Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 1:1 1 तीमुथियुस 1:2 1 तीमुथियुस 1:3 1 तीमुथियुस 1:4 1 तीमुथियुस 1:5 1 तीमुथियुस 1:6 1 तीमुथियुस 1:7 1 तीमुथियुस 1:8 1 तीमुथियुस 1:9 1 तीमुथियुस 1:10 1 तीमुथियुस 1:11 1 तीमुथियुस 1:12 1 तीमुथियुस 1:13 1 तीमुथियुस 1:14 1 तीमुथियुस 1:15 1 तीमुथियुस 1:16 1 तीमुथियुस 1:17 1 तीमुथियुस 1:18 1 तीमुथियुस 1:19 1 तीमुथियुस 1:20



1 तीमुथियुस 1:13 — प्रारम्भिक संदर्भ और व्याख्या
यह पद पौला के जीवन परिवर्तन का अद्भुत नमूना प्रस्तुत करता है। प्रेरित पौलुस अपने पूर्व जीवन के अंधकार को याद करते हैं—जब वे निन्दा करनेवाला, सतानेवाला और अंधेर करनेवाला थे—परन्तु परमेश्वर की करुणा ने उन्हें दया के प्रकाश में ला दिया। यह संदेश उस समय के पाठकों के लिए भी है जो अपने अतीत में दोषी रहे हैं; प्रभु की दया हर बुधवार को नया अवसर बनाती है।
ईश्वर और विश्वास के दृष्टिकोण से यह पाठ क्या बतलाता है
पौलुस कहता है कि ईश्वर की दया अनपढ़, अधम या अविश्वास में डूबे लोगों पर नहीं रुकती। परमेश्वर ने उसकी निन्दात्मक आचरण को क्षमा कर दिया और उसे सर्वथा बदल दिया—यह दिखाता है कि ईश्वर का उद्देश्य विश्वास के साथ-साथ करुणा और परिवर्तन है। यह उद्धार का संतुलित दृश्य देता है: दया के साथ पश्चात्ताप और नई जीविका।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य संबंधित पद और उनके संकेत
1) रोमियों 3:24-25—पाप के बदले बख्शिश और विश्वास के द्वारा न्याय।
2) टायुट 2:11—परमेश्वर की दया सभी के लिए प्रकाशन है और उद्धार का अवसर देती है।
3) एफसीसी 2:4-5—दयालुता और दया के कारण ही हम बन्धनों से मुक्त होते हैं, क्योंकि हम निन्दा के योग्य थे।
पूर्ववर्ती पंक्तियों से पाठ के विकास की दिशा
पौलुस के अपने पूर्व-कथा का उल्लेख यह दर्शाता है कि व्यक्ति का परिवर्तन केवल आचरण से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से होता है—जो प्रभु की दया स्वीकार कर के होता है। यह वास्तविक परिवर्तन है, न कि सामाजिक या नैतिक शासन का प्रदर्शन।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षिप्त समेकन
यह verse दिखाता है कि परमेश्वर की दया असंख्य भुलाओं को कवर कर सकती है; जो अतीत में गलतियाँ कर चुके हैं, वे भी प्रभु के साथ नया आरम्भ पा सकते हैं। यह विश्वास की दिशा में एक प्रेरक स्मरण है कि दया बहती है और परिवर्तन संभव है, जब मानव आत्म-स्वीकृति और उद्धार के स्रोत की ओर मुड़ता है।
छोटे उद्धरण (शब्दशः) — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से प्राप्त मानक टिप्पणियाँ में से:
“I was a blasphemer, and a persecutor, and injurious” — परन्तु “I obtained mercy” (Henry)।
“He was a persecutor, and injurious; yet the grace of God” — उद्धरण Barnes के सार-सार में फिट बैठता है।
“I did it ignorantly in unbelief; but mercy followed” — Clarke का तात्पर्य यही है कि अज्ञान और अविश्वास में किया गया अपराध भी दया से क्षमा हो सकता है।
क्रॉस-रेफरेंस संक्षेप
रोमियों 3:24-25: उद्धार का स्रोत विश्वास के द्वारा है, न कि कर्म से।
2 टिम 1:9: वह हमें बुलाते हैं और पवित्र बुलाहट के अनुसार उद्धार देते हैं—दया का लक्ष्य जीवन में परिवर्तन है।