भ)
1 तीमुथियुस epistle में पौलुस अपने युवा साथी तीमुथियुस को प्रेरित कर रहे हैं। इस पद में पौलुस अपनी व्यक्तिगत अनुभव-यात्रा को साझा करते हैं—कैसे उन्होंने मसीह के लिये अपने आप को उपलब्ध कराया और कैसे यीशु ने उसे विश्वासयोग्य समझकर सेवकत्व के लिये ठहराया। पंक्ति में “धन्यवाद करता हूँ” दर्शाती है एक जीवन-आधारभूत अनुभव: निर्भरता और कृतज्ञता।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि वास्तविक सेवा: (1) परमेश्वर की बुलाहट और (2) परमेश्वर की ताकत—ये दोनों एक साथ चलते हैं। मसीह यीशु की δύναμη (सामर्थ्य) के बिना मानव सेवा निष्क्रिय और असफल हो सकती है, परन्तु उसकी कृपा से यह संभव होता है कि एक अधर्मी भी दायित्व-उठा सके। यह प्रेरितों के प्रचार-कार्य का आधार है: प्रभु की कृपा से समर्थित, विश्वास से चलना।
पूर्व-ग्रंथीय cross-reference और तात्पर्य
Cross-reference 1: पतरस 1:5 – प्रभु की आनन्दित शक्ति द्वारा संरक्षित रहने का विश्वास। तात्पर्य: परमेश्वर अपने विश्वासियों को दृढ़ बनाते हैं और उनकी सेवा को स्थिर बनाते हैं।
Cross-reference 2: रोम 12:6–8 – दिये गए गुणों के अनुसार सेवकत्व की विविधता और प्रभु पर निर्भरता। तात्पर्य: हर विश्वासी के भीतर परमेश्वर का काम स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।
Cross-reference 3: फिलिप्पी 2:13 – “क्योंकि वह काम कराता है और चाहे इच्छा, वह पूरा भी कराता है”—परमेश्वर की प्रेरणा और सार्वभौमिक शासन।
वरीय प्रश्न और विचार-विमर्श
सार-निष्कर्ष
1 तीमुथियुस 1:12 हमें याद दिलाता है कि सेवा एक दिशा में है: प्रभु यीशु का सामर्थ्य हमारे भीतर। इसलिए धन्यवाद का जीवन वह है जिसमें हम अपनी कमजोरियों को भी उसकी कृपा से सम्बोधित मानते हैं और उसे मानते हैं कि उसने हमें विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया। यह एक सच्चा प्रेरणादायाक संदेश है कि ईश्वर की बुलाहट और उसके कार्य के लिये तैयार रहना दोनों एक साथ चलते हैं।
एंटिक उद्धरण (मात्र सन्दर्भ हेतु)
यदि उपलब्ध हो, नीचे दिये गये तीनों प्राचीन टिप्पणीकारों के चयनित कथन, जो पाठ के अनुरूप हों, उद्धृत किए जा सकते हैं:
- Matthew Henry (अंश): “The grace of God in Christ Jesus, that hath enabled me for the work.”
- Albert Barnes (अंश): “He who hath saved me, and called me by his grace, has qualified me for his work.”
- Adam Clarke (अंश): “The grace given, the call received, the strength supplied—these are the channels of ministry.”
नोट: ऊपर के उद्धरण केवल संकेतस्वर हैं; यदि आपके पाठ से सीधे उद्धरण की अनुमति हो, तो ही पूर्ण वाक्य दिए जा सकते हैं.