Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 2:1 लूका 2:2 लूका 2:3 लूका 2:4 लूका 2:5 लूका 2:6 लूका 2:7 लूका 2:8 लूका 2:9 लूका 2:10 लूका 2:11 लूका 2:12 लूका 2:13 लूका 2:14 लूका 2:15 लूका 2:16 लूका 2:17 लूका 2:18 लूका 2:19 लूका 2:20 लूका 2:21 लूका 2:22 लूका 2:23 लूका 2:24 लूका 2:25 लूका 2:26 लूका 2:27 लूका 2:28 लूका 2:29 लूका 2:30 लूका 2:31 लूका 2:32 लूका 2:33 लूका 2:34 लूका 2:35 लूका 2:36 लूका 2:37 लूका 2:38 लूका 2:39 लूका 2:40 लूका 2:41 लूका 2:42 लूका 2:43 लूका 2:44 लूका 2:45 लूका 2:46 लूका 2:47 लूका 2:48 लूका 2:49 लूका 2:50 लूका 2:51 लूका 2:52



लूका 2:40 परिहारात्मक टिप्पणी
युवा यीशु का पदार्पण मार्गदर्शक संकेत देता है कि कैसे जीवन के आरम्भिक वर्ष एक गहरे उद्देश्य की ओर अग्रसर होते हैं। यह वचन कहता है कि बालक बढ़ता, बलवन्त होता है और बुद्धि से परिपूर्ण होता जाता है, और परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था। यह न केवल यीशु के जन्म के पश्चात् एक ऐतिहासिक विवरण है, बल्कि प्रत्येक धर्मप्रेमी के लिए एक आध्यात्मिक सीखा भी है: विकास, शक्ति और अनुग्रह का संतुलन।
पद की चर्चा: अध्याय के अंदर का संदर्भ
लूका 2 में यीशु के बचपन का वर्णन है और 40वां आयत इस चरण की सामान्य तस्वीर देता है: एक सामान्य परिवार में बालक का धीरे-धीरे बढ़ना—शारीरिक रूप से मजबूत, बुध्दिमानी में स्थिर और परमेश्वर की कृपा से आच्छादित। यह टिप्पणी उस अवधि को दर्शाती है जब यीशु मानव-रूप में अपने साधारण जीवन से कार्य-यात्रा के लिए तैयार हो रहा था।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य तुलनात्मक बाइबल पाठ
enkele समान विचारक संदर्भ जो इस वचन से जुड़े हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका संक्षिप्त संबंध
इस verses के साथ कुछ उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका संक्षिप्त सार:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
इस वचन से शाब्दिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के क्रम स्पष्ट होते हैं:
संक्षेप निष्कर्ष
लूका 2:40 বলता है कि यीशु का प्रारम्भिक जीवन एक संतुलित विकास का नमूना है—शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति—जिसमें परमेश्वर का कृपा-संयोग बना रहता है। यह पाठुद्यान देता है कि सच्ची वृद्धि तब मिलती है जब हम क्रमशः बढ़ते हैं, ज्ञान बढ़ाते हैं और परमेश्वर के साथ अपना संबंध बनाए रखते हैं।
पुस्तक-उद्धरण (public-domain से)
नीचे उद्धरण केवल उन प्रसिद्ध टिप्पणीकारों से जो सार्वजनिक-डोमेन में हैं, परन्तु केवल संक्षिप्त संदर्भ के रूप में प्रस्तुत हैं:
Matthew Henry: “The child grew and became strong” (संकेत), Albert Barnes: “The grace of God rested on him—indicating divine favor accompanying human development,” Adam Clarke: “Growth of natural ability and grace together.”
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