Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80



लूका 1:47 का संदर्भ-संदेश
पद लूका 1:47 में मरियम के संदर्भ में उसकी आत्मा के गीत का प्रमुख भाव प्रकट होता है। जब वह खोजती है कि उसकी प्रसव-घटना की महिमा परमेश्वर के भक्तिपूर्ण करुणा तथा उद्धारकारी योजना के अनुरूप कैसे चलती है, तो वह परमेश्वर की महानता और अपने उद्धारकर्ता के लिए आत्म-उत्साह व्यक्त करती है। यह पंक्ति 1 शमूएल की प्रेरित भावनाओं की छाया के साथ पवित्र संतोष की पुष्टि करती है जहाँ मनुष्य अपनी प्रभु-भक्ति के उत्तर में आनंद और नम्रता का मिश्रण अनुभव करता है।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य दिखाता है कि आत्मा की आंतरिक खुशी कैसे परमेश्वर के उद्धारकर्ता के आगमन से जुड़कर गहन विश्वास और स्तुति में परिणत होती है। मरियम क्यों खुशी मानती है? क्योंकि परमेश्वर उसकी नीच दशा को उठाकर उस दया-योजना का भागीदार बनाते हैं जिसमें विश्व के उद्धार की आधारशिला रखी गई है।
दो-तीन केंद्रीय विषय
संदर्भ- passages
– 1 शमूएल 2:1 (मैथ्यू हेनरी/बार्न्स Clarke जैसे पुरानी ईमानदार टिप्पणीकारों की प्रवृत्ति के भीतर उद्धृत भावों से मिलता-जुलता एक संदर्भ है जिसमें आत्म-गान और परमेश्वर की स्मरण-योग्यता प्रमुख है।
– लूका 2:10-11: उद्धारकर्ता के जन्म की घोषणा में खुशी और प्रसन्नता का संचार—आत्मा और जनता के बीच संवाद।
– रोम 15:13: परमेश्वर की आशा से भरपूर आनंद और शांति का प्रभाव संकेत देता है कि विश्वास कैसे हृदय को स्थिर बनाता है।
व्यावहारिक दृष्टिकोण
जब जीवन में कठिनाई हो, तब भी परमेश्वर की कृपा से उद्धार-योजना की स्मृति से आत्मा को आनंदित किया जा सकता है। हमारी प्रतिक्रिया: धन्यवाद-गीत, नम्रता और दूसरे के लिए दया की प्रार्थना। यह गीत मरियम के आत्म-समर्पण और परमेश्वर के चयन पर विश्वास की ठोस मिसाल देता है।
छोटी समरी
लूका 1:47 में मरियम की आत्मा की खुशी यह बताती है कि उद्धारकर्ता के आगमन से जीवन में आशा और भगवान के करुणा-कार्य की पुष्टि होती है। यह वही स्वर है जो पुरानी प्रतिज्ञाओं को नवीनता देकर सबसे निचले को भी उच्च सम्मान देता है—परमेश्वर की महिमा और मानवता की मुक्ति का एक संगम।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेन्स
1 शमूएल 2:1—धन्यतापूर्ण स्मरण और परमेश्वर-प्रशंसा की पहली अनुभूति।
नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ इतिहास-तत्वों और साहित्यिक परंपराओं के भीतर उपलब्ध प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरित हैं, परन्तु मूल पाठ के साथ संरेखित एक आधुनिक हिन्दी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
उद्धरण-नोट: इन टिप्पणीकारों के मौलिक, सार्वजनिक-domain विचारों से यदि किसी वाक्य का संधान मिलता है, तो उसे संक्षेप में उद्धृत किया गया है—मैथ्यू हैनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क।