Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 5:1 1 तीमुथियुस 5:2 1 तीमुथियुस 5:3 1 तीमुथियुस 5:4 1 तीमुथियुस 5:5 1 तीमुथियुस 5:6 1 तीमुथियुस 5:7 1 तीमुथियुस 5:8 1 तीमुथियुस 5:9 1 तीमुथियुस 5:10 1 तीमुथियुस 5:11 1 तीमुथियुस 5:12 1 तीमुथियुस 5:13 1 तीमुथियुस 5:14 1 तीमुथियुस 5:15 1 तीमुथियुस 5:16 1 तीमुथियुस 5:17 1 तीमुथियुस 5:18 1 तीमुथियुस 5:19 1 तीमुथियुस 5:20 1 तीमुथियुस 5:21 1 तीमुथियुस 5:22 1 तीमुथियुस 5:23 1 तीमुथियुस 5:24 1 तीमुथियुस 5:25



1 तीमुथियुस 5:19 का अर्थ
इस पद का तात्पर्य है: किसी भी पुराने, विश्वसनीय व्यक्ति पर दोष तब ही लगाया जाए जब दो या तीन गवाह हों। एक-एक गवाही से निर्णय न करें; पर्याप्त प्रमाण के बिना आरोप न करें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पत्र प्रेरित पौलुस के द्वारा मसीही समुदाय के आचरण और व्यवस्था के विषय में दिया गया निर्देश है। पुराने व्यक्ति (presbyters) चर्च की संस्था-निर्माण के मुख्य सदस्य होते हैं, और उनकी निष्कपटता, चरित्र और निर्देशन समुदाय के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। यहाँ लक्ष्य यह है कि आरोप-प्रकरणों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो ताकि निर्दोषों को नुकसान न पहुँचे और अपराधी को भी सही प्रक्रिया मिले।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
संवर्धन-आदेश: छोटी थीम-सूची
अन्य संदर्भ और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- व्यवस्था के अनुसार चार अनुयायियों की गवाही से निर्णय लेने की बात अन्य पुराने नियमों में भी मिलती है (उदा. वचन पर दो या तीन गवाहों की मांग)।
- चर्च के आंतरिक कर्तव्य के रूप में, दोषारोपण से पहले न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाई जाए ताकि समाज में दयालुता और नैतिकता बनी रहे।
- सामाजिक-न्याय की यह दृष्टि पवित्र शास्त्र के मूल सिद्धांत “सत्य और न्याय” के अनुरूप है, जो अनुच्छेदित आचरण का मानक बताती है।
इतर क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ
- हब. 10:28-29: कर्म-न्याय के तरीके स्पष्ट हैं; जो किसी पद-धर्मी पर दोष लागू करता है, उसे सही प्रक्रिया के बिना दंड नहीं देना चाहिए।
- दवितीय कुरिन्थियों 13:1: गवाही की दो-तीन अन्याय-रहित पुष्टि की आवश्यकता का विचार यहाँ भी प्रत्यक्ष है।
- व्यह्रित नियम 17:6: पुराने पर दोष लगाते समय गवाहों की कमी की स्थिति में सख्ती से बचना चाहिए।
निजी अनुप्रयोग
चर्च में प्रचलित शिकायतों या आरोपों के समय यह मानक याद रखें: बिना पर्याप्त गवाहों के किसी पर निष्कर्ष न निकालें; दयालुता, सत्य-निष्ठा और भाईचारे को खोना न हो। यदि आप सचमुच दोषी हैं, तो विनम्रता से प्रत्यक्ष कानूनी-आचरण अपनाएँ; यदि आप निर्दोष हैं, तो गोपनीय और उचित प्रक्रिया के साथ अपने पक्ष को प्रस्तुत करें।
एंट्री-रेफरेंसेस के बारे में: नीचे 2-3 प्रमुख संदर्भ दिए गए हैं ताकि पाठक मूल विचार समझ सकें, परंतु विस्तृत पाठ नहीं लिखा गया।
सम्पादनिक दिमान: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों को प्राकृतिक तरीके से समाहित करती है; इनमें से कुछ कथन संक्षेप रूप से उद्धृत हैं।
नोट: कोई पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है; यदि उन लेखकों के विशिष्ट वाक्यों का संक्षिप्त उद्धरण मिला, तो उसे नीचे स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है।