Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 17:1 यूहन्ना 17:2 यूहन्ना 17:3 यूहन्ना 17:4 यूहन्ना 17:5 यूहन्ना 17:6 यूहन्ना 17:7 यूहन्ना 17:8 यूहन्ना 17:9 यूहन्ना 17:10 यूहन्ना 17:11 यूहन्ना 17:12 यूहन्ना 17:13 यूहन्ना 17:14 यूहन्ना 17:15 यूहन्ना 17:16 यूहन्ना 17:17 यूहन्ना 17:18 यूहन्ना 17:19 यूहन्ना 17:20 यूहन्ना 17:21 यूहन्ना 17:22 यूहन्ना 17:23 यूहन्ना 17:24 यूहन्ना 17:25 यूहन्ना 17:26



यूहन्ना 17:10 का पाठानुरोध और उसके अर्थ
स्थिति का सेटअप: यह पद यूहन्ना के गुप्त प्रार्थनाप्रसंग में आता है, जब यीशु वेदी पर नहीं बल्कि अपने अनुयायियों के सामने और पिता के साथ निकट संपर्क में अपनी महिमा, अपनी इच्छा और अपने मिशन के संबंध में बातें कर रहे हैं। उनका द्वितीय चरण यह बताता है कि पुत्र और पिता एक हैं, और उनके बीच संपत्ति, स्वामित्व और महिमा का साझा स्वभाव है।
पाठ का सार: परमेश्वर और विश्वास के बारे में खुलासे
यह वाक्य बताता है कि जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है; और जो तेरा है वह मेरा है; और इनसे मेरी महिमा प्रगट हुई है। दो दायरे उसी एक परमेश्वर-परिवार के भीतर एकत्व को दर्शाते हैं: पुत्र अपने फसल-उद्धार और जीवन की क्रिया में पिता के अधिकार और महिमा को मानता है; और पिता उसी महिमा को पुत्र के माध्यम से प्रकट करते हैं। यह एक निहित समर्पण और आत्म-उपस्थिति का चित्र है, जिसमें आत्म विज्ञान के अनुसार मानव इतिहास के अर्थ को परमेश्वर की योजना से मिला कर देखा जाता है।
कहने के लिए स्पष्ट बात यह है कि पिता और पुत्र का संबंध अधिकार, प्राप्ती और महिमा में एक है, और यह एक मौलिक स्थायित्व देता है: जो कुछ भी यीशु के पास है, वह परमेश्वर की अनुमति और इच्छा से आता है; और जो यीशु के पास है, वह पिता के लिए है। इस एकात्मता के कारण यीशु अपने अनुयायियों को भी अपनी महिमा में सहभागी बनाते हैं, ताकि उनकी आस्था उनके जीवन के हर क्षेत्र में प्रगट हो सके।
महत्वपूर्ण शब्द और छवि
संबद्ध पवित्र ग्रंथ
इन पंक्तियों के साथ निम्न क्रॉस-रेफरेंसेस विचारयोग्य रहती हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की महिमा और उद्धार की राह किस प्रकार पिता-प्रेम और पुत्र-यात्रा के संयुक्त प्रभाव में प्रकट होती है।
आज के जीवन में लागू होने वाले तथ्य
1) समाज और व्यक्तिगत जीवन में एक सही दायित्व-समझ: हमारे सभी प्रयास परमेश्वर की अनुमति और-सहयोग से आगे बढ़ते हैं; इसलिए हमें विनम्रता और समर्पण के साथ योजना बनानी चाहिए।
2) विश्वास की महिमा में भागीदारी: मसीह की महिमा से हमारा जीवन प्रकाशित हो, ताकि हम दूसरों को प्रेरित करें कि वे भी परमेश्वर के प्रेम और संचालन में भागीदार बनें।
3) एकता के मूल्य को व्यवहार में लाएं: परिवार, समुदाय और चर्च में एक दूसरे के ऊपर प्रभु-स्वामी की एकता से विश्वास मजबूत होता है।
संक्षिप्त समेकन
पिता और पुत्र की एकता में संचालित, यह वाक्य दर्शाता है कि सारी महिमा और संपत्ति परमेश्वर के ही अधिकार में है, और यीशु अपने अनुयायियों को उसी महिमा और उद्देश्य का भागीदार बनाते हैं। इस कारण हमारा जीवन भी परमेश्वर की महिमा को प्रकट करने का एक साधन बन जाए।
आध्यात्मिक सार: परमेश्वर के साथ यीशु की एकता से जीवन-उद्धार और महिमा एक साथ आते हैं; हमारा भागीदारी उन दोनों के प्रेम-कार्य का हिस्सा बनती है।
नोट—पायदान उद्धरण: नीचे के पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke की स्पष्ट उद्धरण-रेखाएं उपलब्ध हैं यदि उपलब्ध हों:
यही मुख्य विचार है कि पिता और पुत्र एक हैं और उनकी महिमा एक साथ प्रकट होती है; यह विचार उनके पूर्ववर्ती टिप्पणी-आइडिया में देखने को मिलता है।