Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80
पठन-सारांश
लूका 1:61 में प्रसंग यह है कि जब सखर्याह और एलिज़बेथ के बच्चे का नामकरण करने के लिए गाँव के लोग इकट्ठा हुए, तब वे माता-पिता से नाम पूछते हैं। जब कहा गया कि उसका नाम यूहन्ना रखा जाना है, तो लोग बोले कि उस घर में ऐसा नाम नहीं है। यह छोटा सा वाक्य उस समय की सामाजिक परंपराओं, आशंकाओं और ईश्वरीय निर्देश पर मानवीय प्रतिक्रिया को उद्घाटित करता है।
यह पद पूरा अध्याय में कहां बैठता है
लूका 1 पूरा अध्याय मसीह की पूर्वकथाओं और यूहन्ना प्रेरित का आगमन बताता है। अध्याय में स्वर्गदूतों की घोषणा, एलिज़बेथ की गर्भवती अवस्था और सखर्याह का मूक होना शामिल हैं। पद 61 उस क्षण पर आता है जब धार्मिक और सामाजिक परम्पराएँ मानव इरादों को नियंत्रित करती हैं, पर ईश्वरीय योजना पर प्रश्न उठती है। यह उस नाटकीय मोड़ की तैयारी करता है जब सखर्याह धैर्य और विश्वास दिखाकर परमेश्वर के द्वारा दिए गए नाम की पुष्टि करेगा।
मुख्य आत्मिक पाठ
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा: परमेश्वर के निर्देश और मानवीय परंपराओं के मध्य संघर्ष में विश्वास और आज्ञाकारिता की प्राथमिकता है। लोग परंपरा के अनुसार उस नाम को अस्वीकृत कर रहे हैं, पर ईश्वरीय निर्देश आगे बढ़ने का साधन है। यह हमें सिखाता है कि जब परमेश्वर स्पष्ट रूप से निर्देश दे, तो सामान्य अपेक्षाओं या सामाजिक अनिश्चितताओं को पीछे छोड़कर उस निर्देश का पालन करना चाहिए।
सम्बन्धित पद और तुलना
व्यवहारिक अनुप्रयोग
यह पद हमें रोज़मर्रा में तीन तरह से उपयोगी ठहरता है:
पुराने टिप्पणाकारों से संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है: "नामकरण में परमेश्वर की इच्छा की स्वीकार्यता आवश्यक थी" (संक्षेप उद्धरण)।
अलबर्ट बार्न्स का संक्षिप्तीकरण दर्शाता है कि सामाजिक अस्वीकृति आम है पर ईश्वरीय आदेश सर्वोपरि होता है।
ऐडम क्लार्क ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यूहन्ना का नाम उस बच्चे के विशिष्ट परमिश्रित पध्दति और भविष्य के कार्य से जुड़ा था।
निष्कर्ष
लूका 1:61 साधारण दिखने वाला संवाद है, पर यह विश्वास और आज्ञाकारिता का गहरा सबक देता है। जनता की आपत्तियाँ और पारिवारिक परंपराएँ क्षणिक हैं; ईश्वर का निर्देश अंतर्निहित उद्देश्य और बुलाहट को पूरा करता है। इस वाक्य से हमें सिखना चाहिए कि जब परमेश्वर स्पष्ट मार्ग निर्देशित करे, तब उस निर्देश को अपनाना ही सच्ची आज्ञाकारिता और विश्वास का परिचायक है।