Old Testament
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2 थिस्सलुनीकियों 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो परमेश्वर को नहीं पहचानते, और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते उनसे पलटा लेगा। (भज. 79:6, यशा. 66:15, यिर्म. 10:25)
2 थिस्सलुनीकियों 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 थिस्सलुनीकियों 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 4:17 (HINIRV) »
क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उनका क्या अन्त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते? (इब्रा. 12:24-25, यिर्म. 25:29, यहे. 9:6)

2 पतरस 3:7 (HINIRV) »
पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा* इसलिए रखे हैं, कि जलाए जाएँ; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।

भजन संहिता 79:6 (HINIRV) »
जो जातियाँ तुझको नहीं जानती, और जिन राज्यों के लोग तुझ से प्रार्थना नहीं करते, उन्हीं पर अपनी सब जलजलाहट भड़का! (1 थिस्सलु. 4:5, 2 थिस्सलु. 1:8)
अर्थ का सीधे संकेत
2 थिस्सलुनीकियों 1:8 में प्रेरित पवित्र आत्मा के द्वारा लिखा गया है कि उन लोगों पर परमेश्वर का क्रोध वेग से उतरने वाला है जो परमेश्वरे को नहीं पहचानते और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते। यह बात अंतिम न्याय और सेაცი के भयावह परिणामों की ओर संकेत देती है, जहाँ चेतावनी के साथ यह स्पष्ट किया गया है कि उद्धार के मार्ग को अस्वीकार करने का न्याय के साथ परिणाम जुड़ा है।
संदर्भिक पृष्ठभूमि
थिस्सलुनिकियों केChurch में पॉल ने विश्वासियों को पक्का किया कि दुख और persegution के बीच भी ईश्वर का न्याय तर्कसंगत और योजनाबद्ध है। जो लोग सुसमाचार को स्वीकृत नहीं करते, वे न केवल वर्तमान परीक्षणों के कारण हैं, बल्कि अंतिम दिन परमेश्वर के क्रोध के पात्र भी बनते हैं। भजन 79:6, यशायाह 66:15, यिर्मयाह 10:25 जैसे उद्धरण वहां मौलिक न्याय की अवधारणा को पुष्ट करते हैं कि परमेश्वर धार्मिक प्रतिवर्त और दुष्कर्म पर वैसी ही प्रतिक्रिया देता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- “जो परमेश्वर को नहीं पहचानते”—यह तढ़ना हमारी दिनचर्या से परे एक ब्रह्मांडीय सच है: परमेश्वरीय पहचान व्यक्ति के जीवन के केंद्र में होनी चाहिए; पहचान का अभाव सच के ज्ञान और प्रेम से दूरी बनाता है।
- “हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते”—कथन यह दर्शाता है कि सुसमाचार केवल सुना देने योग्य नहीं रहता, उसे मानना, उसे उद्धार का मार्ग बनाना आवश्यक है।
- “उनसे पलटा लेगा”—यह शब्द न्याय के घटक के रूप में क्रिया-व्यवस्था को दर्शाता है: जो अविश्वास में स्थिर रहते हैं, उनके लिए परमेश्वर का पलटकर आना प्रत्यक्ष है; यह धर्मनिष्ठता और अविश्वास के बीच विभाजन को स्पष्ट करता है।
मूल विचारों का संक्षेप
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त व्याख्या
- भज., 79:6: परमेश्वर के क्रोध के दिन का विचार यहां स्मरण कराया गया है—ईमानदार दया के साथ उनके निर्णय से बार-बार सावधान किया गया है।
- यशा. 66:15: ईश्वर की उपस्थिति और उद्धार के साथ शक्ति का प्रदर्शन—उस पल में न्याय भी आता है।
- यिर्म. 10:25: परमेश्वर के प्रत्यक्ष क्रोध की चेतावनी—कठोर परन्तु सच्चे परमेश्वर के न्याय का भाग है।
व्यावहारिक takeaway
जो लोग सुसमाचार को मानते, उसमें दृढ़ विश्वास रखते और परमेश्वर की पहचान को जीवन के केंद्र में लेते हैं, वे अंतिम दिनों के न्याय से सुरक्षित रहते हैं। विश्वास के इस मार्ग को अपनाने से जीवन में स्थिरता, प्रेरणा और आशा मिलती है; अन्यथा, अवज्ञा के परिणाम सामने आ सकते हैं।
ईसाई जीवन में लागू दृश्य
1) जीवन के निर्णयों में ईश्वर के मार्ग को प्राथमिकता दें। 2) बाइबल के साथ एक निष्ठावान पाठन और प्रार्थना जीवन बनाएं जिससे सुसमाचार के संदेश को आत्मसात किया जा सके। 3) समुदाय में जिम्मेदारी और प्रेरणा से एक दूसरे को उद्धार के मार्ग पर टिके रहने में मदद करें।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डॉमिन स्रोतों से आवश्यक विचार परिस्थिति अनुसार मिलते हैं; इनकी छोटी-छोटी कथनें उनके पूर्ण व्याख्यान में मिलती है।