Old Testament
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लूका 1:1 लूका 1:2 लूका 1:3 लूका 1:4 लूका 1:5 लूका 1:6 लूका 1:7 लूका 1:8 लूका 1:9 लूका 1:10 लूका 1:11 लूका 1:12 लूका 1:13 लूका 1:14 लूका 1:15 लूका 1:16 लूका 1:17 लूका 1:18 लूका 1:19 लूका 1:20 लूका 1:21 लूका 1:22 लूका 1:23 लूका 1:24 लूका 1:25 लूका 1:26 लूका 1:27 लूका 1:28 लूका 1:29 लूका 1:30 लूका 1:31 लूका 1:32 लूका 1:33 लूका 1:34 लूका 1:35 लूका 1:36 लूका 1:37 लूका 1:38 लूका 1:39 लूका 1:40 लूका 1:41 लूका 1:42 लूका 1:43 लूका 1:44 लूका 1:45 लूका 1:46 लूका 1:47 लूका 1:48 लूका 1:49 लूका 1:50 लूका 1:51 लूका 1:52 लूका 1:53 लूका 1:54 लूका 1:55 लूका 1:56 लूका 1:57 लूका 1:58 लूका 1:59 लूका 1:60 लूका 1:61 लूका 1:62 लूका 1:63 लूका 1:64 लूका 1:65 लूका 1:66 लूका 1:67 लूका 1:68 लूका 1:69 लूका 1:70 लूका 1:71 लूका 1:72 लूका 1:73 लूका 1:74 लूका 1:75 लूका 1:76 लूका 1:77 लूका 1:78 लूका 1:79 लूका 1:80



अर्थगत टिप्पणी: लूका 1:80
सीधे शब्दों का अर्थ है: वही बालक यूहन्ना बढ़ता गया, आत्मा की सहायता और जंगलों में बड़ा होकर इस्राएल के उद्धार कार्य के लिए तैयार हुआ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
येखुआ के शासन के पूर्वकाल में जन्मे यूहन्ना बैपटिस्ट, मरम्मत की प्रतीक्षा और उद्धार के मार्गदर्शक के रूप में उभरते हैं। लूका के अनुसार, वह दृढ़ता से पवित्र आत्मा से भरा हुआ और आशाशक्ति से लैस रहा, और उसका बचपन एकांतस्थ, निर्जन स्थान में व्यतीत हुआ ताकि वह संसार की वासना से दूर एक औचित्यपूर्ण साक्ष्य बने। यह वाक्य इस तथ्य को दर्शाता है कि उसका बड़ा होना और सेवा के लिए तैयार होना एकदम शांत, निर्लिप्त अभ्यास के साथ हुआ, न कि व्यस्त सामाजिक कार्यक्रमों के बीच।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संक्षेप प्रभाव
1) लूका 3:2-6 — यूहन्ना की भूमिका के लिए तैयारी और उद्धार की संभावना का उद्घाटन। यह दिखाता है कि वह पवित्र हवा से प्रेरित था और चैतन्यता से भरा था।
2) मत्ती 3:1-3 — यूहन्ना की प्रतिवचन-आह्वान और जोशते संदेश की शुरुआत, जो क्रियाशीलता और धर्म-संस्थापन की ओर इशारा करता है।
3) मलाकी 3:1 — उद्धारकर्ता के आगमन से पहले एक दूत की तैयारी की बात, जो यूहन्ना के भाग्य के अनुरूप है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारी जिंदगी में भी निर्जन-स्थल और मौन सेवाभाव जरूरी हो सकता है ताकि हम आत्मा से प्रेरित हों और परमेश्वर के उद्धारकार्य के लिए तैयार रहें। यह पाठ reminding देता है कि संतुलित आस्था और साधारण जीवन की साधना परमेश्वर की बड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाती है।
विशेष उद्धरण नोट
यदि आप किसी पुरानी टिप्पणीकार की सटीक शब्दावली की खोज करें, तो नीचे दिए गए अंश उपयोगी हो सकते हैं: "वह बालक धीरे-धीरे बड़ा हुआ" (एडम क्लार्क/मैथ्यू हेनरी/एल्बर्ट बार्न्स के संकलनों के सार से प्रेरित सामान्य भाव)। हालांकि यहाँ शब्द-शुद्ध उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं हैं, किन्तु इन धाराओं के अनुसार यूहन्ना का विकास और जंगलों में रहना उन संकलनों से संगत है।