Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80



लूका 1:35 का संदर्भ वार्थिक दृश्य
यह पाठ रथरथाता है कि πवित्र महिला मरियम को ईश्वर ने चुना और उसे घनीभूत अनुग्रह प्रदान किया गया। स्वर्गदूत गैब्रियल उसका दर्शन देते हुए कहता है कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगी और परमप्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छायेगी, परिणामस्वरूप जो बच्चा उत्पन्न होगा, वह परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। यह बात एक अद्भुत मिलन का संकेत है: दिव्य क्रिया और मानवीय अवस्था का मिलन, जिससे एक बिना sinnक वयक्ति जन्म लेता है—यानी यीशु मसीह, जिसे “पवित्र” कहा गया है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में इस पाठ से स्पष्टियाँ
1) ईश्वरीय अभिमुखता: परमेश्वर स्वयं मानव इतिहास में प्रवेश कर रहा है ताकि उद्धार संभव हो सके। पवित्र आत्मा का प्रसार उनका दिव्य लोक से आना और मानवीय गर्भस्थि को पवित्र बनाना दिखाता है कि ईश्वर अवलोकनीय रूप से क्रिया कर रहा है।
2) पवित्रता का प्रभाव: “पवित्र आत्मा” और “परमप्रधान की सामर्थ्य” एक साथ काम कर रहे हैं ताकि जो पुत्र उत्पन्न हो, वह स्वर्गीय गुणधर्मों से सम्पन्न हो। यह न केवल जन्म की घटना है, बल्कि उद्धार की योजना का केंद्र है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छायाओं की स्पष्टता
• पवित्र आत्मा: ईश्वर की कर्मशक्ति जो विशेष रूप से मरियम के गर्भाशय पर आकर उसे मानवीय जन्म के लिए तैयार करती है।
• परमप्रधान की सामर्थ्य: परमेश्वर की सर्वशक्तिमान सत्ता जो परिवर्तन औरअद्भुत घटनाओं को संभव बनाती है।
• परमेश्वर का पुत्र: यीशु, जो दिव्य और मानवीय दोनों अवस्थाओं को धारण करता है—ईश्वर के आत्मीय पुत्रत्व का यथार्थ उद्घाटन।
अन्य प्रासंगिक पाठ
इन पारियों से दिखता है कि यीशु का जन्म एक ऐसी योजना का भाग है जिसे ईश्वर ने पुरानी प्रतिज्ञाओं में ठहराया था और वह पूर्ण रूप से पवित्र कार्य के साथ पूरा होता है।
आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
मूल टिप्पणियाँ—हेडलाइन अवलोकन
यह वाक्य हमें यह सिखाता है कि उद्धार एक दिव्य क्रिया है जिसमें परमेश्वर स्वयं मानव इतिहास में प्रवेश करता है—पवित्रता, शक्ति, और पुत्रत्व की यह गठजोड़ ईश्वर के सिंहासन के भीतर से निकलती है और हमारे जीवन में प्रभाव डालती है।
संक्षेपित समेकन
यह दृश्य दिखाता है कि ईश्वर की योजना मानव इतिहास के केंद्र में है: पवित्र आत्मा की प्रेरणा से जन्म लेने वाला पुत्र परमेश्वर के पुत्र के रूप में उद्धार लाता है। मरियम की आस्तिकता और ईश्वर के वचन की दृढ़ता इस चमत्कारिक परिणाम के आधार हैं।
संक्षेप उद्धरण (पहचानयोग्य प्राचीन टिप्पणीकारों से):
Matthew Henry से: “The Holy Ghost shall come upon thee, and the power of the Highest shall overshadow thee.”
Albert Barnes से: “The text presents the divine agency in the birth of Jesus and his unique divine-human template.”
Adam Clarke से: “The Most High shall overshadow thee—referring to the divine protection and the sanctifying power at work in the virgin’s womb.”