Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 थिस्सलुनीकियों 1:12 बाइबल पद की व्याख्या
2 थिस्सलुनीकियों 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि हमारे परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार हमारे प्रभु यीशु का नाम तुम में महिमा पाए, और तुम उसमें। (यशा. 24:15, यशा. 66:5, 1 पत. 1:7-8)
2 थिस्सलुनीकियों 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 थिस्सलुनीकियों 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 थिस्सलुनीकियों 1:10 (HINIRV) »
यह उस दिन होगा, जब वह अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने, और सब विश्वास करनेवालों में आश्चर्य का कारण होने को आएगा; क्योंकि तुम ने हमारी गवाही पर विश्वास किया। (1 थिस्स. 2:13, 1 कुरि. 1:6, भज. 89:7, यशा. 49:3)

1 पतरस 4:14 (HINIRV) »
फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा की आत्मा, जो परमेश्वर की आत्मा है, तुम पर छाया करती है। (मत्ती 5:11-12)

यूहन्ना 17:10 (HINIRV) »
और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है; और जो तेरा है वह मेरा है; और इनसे मेरी महिमा प्रगट हुई है।
2 थिस्सलुनीकियों 1:12—यही है हमारे उपकार का उद्देश्य
इस पद का सरल अर्थ यह है: परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार वे हमारे भीतर महिमा पाएँगे; ताकि हमारा जीवन उनके नाम के योग्य दिखाई दे और हम विश्वास में दृढ़ होकर परम पिता के सिंहासन के सामने उनके अनुग्रह के कारण सम्मानित हों।
पृष्ठभूमि का संक्षेप
लेखक पॉल ने थिस्सलुनीकियों के चर्च को आमंत्रित किया था कि वे प्रभु यीशु मसीह के विरुद्ध प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भी विश्वास के कारण स्थिर रहें। इस अध्याय में वे विरुद्धियों के बीच परमेश्वर के न्याय, उद्धार और महिमा के लक्ष्य पर जोर देते हैं। यहाँ कहा गया है कि परमेश्वर का अनुग्रह और यीशु मसीह का नाम हमारे जीवन में महिमा पाए, ताकि भगवान के लक्ष्य प्रकट हों और हम उसे मानें।
interpretive observations
थीमाक संक्षेप
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
- यशा 24:15: प्रभु के नाम की महिमा पृथ्वी पर प्रकट होने का कारण, जिससे आदरणीय नाम के अनुरूप जीवन बन सके। - यशा 66:5: विश्वासियों के लिए सम्मान और परमेश्वर के न्याय का साक्षात्कार—यही महिमा का प्रभाव है। - 1 पतरस 1:7-8: विश्वास की अवहेलना से महिमा की अनुभूति तब होती है जब नज़दीकी-आस्था कठिन परिस्थितियों में चमकती है।
प्रयोज्य निष्कर्ष
संक्षिप्त व्याख्या
पौल says कि हमारा जीवन ईश्वरीय अनुग्रह के अनुसार संचालित हो, ताकि यीशु मसीह का नाम लोगों के बीच महिमा पाये। यह दृश्य इस प्रकार है: जब हम विश्वास में टिके रहते हैं और परमेश्वर के साथ हमारा संबंध मजबूत होता है, तब जीवन यीशु के नाम से आधुनिकता नहीं बल्कि समाधान और उद्धार की गूँज बन जाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पवित्र टिप्पणी से)
यद्यपि पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा सकते, किन्तु Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्दों में इस प्रकार का तर्क मिलता है:—अनुग्रह के कारण ही उद्धार और महिमा दोनों एक साथ घटित होते हैं; यीशु के नाम की महिमा हमारे चरित्र और उच्च आदर्शों को उन्नत करती है।
इस पाठ का व्यावहारिक सार: कठिन समय में भी विश्वास बनाए रखें; क्योंकि परमेश्वर की महिमा तभी दिखती है जब हम यीशु के नाम को अपने जीवन के केंद्र में रखते हैं और इस क्रम में व्यवहार करते हैं।