Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80



क्यों यह वचन मायने रखता है
लूका 1:73 में वह शपथ उद्धृत है जो परमेश्वर ने अब्राहम से खाई थी—यही वह धुरी है जिस पर ईसा मसीह के आगमन की अपनी-अपने शासन की आशा टिकती है। यह शपथ परमेश्वर की अप्रत्यक्ष उद्भावना नहीं, बल्कि पवित्र वचनों के अनुसार वह विधान है जो अगम्य समय से चला आ रहा है। यह पंक्ति हमें यह समझाती है कि ईश्वर ने अपने वादों को पूरी करके अपनी पवित्रता और विश्वासयोग्यता को प्रमाणित किया है।
स्वाभाविक संदर्भ और उसका मूल अर्थ
यह शपथ अब्राहम से जुड़ी एक दैवीय वादा है—कि उसकी संतानें अनेक होंगी और उनके माध्यम से सारी जातियाँ bless होंगी (उत्पत्ति 17:7; 22:16-18; भज 105:8-9)। लूका 1:73 में कहा गया है कि यह शपथ अब्राहम की जेन-से-जेन चलती आ रही कहानी का एक भाग है; पर यहाँ ख्रीस्त के जन्म के साथ वह शपथ एक चरमसीमा तक पहुंचती है और नया इतिहास शुरू होता है। यह बताता है कि प्रभु का वचन समय के अनुसार पूरा होता है, न कि मानव कल्पनाओं के अनुसार।
मुख्य संदेश
वचन यह दर्शाता है कि ईश्वर ने अपने वादों को अटल रखा है और नवजीवन का उदय उसी कड़ी का परिणाम है जिसे पुराने नियम में शुरू किया गया था। जब ज़ायदा-वीकृत मौसम में इस शपथ का पुनः स्मरण होता है, तब विश्वासियों के लिए यह आश्वासन बन जाता है कि प्रभु अपने क्रोध के स्थान पर दया और उद्धार का प्रस्ताव रखते हैं।
बाइबल थीमें जो जोड़ती हैं
क्रॉस-रेफरेंसेस (संरेखित संदर्भ) / छोटे उद्धरण नहीं
1) उत्पत्ति 17:7 — परमेश्वर का शपथ से सम्बन्ध: यह वचन बताता है कि शपथ स्थिर और अकाट्य है; न केवल व्यक्तिगत वंश बल्कि पूरे विश्व के लिए आशीर्वाद का मार्ग स्थापित होता है।
2) भजंस 105:8-9 — धरोहर के रूप में वादे की स्मृति: परमेश्वर अपने वादों को दृढ़ता से बनाए रखते हैं, और वे पीढ़ियों तक स्थिर रहते हैं।
3) रोम 4:13-16 — विश्वास के द्वारा न्याय: अब्राहम के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि वादा विश्वास के कारण पूरा होता है, न कि कर्मों से।
संक्षिप्त नैतिक-आध्यात्मिक निष्कर्ष
ईश्वर के वादे समय पर पूरे होते हैं; हमारे विश्वास की कसौटी सत्य-परख है कि हम उन वादों पर भरोसा बनाए रखें। यह वचन हमें दिखाता है कि ईश्वर अपनी दया और उद्धार के काम को इतिहास के परे लेकर चलते हैं, ताकि सभी जातियाँ एक ही पथ पर आ सकें।
एक छंदीय विचार-आधार
प्रिय पाठक, जब आप इस शपथ के पूर्ण होने के समय-चक्र को देखते हैं, तो यह सहज विश्वास मिलता है कि आपके जीवन में भी यदि आप परमेश्वर की राह पर चलते हैं, तो वह आपका मार्गदर्शक और संबल बनेगा।
देवotional reflection
इस वचन से प्रेरित होकर अपनी उम्मीद को सुदृढ़ करें—जो शपथ ईश्वर ने अब्राहम से खाई, वही आज भी सत्य है। कठिन दिनों में भी, वह आपके कल्याण के लिए आगे बढ़ती योजना को चलाते हैं। विश्वास रखें, और देखें कि कैसे आपकी जिंदगी में भी वह चमत्कारिक तौर पर सच होता है।
प्रत्येक संदिग्ध क्षण में यह स्मरण रखें: ईश्वर का वादा पक्का है; वह अपने कर्मों में निर्भीक और दयालु है।