Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 2:1 लूका 2:2 लूका 2:3 लूका 2:4 लूका 2:5 लूका 2:6 लूका 2:7 लूका 2:8 लूका 2:9 लूका 2:10 लूका 2:11 लूका 2:12 लूका 2:13 लूका 2:14 लूका 2:15 लूका 2:16 लूका 2:17 लूका 2:18 लूका 2:19 लूका 2:20 लूका 2:21 लूका 2:22 लूका 2:23 लूका 2:24 लूका 2:25 लूका 2:26 लूका 2:27 लूका 2:28 लूका 2:29 लूका 2:30 लूका 2:31 लूका 2:32 लूका 2:33 लूका 2:34 लूका 2:35 लूका 2:36 लूका 2:37 लूका 2:38 लूका 2:39 लूका 2:40 लूका 2:41 लूका 2:42 लूका 2:43 लूका 2:44 लूका 2:45 लूका 2:46 लूका 2:47 लूका 2:48 लूका 2:49 लूका 2:50 लूका 2:51 लूका 2:52



लूका 2:14 — क्षण किनारों पर आकाशगान
इस पद का संदर्भ जन्म चर्च के संकटकाल के बाद का है, जहाँ स्वर्गदूतों की गवाही में शांति और परमेश्वर की महिमा का प्रकटीकरण होता है। चरैापथिक ग्रामों से नहीं, बल्कि यह संदेश सामुदायिक आशीर्वाद के रूप में सभी लोगों तक पहुँचा। यहाँ बुलावा है कि मनुष्य अपने भीतर का डर और विरोधी भाव हटाकर परमेश्वर की महिमा के समक्ष नम्रता से bowed हों और पृथ्वी पर भी शांति का प्रभाव फैलाएं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से निकलने वाले बिंदु
महत्वपूर्ण शब्दों तथा imagery का स्पष्टीकरण
“आकाश में परमेश्वर की महिमा”—यह दृश्य दृश्यतः परमेश्वर के सम्मानपूर्ण अस्तित्व और उसकी महानता को दर्शाता है। “पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है”—यह संकेत देता है कि जो लोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीते हैं, उनके बीच शांति की कृपा प्रकाशित होती है।
संबंधी पद
यह संदेश जन्म के पूर्वदर्शनों के साथ मेल खाता है जहाँ स्वर्गदूतों ने गायित किया, “आशा की अच्छी खबर, जो सभी मानिसों के लिये है” (यहोवा की महिमा; जीवित विश्वास का गुण)। साथ ही यह ब्लेसिंग ऑफ पीस की परंपरा से जुड़ता है—यानी शांति, आशीर्वाद और धर्मी जीवन का संयोजन।
1) इब्रानियों 13:20-21 के अनुसार, परमेश्वर जो शांति का निर्माता है, वह आपको हर अच्छे कार्य में स्थिर करे।
2) यशायाह 9:6-7 के भविष्यवाणी से यह संकेत मिलता है कि दाऊद का घर वही शांति का राज लाएगा।
3) यहूद 13:20-21 के अनुरूप, परमेश्वर के कृपात्मक चरित्र में स्थिरता और शांति दोनों एक साथ मिलते हैं।
हाल के समय के लिए अनुप्रयोग
हम अपने दैनिक जीवन में डर, संघर्ष और उथल-पुथल के बीच भी परमेश्वर की महिमा को याद रखें। ईश्वर के साथ एक शांत दिल का चयन करें—यही शांति का वास्तविक स्रोत है। व्यवहार में:
सार: जैसे स्वर्गदूतों ने दीवाली के पल में घोषणा की, वैसे ही आज भी परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर शांति का संदेश जीवंत है। यह संदेश यह भी स्मरण कराता है कि ईश्वर का सच्चा आनन्द और मानवीय शांति तब मिलती है जब हम उसकी इच्छा के अनुसार चलें।
नोट: नीचे उद्धृत प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार, हिंदी पाठ के अनुरूप, मूल ब्योरे में समाहित हैं—
Matthew Henry के शब्दों से: “The peace on earth is the fruit of the salvation brought by Christ, and the glory of God shines forth in that salvation.”
Albert Barnes के शब्दों से: “Glory to God is the highest praise; peace among men is the practical result of the gospel.”
Adam Clarke के शब्दों से: “God’s peace is proclaimed to all people, but it requires the heart to embrace God’s ways.”
उद्धृत पंक्तियों की संक्षेप अनुकूलन में ये विचार उद्घाटित होते हैं—पर पूरा पाठ, जैसा कि मूल संदर्भ में है, केवल पवित्र ग्रंथ के अनुसार समझना चाहिए।