Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 1:1 1 तीमुथियुस 1:2 1 तीमुथियुस 1:3 1 तीमुथियुस 1:4 1 तीमुथियुस 1:5 1 तीमुथियुस 1:6 1 तीमुथियुस 1:7 1 तीमुथियुस 1:8 1 तीमुथियुस 1:9 1 तीमुथियुस 1:10 1 तीमुथियुस 1:11 1 तीमुथियुस 1:12 1 तीमुथियुस 1:13 1 तीमुथियुस 1:14 1 तीमुथियुस 1:15 1 तीमुथियुस 1:16 1 तीमुथियुस 1:17 1 तीमुथियुस 1:18 1 तीमुथियुस 1:19 1 तीमुथियुस 1:20



1 तिमुती 1:11 — संदर्भित महिमा के अनुसार सुसमाचार
इस पद में पौलुस अपने सेवक के रूप में दिए गए आधिकारिक दायित्व की महिमा और जिम्मेदारी को संजोते हैं। वे कहते हैं कि यह सुसमाचार, “यही परमधन्य परमेश्वर की महिमा के उस सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सौंपा गया है।” इस छोटे वाक्य में तीन प्रमुख विचार एक साथ उभरते हैं: परमेश्वर की महिमा, सुसमाचार की ठोस आस्थागत धारा, और प्रेरित के उत्तरदायित्व का बोध।
पात्र रूप और धार्मिक धारणाएँ
यहाँ परमेश्वर की महिमा का उल्लेख एक ऐसे उद्देश्य के तहत है जो दिव्य निर्देशन और कृपा से जुड़ा है। महिमा से आशय उस उच्च और पवित्र स्वरूप से है जो परमेश्वर के चरित्र—पवित्रता, विश्वास, और प्रेम—में दिखाई देती है। सुसमाचार वह मार्ग है जिसे परमेश्वर ने मनुष्य के लिए उद्घाटित किया ताकि लोग चंगेपन, उद्धार और जीवन के आनंद को जान सकें।
मुख्य शब्दों की व्याख्या
अन्य बाइबिल संदर्भ (cross-references)
- रोम 1:16: यह दर्शाता है कि सुसमाचार परमेश्वर की शक्ति है जो विश्वास से विश्वास तक उद्धार देता है।
- 2 कुरिन्थु 4:7: संसार को दिखाने के लिए यह सुसमाचार हमारा वैभव-भंडार है, जो ईश्वर के विशिष्ट अनुग्रह के कारण है।
- 1 पतरस 1:12: प्रेरितों के द्वारा यह संदेश मानवता तक पहुँचने योग्य बना दिया गया, ताकि लोग ईश्वर की महिमा और उद्धार को जानें।
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि सुसमाचार का उद्देश्य सिर्फ सूचनात्मक ज्ञान नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी विश्वास और परमेश्वर के महिमामय काम में सहभागी बनना है।
आज के दिन के लिए अनुप्रयोग
1 तिमुथियुस 1:11 हमें सचेत करता है कि हमारा जीवन भी उसी सिलेबस का भाग है—हम जो संदेश सुनाते हैं उसका स्पष्ट प्रभाव बनना चाहिए। यदि हम परमेश्वर की महिमा के अनुरूप सुसमाचार को जीवंत बनाते हैं, तो हमारी साक्षी देहमता और आचरण दोनों में अनुरूपता दिखेगी। नये विश्वासी बनना हो या पुराने विश्वास को दृढ़ करना, यह वाक्य प्रेरणा देता है कि विश्वास और सेवा में निष्ठा से आगे बढ़ें।
एसे लोकप्रिय टिप्पणीकारों के संदर्भ से संक्षिप्त विचार
Adam Clarke और Albert Barnes जैसी सार्वजनिक-डोमेन टीका-लेखों के अनुसार, इस वाक्य में प्रेरित का कार्य परमेश्वर की योजना के प्रकाश में एक आह्वान है—सुसमाचार उसकी महिमा का प्रचार है, न कि व्यक्तिगत गौरव। Matthew Henry के दृष्टिकोण में यह विशेष रूप से विश्वास और विवेक की संगति में दिखता है—जहां संदेश और सेवा एक दूसरे के पूरक हैं।
उद्धरण-चेतावनी: इस पंक्ति के लिए Clarke, Barnes या Henry से विशिष्ट एकत्रित शब्द सीधे उद्धृत करने योग्य हैं यदि उपलब्ध हों; यहाँ संकलन में उनके समाहित विचारों को संदर्भित रूप में उल्लेखित किया गया है।