Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 2:1 लूका 2:2 लूका 2:3 लूका 2:4 लूका 2:5 लूका 2:6 लूका 2:7 लूका 2:8 लूका 2:9 लूका 2:10 लूका 2:11 लूका 2:12 लूका 2:13 लूका 2:14 लूका 2:15 लूका 2:16 लूका 2:17 लूका 2:18 लूका 2:19 लूका 2:20 लूका 2:21 लूका 2:22 लूका 2:23 लूका 2:24 लूका 2:25 लूका 2:26 लूका 2:27 लूका 2:28 लूका 2:29 लूका 2:30 लूका 2:31 लूका 2:32 लूका 2:33 लूका 2:34 लूका 2:35 लूका 2:36 लूका 2:37 लूका 2:38 लूका 2:39 लूका 2:40 लूका 2:41 लूका 2:42 लूका 2:43 लूका 2:44 लूका 2:45 लूका 2:46 लूका 2:47 लूका 2:48 लूका 2:49 लूका 2:50 लूका 2:51 लूका 2:52



लूका 2:31 के संदर्भ में व्याख्या
कथित पद में यीशु का जन्म जिस उद्देश्य के साथ हुआ उसे परमेश्वर ने पहले से ही प्रचलित भविष्यवाणियों के अनुरूप प्रस्तुत किया है। यह वाक्य विशेष रूप से यशायाह के उद्धरण “तेरे सामने सब राष्ट्रों के लोगों के बढ़ते प्रकाश” के संदर्भ को ठोस रूप देता है और बताता है कि नबी का संकेत अब सच हो रहा है। लूका यह दर्शाते हैं कि यीशु—not केवल इजरायल के लिए, बल्कि सभी जातियों के लिए आशीर्वाद का स्रोत बनेंगे—इसका क्रमिक परिचय इन शब्दों से होता है: वह एक ouvrir-हिस्सा हैं जो संसार के लिए प्रकाश और उद्धार लेकर आते हैं।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य यीशु के जन्म के बारे में एक व्यापक उद्देश्य प्रस्तुत करता है: ईश्वर अपनी महिमा और उद्धार का प्रकाश सब लोगों तक पहुँचाने के लिए भेजते हैं। यह वैश्विक उद्धार के मजबूत संकेत को दर्शाता है—न केवल यहूदियों के लिए, बल्कि गैलेक्टिक संसार के सभी देशों के लोगों के लिए। यह भी स्पष्ट करता है कि यीशु का जन्म एक भविष्य-निर्दिष्ट, सार्वभौमिक कार्य का भाग है।
मुख्य विषय
संबंधी पाठ
1) यशायाह 40:5—“जो कुछ भी झुकाव-झुकाव दिखाता है वह तेरे सामने उजागर होगा”—यह सिद्ध करता है कि दंड और न्याय के साथ उद्धार के मार्ग भी उजागर होते हैं।
2) मत्ती 28:19-20—यीशु के शिष्यों को सभी राष्ट्रों तक जाने का आदेश, जो इस प्रकाश-जनक मिशन को विश्व-स्तर पर जारी रखता है।
3) एप. 5:9—प्राण-सम्पत्ति के दावे के साथ सभी जातियों में प्रभु की महिमा उभरती है; यह इस निष्कर्ष को मजबूत करता है कि उद्धार का संदेश सबके लिए है।
व्यावहारिक चिंतन
हम में से प्रत्येक के लिए यह प्रश्न है: क्या मैं यीशु के प्रकाश को अपने जीवन के भीतर और अपने समुदायों में फैलाने में सहभागी हूँ? क्या मैं जाति, भाषा या समाजिक पंक्ति की धारणाओं से ऊपर उठकर प्रेम और सत्य के साक्षी बन रहा हूँ? यह पद हमें आह्वान करता है कि हम अपने-अपने स्थान से विश्व-निर्घन के लिए आत्म-समर्पण करें और ईश्वर के राज्य की गवाही बनें।
संक्षिप्त सार
लूका 2:31 यह दिखाता है कि यीशु का जन्म और उसकी विजय सभी देशों के लोगों के लिए एक प्रकाशित उद्धार का उद्घोष है—यशायाह की भविष्यवाणी के अनुसार—जो न केवल एक जाति बल्कि समस्त मानवता के लिए है। इसके माध्यम से परमेश्वर अपने उद्देश्य को विश्वस्त रूप से पूरा करते हैं, और हमारे जीवन में भी प्रकाश को फैलाने का निमंत्रण देते हैं।
संक्षिप्त उद्धरण (एकदम ठीक शब्द नहीं)
“जो तूने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है”—यह संदेश यीशु के जन्म के साथ जुड़ी वैश्विक उद्धार-योजना का सार है।