Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80



वचन का संक्षेप और संदर्भ
लूका 1:4 कहते हैं: “कि तू यह जान ले, कि वे बातें जिनकी तूने शिक्षा पाई है, कैसी अटल हैं।” यह उद्धरण प्रेरित करता है कि जो सत्य तुमने सुना और सीखाया गया है, वह निश्चय-प्रतिपादन है; कहानी (जेसा) नहीं, बल्कि तथ्य और विश्वास पर टिके रहने वाला सच्चा मार्ग है। लूका के संदर्भ में यह वाक्य मार्गदर्शक के रूप में प्रयोग हुआ, ताकि साथी-श्रोताओं के मन में ईश्वर के वचनों की स्थिरता और सत्यता जागृत हो। यह लेखन बरखास्त-समझन के साथ एक विश्वासी जीवन की दिशा देता है: प्राप्त शिक्षा पर अडिग रहना और उसे जीवन के हर कठिन क्षण में लागू करना।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य यह बताता है कि जिन बातों की शिक्षा विकसित की गई है, वे अब भी वैसी ही सत्य हैं। विश्वासयोग्य के लिए यह आश्वासन है कि सीखना एक स्थिर, अटल विषय है, जो समय और परिस्थिति से नहीं डगमगाता। पवित्रता, नैतिकता और विश्वास के सिद्धांत—यहीं परिदृश्य में बनी रहती है, चाहे जीवन-सारणी बदले या सामाजिक दबाव बढ़े।
तीन प्रमुख विषय
संदर्भित बिंदु (related passages)
व्यावहारिक विचार
जो शिक्षा प्राप्त की है, उसका आत्म-आलोचनात्मक पुनर्मूल्यांकन करें। क्या आप अपने आचरण में उस शिक्षा को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित कर रहे हैं? छोटा-सा कदम: हर दिन एक बात को व्यवहार में उतारना—सत्य, धैर्य, क्षमा—ये तीनों को routine में शामिल करना। साथ ही, आप अपने आप से यह पूछें: “क्या यह ज्ञान कठिनाई के समय भी मेरा मार्गदर्शन करता है?”
संक्षेप
इस वाक्य का संदेश यह है कि जो बातें तूने सीखीं, वे अटल हैं और उनका प्रभाव समय के साथ और गहराता जाएगा यदि उन्हें जीवन में सीधे लागू किया जाए। शिक्षा और आस्था की यह स्थिरता, विश्वासी को कठिन Zeit में भी डगमगाने से रोकती है और ईश्वर की प्रेरणा के अनुसार चलना सिखाती है।
cross-references
याकूब 1:22–25 — सक्रिय आचरण के साथ शिक्षण को आत्मसात करने का आग्रह; न सिर्फ सुन्ना, पर लागू करना जरूरी है।
नीतिवचन 3:5–6 — ईश्वर की मार्गदर्शन में पूर्ण विश्वास के साथ जीवन निर्णय।
2 तिमोथी 3:14–17 — पवित्रशास्त्र की महत्ता और उसे जीने की शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य।
ध्यान देने योग्य नोट
यह टिप्पणी अद्वितीय है कि नीचे दिए गए उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के हूबहू वाक्यों के छोटे-छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो उन्हें ठीक-ठीक उद्धृत किया जाए। नीचे प्रयुक्त सार इन्हीं प्रमुख विचारों से प्रेरित है, ताकि पाठक को एक संतुलित और संपूर्ण दृश्य मिले।